व्हाइट हाउस ने कहा है कि अमेरिका ने कनाडा पर टैरिफ को 25% से बढ़ाकर 35% कर दिया है। यह कदम उस स्थिति की प्रतिक्रिया में उठाया गया है जिसे प्रशासन ने कनाडा द्वारा “अवैध मादक पदार्थ संकट” से निपटने में विफलता और अमेरिका द्वारा इस खतरे से निपटने के लिए उठाए गए कदमों के खिलाफ कनाडा की “प्रतिशोधात्मक कार्रवाई” बताया है।

अमेरिका की वापसी का ट्रंप स्टाइल: 70 देशों पर एक साथ शुल्क की मार
डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर सुर्खियों में हैं—और इस बार कारण है उनकी धमाकेदार घोषणा जिसने वैश्विक व्यापार जगत में हलचल मचा दी है। 2025 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों की दौड़ में सबसे आक्रामक खिलाड़ी के रूप में उभरते ट्रंप ने ऐलान किया है कि 7 अगस्त 2025 से अमेरिका भारत समेत 70 देशों पर नई टैरिफ नीतियां लागू करेगा। इस फैसले को अमेरिकी राष्ट्रवाद की वापसी और ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का नया अवतार माना जा रहा है।
कौन-कौन हैं निशाने पर? भारत से लेकर ब्राज़ील तक सब लाइन में
ट्रंप प्रशासन की इस नीतिगत बमबारी में जिन देशों को निशाना बनाया गया है, उनमें कई बड़े साझेदार और मित्र देश भी शामिल हैं। इनमें भारत, ब्राज़ील, दक्षिण अफ्रीका, वियतनाम, तुर्की, इंडोनेशिया, फिलीपींस, थाईलैंड, मिस्र, अर्जेंटीना, मैक्सिको और मलेशिया जैसे विकासशील देश शामिल हैं।
ट्रंप का दावा है कि ये देश वर्षों से अमेरिका का “शोषण” कर रहे हैं और अब समय आ गया है कि उन्हें “सबक” सिखाया जाए। भारत, जो कि अमेरिका का रणनीतिक साझेदार रहा है, उसे इस सूची में देखकर हैरानी जताई जा रही है।
ट्रंप की दलील: “हमने अपना बाजार सस्ता बेच दिया”
अपने ट्रेड टैरिफ फैसले को सही ठहराते हुए ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा,
“हमने दशकों तक अपना बाज़ार सस्ते में इन देशों को दिया, अब समय आ गया है कि अमेरिका अपने फायदे की सोचें। हम उत्पाद बनाएँगे, और हम उन्हें ऊंचे दामों पर बेचेंगे। हम दुनिया की फैक्ट्री नहीं, सुपरपावर हैं।”
ट्रंप की इस बयानबाज़ी में उनका 2016 वाला आत्मविश्वास झलकता है, जब उन्होंने “चीन से व्यापार युद्ध” शुरू कर पूरी दुनिया को चौंका दिया था।
भारत की चिंता: आईटी, टेक्सटाइल और फार्मा सेक्टर पर मंडराया संकट
भारत के लिए इस टैरिफ नीति का सबसे बड़ा असर आईटी सर्विसेज, कपड़ा और फार्मास्युटिकल उद्योगों पर पड़ सकता है। अमेरिका भारत के लिए सबसे बड़ा सेवा निर्यात बाज़ार है, खासकर आईटी क्षेत्र में।
वाणिज्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि,
“अगर अमेरिका भारतीय कंपनियों पर 10–25% तक का अतिरिक्त शुल्क लगाता है, तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था को गहरी चोट पहुंचा सकता है।”
सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार इस मुद्दे को लेकर अमेरिका से डिप्लोमैटिक चैनलों के ज़रिए संपर्क साधने की योजना बना रही है।
मोदी सरकार की कूटनीतिक चुनौती
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए यह स्थिति राजनीतिक और कूटनीतिक दोनों मोर्चों पर कठिन साबित हो सकती है। हाल ही में पीएम मोदी और ट्रंप की मुलाक़ात G20 सम्मेलन में हुई थी, जिसे “सकारात्मक” बताया गया था। लेकिन अब ट्रंप की टैरिफ बमबारी ने दोनों देशों के रिश्तों में तनाव पैदा कर दिया है।
विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया,
“हम स्थिति का आंकलन कर रहे हैं। भारत अपने राष्ट्रीय हितों के साथ कोई समझौता नहीं करेगा।”
चीन की चुप्पी, रूस की हँसी?
इस घोषणा पर चीन ने अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन चीनी मीडिया में इसे ट्रंप की पुरानी रणनीति की वापसी बताया जा रहा है। वहीं, रूस ने व्यंग्यात्मक अंदाज़ में कहा कि अमेरिका अब अपने ही पुराने मित्रों को सज़ा देने पर उतारू है।
क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा,
“अमेरिकी नेतृत्व अब उस बंदूक से अपने ही पैर में गोली मार रहा है, जो कभी उसने दूसरों को डराने के लिए बनाई थी।”
पूरी लिस्ट: टैरिफ के घेरे में कौन-कौन से देश
नीचे उन 70 देशों की आंशिक सूची दी जा रही है, जिन पर 7 अगस्त से नए आयात शुल्क लागू होंगे:
- भारत
- ब्राज़ील
- इंडोनेशिया
- वियतनाम
- तुर्की
- दक्षिण अफ्रीका
- फिलीपींस
- थाईलैंड
- मलेशिया
- मिस्र
- अर्जेंटीना
- मैक्सिको
- कोलंबिया
- चिली
- यूक्रेन
- पाकिस्तान
- बांग्लादेश
- सऊदी अरब
- नाइजीरिया
- केन्या
(बाकी 50 देशों की सूची आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की जाएगी)
बाजार में उथल-पुथल: शेयर बाजार लुढ़के, रुपया कमजोर
ट्रंप की घोषणा के बाद ही भारत में शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखी गई। सेंसेक्स 850 अंक गिर गया और निफ्टी 250 पॉइंट्स नीचे बंद हुआ। रुपया भी डॉलर के मुकाबले 82.45 से गिरकर 83.20 पर पहुँच गया।
आईटी, फार्मा और एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड कंपनियों के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई।
विशेषज्ञों की राय: ट्रंप का चुनावी स्टंट या रणनीतिक चाल?
कई अंतरराष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रंप की चुनावी रणनीति है। अमेरिका में अगले साल राष्ट्रपति चुनाव हैं, और ट्रंप अपने ‘अमेरिका फर्स्ट’ वोटबैंक को दोबारा जगाना चाहते हैं।
अर्थशास्त्री अरविंद सुब्रमण्यम ने कहा,
“यह पॉलिसी बहुत हद तक प्रतीकात्मक हो सकती है। लेकिन भारत जैसे देशों को इसकी तैयारी करनी चाहिए, क्योंकि ट्रंप अगर जीतते हैं, तो ये नीतियां स्थायी हो सकती हैं।”
बाइडेन प्रशासन की प्रतिक्रिया: ‘गंभीर मामला’
ट्रंप की इस घोषणा को लेकर मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडेन की सरकार ने कहा है कि यह एक “गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण बयान” है, और इसका अमेरिका की छवि पर असर पड़ सकता है। व्हाइट हाउस प्रवक्ता ने कहा कि,
“ट्रंप की नीतियाँ केवल व्यापार नहीं, अमेरिका की विश्वसनीयता को भी नुकसान पहुँचा सकती हैं।”
भारत का अगला कदम क्या होगा?
अब सभी की निगाहें भारत सरकार के अगले कदम पर हैं। क्या भारत अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी टैरिफ लगाएगा? क्या डिप्लोमैटिक स्तर पर कोई समाधान निकलेगा? या भारत अमेरिका की शर्तें मानने को मजबूर होगा?
सूत्र बताते हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस मुद्दे पर उच्चस्तरीय बैठक कर चुके हैं और जल्द ही अमेरिका से बातचीत के संकेत दिए जा सकते हैं।
🔍 निष्कर्ष: टैरिफ की आड़ में भू-राजनीतिक चाल?
डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दुनिया को यह याद दिला दिया है कि वे किसी भी समय, किसी भी मोर्चे पर बड़ा झटका दे सकते हैं। 70 देशों पर टैरिफ लगाना सिर्फ एक व्यापारिक निर्णय नहीं, बल्कि यह एक भूराजनीतिक संकेत भी है कि ट्रंप का अमेरिका अब दोस्त और दुश्मन में फर्क किए बिना ‘अमेरिका फर्स्ट’ को ही सर्वोपरि मानेगा।
भारत के लिए यह सिर्फ आर्थिक नहीं, रणनीतिक परीक्षा भी है। मोदी सरकार को अब सावधानी से हर कदम उठाना होगा — क्योंकि मामला सिर्फ व्यापार का नहीं, राष्ट्रीय प्रतिष्ठा का भी है।
