सुरक्षा बलों ने बताया कि दक्षिण कश्मीर के कुलगाम ज़िले के अखल वन क्षेत्र में शुक्रवार को शुरू किया गया सर्च ऑपरेशन उस समय मुठभेड़ में बदल गया जब वहां छिपे आतंकियों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी। यह ऑपरेशन अब शनिवार को लगातार दूसरे दिन भी जारी है।

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम ज़िले में भारतीय सुरक्षा बलों ने एक बार फिर आतंक के पनाहगाह पर सीधा हमला बोलते हुए एक खतरनाक आतंकी को ढेर कर दिया। ऑपरेशन “अखल” के तहत हुए इस एनकाउंटर में भारतीय सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त टीम ने बीती रात आतंकवाद के खिलाफ एक निर्णायक कार्रवाई को अंजाम दिया।
सुरक्षा बलों की यह सख्त कार्रवाई घाटी में सक्रिय आतंकी नेटवर्क के लिए बड़ा संदेश है – “अब कोई बख्शा नहीं जाएगा!”
ऑपरेशन अखल: कब, कहाँ और कैसे शुरू हुआ मिशन?
यह कार्रवाई कुलगाम जिले के फुर्रका क्षेत्र में की गई, जो घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों के कारण आतंकियों की छिपने की पुरानी शरणस्थली रहा है। खुफिया एजेंसियों को इनपुट मिला था कि कुछ आतंकी हिजबुल मुजाहिदीन और TRF (The Resistance Front) जैसे संगठनों से जुड़े हैं और इसी इलाके में डेरा जमाए हुए हैं।
सूत्रों के अनुसार, 1 अगस्त की रात करीब 11:30 बजे ऑपरेशन अखल शुरू हुआ। सुरक्षा बलों ने इलाके को घेर लिया और आतंकियों को आत्मसमर्पण के लिए ललकारा गया। जवाब में आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी और मुठभेड़ की स्थिति बन गई।
मुठभेड़ में मारा गया आतंक का ‘शातिर खिलाड़ी’
करीब चार घंटे चली इस कार्रवाई में एक दुर्दांत आतंकी को मार गिराया गया। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, मारा गया आतंकी दक्षिण कश्मीर के लिए सक्रिय ऑपरेशनल कमांडर था और उसके खिलाफ पहले से कई FIR दर्ज थीं।
मौके से भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद, एक एके-47 राइफल, ग्रेनेड और नकली आधार कार्ड बरामद किए गए हैं। मारे गए आतंकी की पहचान फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है क्योंकि उसकी विदेशी संबंधों की जांच अभी जारी है।
सीमित दायरे में रही मुठभेड़, बड़ी जनहानि टली
सुरक्षा बलों ने यह स्पष्ट किया है कि मुठभेड़ प्लेटफॉर्म 14 और 15 को जोड़ने वाले रास्ते तक सीमित थी (जैसा पहले कुछ मीडिया रिपोर्ट्स ने बताया था), यानी स्थानीय आबादी को कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा।
आर्मी के प्रवक्ता के अनुसार –
“हमने ऑपरेशन को बेहद सटीक तरीके से अंजाम दिया, ताकि आतंकियों को खत्म किया जा सके लेकिन आम नागरिकों को किसी भी प्रकार की क्षति न हो।”
घाटी में डर और सुरक्षा दोनों की चादर
इस एनकाउंटर के बाद इलाके में इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी गई हैं और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई है। स्थानीय लोग एक ओर सेना के इस साहसिक अभियान से संतुष्ट हैं, वहीं दूसरी ओर आतंकी retaliation (बदले की कार्रवाई) को लेकर चिंतित भी हैं।
फुर्रका गांव के निवासी गुलाम नबी ने कहा,
“हमने रात को गोलियों की आवाज़ें सुनीं, बच्चे डर से काँपने लगे। लेकिन सुबह पता चला कि एक आतंकी को मारा गया है। अब चैन की सांस ले रहे हैं।”
आतंक पर सरकार की नीति: “नो मर्सी, नो निगोशिएशन”
गृहमंत्री अमित शाह ने ऑपरेशन अखल की सफलता पर सुरक्षा बलों को बधाई दी और कहा,
“कश्मीर में आतंक की कोई जगह नहीं है। हम एक-एक दुश्मन को उनकी मांद से निकाल कर खत्म करेंगे।”
इससे पहले भी गृह मंत्रालय ने आतंक के खिलाफ ‘Zero Tolerance Policy’ की बात करते हुए कहा था कि अब “संवाद नहीं, संहार होगा”।
विपक्ष की प्रतिक्रिया: “अच्छा कदम, लेकिन सतर्कता ज़रूरी”
हालांकि सरकार की कार्रवाई की सराहना की जा रही है, पर विपक्ष ने इसे चुनावी दिखावा करार देने से परहेज़ नहीं किया। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा,
“हम आतंक के खिलाफ हर ऑपरेशन का समर्थन करते हैं, लेकिन सरकार को यह भी देखना चाहिए कि लगातार आतंकी घुसपैठ क्यों हो रही है?”
टीएमसी की महुआ मोइत्रा ने सवाल उठाया कि क्या आतंकी लगातार घाटी में घुसकर शरण ले रहे हैं और खुफिया नेटवर्क पूरी तरह एक्टिव है?
ऑपरेशन अखल: क्या है इसके पीछे की योजना?
‘ऑपरेशन अखल’ सिर्फ एक एनकाउंटर नहीं, बल्कि एक विस्तृत सैन्य रणनीति का हिस्सा है जो दक्षिण कश्मीर में सेक्टर-वार आतंकियों की सफाई के लिए बनाई गई है। इसके तहत:
- हाई-टेक सर्विलांस ड्रोन से जंगलों और ऊंचे इलाकों की निगरानी की जा रही है।
- स्थानीय खुफिया सूत्रों को फिर से सक्रिय किया गया है।
- NIA और RAW के साथ समन्वय बनाकर कार्रवाई को अंजाम दिया जा रहा है।
एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने FiveWs News को बताया,
“ऑपरेशन अखल में कुलगाम सिर्फ शुरुआत है। अगला टारगेट शोपियां और पुलवामा है।”
आतंकियों के लिए ताबूत बनता कश्मीर: हाल के प्रमुख एनकाउंटर्स
ऑपरेशन अखल से पहले भी पिछले दो महीनों में कई अहम एनकाउंटर हुए हैं:
- जून 2025: शोपियां में 3 आतंकियों को मारा गया
- जुलाई 2025: पुलवामा में आत्मघाती हमले की साजिश नाकाम
- 14 जुलाई 2025: बडगाम में सुरक्षाबलों ने एक पाकिस्तानी आतंकी को जिंदा पकड़ा
इससे स्पष्ट है कि सुरक्षा बल आतंकियों को न तो पनपने दे रहे हैं और न छिपने।
पाकिस्तान की बौखलाहट: नियंत्रण रेखा पर बढ़ी हलचल
जैसे ही कुलगाम मुठभेड़ की खबर आई, भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा (LoC) पर पाकिस्तानी राडार्स और गतिविधियों में हलचल दर्ज की है। सेना को शक है कि पाकिस्तान सीमा पर आतंकी लॉन्चपैड्स को फिर से सक्रिय कर रहा है।
खुफिया सूत्रों के अनुसार, ISI अब नए स्लीपर सेल भेजने की योजना बना रही है ताकि जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाई जा सके।
निष्कर्ष: ‘ऑपरेशन अखल’ बना आतंकियों की कब्र, पर जंग अभी बाकी
कुलगाम की यह कार्रवाई निश्चित ही एक बड़ी कामयाबी है। एक प्रशिक्षित, खूंखार आतंकी का अंत सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि आने वाले तूफान की दस्तक है – वह तूफान जिसमें भारत ने साफ कर दिया है कि अब आतंकवाद बर्दाश्त नहीं होगा।
‘ऑपरेशन अखल’ का नाम आने वाले समय में भारत की आतंकरोधी रणनीति का अहम अध्याय बन सकता है। लेकिन यह भी सच है कि यह लड़ाई लंबी है और इस जंग में हर मोर्चे पर सजगता, संयम और सटीकता की ज़रूरत है।
