सेंसेक्स, निफ्टी आज: निफ्टी 50 के शुरुआती संकेतक गिफ्ट निफ्टी ने कमजोर शुरुआत के संकेत दिए, क्योंकि यह पिछले बंद स्तर 24,854 की तुलना में 153.5 अंकों की गिरावट के साथ 24,700.50 पर खुला।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताज़ा व्यापारिक हमले से भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार सुबह ही अफरा-तफरी मच गई। जैसे ही ट्रंप ने भारत पर 25% टैरिफ और रूस से सैन्य व ऊर्जा सौदों को लेकर अतिरिक्त दंडात्मक कार्रवाई की घोषणा की, वैसे ही घरेलू बाजार ने गैप-डाउन ओपनिंग के साथ गोता लगा लिया।
शुरुआत होते ही सेंसेक्स 575 अंक लुढ़क गया और निफ्टी 24,700 के नीचे फिसल गया। सबसे ज्यादा मार ऑटोमोबाइल और फार्मा सेक्टर पर पड़ी, जहां शेयरों में 3% तक की गिरावट दर्ज की गई।
ट्रंप का बयान जिसने बाजार को झकझोर दिया
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने एक तीखे बयान में भारत को चेतावनी देते हुए कहा:
“भारत ने रूस से हथियार और ऊर्जा खरीदकर अमेरिकी हितों को नजरअंदाज़ किया है। इसके जवाब में हम 25% टैरिफ और अतिरिक्त पेनल्टी लगाएंगे।”
इस बयान के तुरंत बाद वैश्विक बाजारों में हलचल मच गई, लेकिन सबसे ज्यादा असर भारत पर देखने को मिला, जहाँ विदेशी निवेशकों ने भारी मात्रा में बिकवाली शुरू कर दी।
बाजार खुलते ही मातम
शुक्रवार सुबह 9:15 बजे ही बाजार में गैप-डाउन ओपनिंग देखी गई।
- सेंसेक्स 575 अंक टूटकर 81,185 पर खुला
- निफ्टी 50 180 अंक लुढ़ककर 24,685 तक पहुंच गया
- बैंक निफ्टी भी 400 अंक से ज्यादा गिरा
बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, ट्रंप के बयान ने निवेशकों की भावनाओं पर कड़ा असर डाला है। विशेषकर उन क्षेत्रों पर मार पड़ी है, जो अमेरिका-भारत व्यापारिक संबंधों पर निर्भर हैं।
फार्मा और ऑटो सेक्टर में भारी गिरावट
फार्मा सेक्टर
- Sun Pharma: 3.4% की गिरावट
- Dr. Reddy’s: 2.8% नीचे
- Lupin और Cipla भी 2% से ज्यादा फिसले
फार्मा कंपनियाँ अमेरिका में बड़े पैमाने पर निर्यात करती हैं। ट्रंप के टैरिफ फैसले से भारतीय दवाओं की प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ने की आशंका है।
ऑटो सेक्टर
- Tata Motors: 4.2% की गिरावट
- Mahindra & Mahindra: 3.1% नीचे
- Maruti Suzuki: 2.9% लुढ़की
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका में EV और ऑटो पार्ट्स पर आयात शुल्क से भारतीय ऑटो उद्योग की कमर टूट सकती है।
एफआईआई का पलायन और रुपया बेहाल
शुक्रवार को Foreign Institutional Investors (FIIs) ने लगभग ₹4,500 करोड़ की बिकवाली की, जिससे बाजार की हालत और बिगड़ी। साथ ही भारतीय रुपया 46 पैसे टूटकर 83.92 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।
करेंसी एक्सपर्ट्स का कहना है कि विदेशी पूंजी का अचानक बाहर जाना, ट्रंप की धमकी और वैश्विक तनाव ने रुपया कमजोर कर दिया है।
निवेशकों में दहशत, 6 लाख करोड़ रुपये डूबे
बाजार खुलते ही महज एक घंटे में बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप ₹6 लाख करोड़ तक घट गया। खुदरा निवेशकों में डर का माहौल था।
मुंबई के एक ट्रेडर ने FiveWs News से बातचीत में कहा:
“हमने ऐसा झटका कोविड के समय देखा था। ट्रंप की धमकी ने फिर वैसी ही बेचैनी पैदा कर दी है।”
सरकार की स्थिति: ‘स्थिति पर नज़र है’
भारत सरकार ने फिलहाल इस गिरावट पर कोई आपात प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन वित्त मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि सरकार विदेश मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय के साथ संपर्क में है।
एक अधिकारी ने कहा:
“हम बाजार की अस्थिरता पर नजर बनाए हुए हैं और अमेरिकी प्रशासन से स्पष्टता की उम्मीद कर रहे हैं।”
क्या यह गिरावट स्थायी है?
बाजार विशेषज्ञों की राय इस पर बंटी हुई है।
- कुछ का कहना है कि यह भावनात्मक रिएक्शन है और कुछ ही दिनों में बाजार सुधर सकता है।
- जबकि अन्य मानते हैं कि अगर अमेरिका ने वाकई टैरिफ और दंड लागू कर दिए, तो भारत को बड़ा व्यापारिक झटका लग सकता है।
ICICI Securities के प्रमुख विश्लेषक सौरभ अग्रवाल कहते हैं:
“ट्रंप का यह बयान भारत के लिए सिग्नल है कि अमेरिका में चुनावी साल शुरू हो चुका है। अब वहां हर नीति पॉपुलिज़्म से संचालित होगी।”
वैश्विक बाजारों पर भी दिखा असर
ट्रंप के इस बयान से न केवल भारत, बल्कि एशियाई और यूरोपीय बाजारों पर भी दबाव देखा गया:
- Nikkei (जापान): 1.2% गिरा
- Hang Seng (हांगकांग): 1.5% नीचे
- FTSE (लंदन): 0.9% लुढ़का
यह दर्शाता है कि ट्रंप की नीतियाँ सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक व्यापार व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं।
छोटे निवेशकों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों की मानें तो ऐसे समय में घबराकर बिकवाली नहीं करनी चाहिए।
- लॉन्ग टर्म निवेशकों को संयम बरतने की सलाह दी गई है।
- SIP निवेशकों के लिए यह खरीद का अवसर हो सकता है।
Motilal Oswal के वरिष्ठ विश्लेषक ने कहा:
“ट्रंप का बयान भले ही बाजार को डराए, लेकिन बुनियादी आर्थिक संकेतक अभी भी मजबूत हैं। यह गिरावट अस्थायी हो सकती है।”
ट्रंप की धमकी के पीछे चुनावी राजनीति?
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप इस बयान के ज़रिए अमेरिकी घरेलू जनता को यह संदेश देना चाहते हैं कि वे ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के साथ वापस आ रहे हैं।
याद दिला दें कि ट्रंप ने पहले भी भारत को “टैरिफ किंग” कहा था और 2020 में भारत को GSP सूची से बाहर कर दिया था। उनके बयान अब चुनाव 2025 की तैयारी का हिस्सा माने जा रहे हैं।
निष्कर्ष: बाजार में गिरे शेयर, पर उभरे सवाल
ट्रंप की 25% टैरिफ धमकी ने सिर्फ बाजार को नहीं गिराया, बल्कि कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं:
- क्या अमेरिका-भारत के संबंध व्यापार युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं?
- क्या भारत को चीन की तरह अमेरिकी टारगेट बनाया जा रहा है?
- क्या यह सिर्फ चुनावी स्टंट है या व्यापारिक ब्लैकमेल?
इन सवालों के जवाब आने वाले हफ्तों में मिलेंगे। फिलहाल इतना तय है कि ट्रंप के एक बयान ने लाखों निवेशकों को हिला कर रख दिया है।
