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बाराबंकी मंदिर हादसा: आस्था बनी अफरा-तफरी का शिकार, छत पर गिरी बिजली की तार से मची भगदड़ में 2 की मौत, 32 घायल

बाराबंकी के अवशानेश्वर महादेव मंदिर में बंदरों द्वारा गिराई गई एक जीवित बिजली की तार ने भगदड़ जैसी स्थिति पैदा कर दी, जिसमें 32 श्रद्धालु घायल हो गए, जिनमें दो की हालत गंभीर बताई जा रही है।

आस्था और श्रद्धा का स्थल उस वक्त चीख-पुकार और दहशत का मैदान बन गया, जब बाराबंकी जिले के एक प्रसिद्ध मंदिर की छत पर अचानक हाई वोल्टेज लाइव तार गिर गई। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मौजूद थी, जिससे मौके पर भगदड़ मच गई। इस भयावह हादसे में दो लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 32 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को जिला अस्पताल और लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है।

क्या हुआ उस मनहूस सुबह?
हादसा रविवार सुबह उस समय हुआ जब बाराबंकी के टिकैतनगर क्षेत्र के प्रसिद्ध भवानी देवी मंदिर में विशेष पूजा का आयोजन चल रहा था। सावन के सोमवार से एक दिन पहले भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी हुई थी। श्रद्धालु भजन-कीर्तन में मग्न थे, तभी अचानक मंदिर की छत पर ऊपर से गुज़र रही हाई वोल्टेज बिजली की लाइन का तार टूटकर मंदिर की छत पर गिर पड़ा।

छत से करंट मंदिर की रेलिंग और फर्श में फैल गया। कुछ श्रद्धालुओं को झटका लगा और बाकी लोग चीखते हुए भागने लगे। यह भगदड़ कुछ ही मिनटों में जानलेवा बन गई।

प्रत्यक्षदर्शियों की जुबानी: “सब कुछ बिजली की रफ्तार से हुआ…”
एक प्रत्यक्षदर्शी सीमा देवी जो मंदिर के अंदर थीं, ने कहा,

“हम लोग शांतिपूर्वक भजन कर रहे थे। अचानक छत से चिंगारी जैसी आवाज आई, और एक महिला चिल्ला उठी। अगले ही पल लोग एक-दूसरे पर गिरते भागने लगे। किसी को कुछ समझ ही नहीं आया।”

वहीं, रामनिवास तिवारी, जो घटना के समय मंदिर के बाहर फूल बेच रहे थे, ने बताया,

“पहले तो लगा जैसे कोई आतंकी हमला हो गया हो। मंदिर के अंदर से धुएं और चिल्लाने की आवाज़ें आ रही थीं। कुछ लोग छत से कूदकर जान बचाने की कोशिश कर रहे थे।”

मौत की पुष्टि और घायलों का इलाज
जिलाधिकारी दुर्गेश कुमार ने मीडिया को बताया कि,

“हादसे में अब तक दो लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। एक महिला और एक वृद्ध पुरुष की मौके पर ही मौत हो गई। 32 लोग घायल हुए हैं, जिनमें से 7 की हालत गंभीर है।”

जिलाधिकारी ने यह भी बताया कि एक विशेष मेडिकल टीम बनाकर घायलों के इलाज पर नजर रखी जा रही है और सभी घायलों का मुफ्त इलाज कराया जा रहा है।

हादसे के पीछे प्रशासनिक लापरवाही?
घटना के बाद यह सवाल उठना लाजमी है कि हाई वोल्टेज तार मंदिर की छत के इतना करीब कैसे गुजर रही थी? स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने पहले भी इस खतरे को लेकर विद्युत विभाग को चेतावनी दी थी लेकिन किसी ने गंभीरता से नहीं लिया।

स्थानीय निवासी राजू यादव ने बताया,

“ये तार कई सालों से मंदिर के ऊपर से गुजर रही है। हमने कई बार शिकायत की, पर कोई सुनवाई नहीं हुई। आज अगर अधिकारियों ने समय रहते ध्यान दिया होता, तो दो जानें बच सकती थीं।”

राजनीतिक गलियारों में मचा हड़कंप
घटना के बाद राजनीति भी गर्मा गई है। विपक्षी दलों ने इसे ‘सरकारी लापरवाही का शर्मनाक उदाहरण’ बताते हुए योगी सरकार को घेरा है।

सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने ट्वीट कर कहा –

“मंदिर में श्रद्धालु मर रहे हैं और सरकार विकास के झूठे दावे कर रही है। ये हादसा नहीं, हत्या है। दोषियों को सज़ा मिलनी चाहिए।”

वहीं, बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि यह प्रशासनिक अपराध है और “प्रदेश में आस्था अब असुरक्षित हो गई है।”

सीएम योगी आदित्यनाथ ने जताया शोक, दिए जांच के आदेश
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर शोक जताया है और पीड़ितों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है। उन्होंने ट्विटर (X) पर लिखा:

“बाराबंकी की घटना अत्यंत दुःखद है। मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी। जांच के लिए SIT गठित की जा रही है।”

मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग और जिला प्रशासन से 48 घंटे में रिपोर्ट तलब की है।

विद्युत विभाग की सफाई: “यह आकस्मिक दुर्घटना थी”
उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के मुख्य अभियंता ने कहा कि यह “प्राकृतिक और आकस्मिक दुर्घटना” थी, लेकिन मामले की जांच के लिए एक तकनीकी समिति बनाई गई है।

हालांकि लोगों का कहना है कि यह “दुर्घटना नहीं, लापरवाही का नतीजा है।”

FiveWs विश्लेषण: कौन, क्या, कब, कहां, कैसे?
कौन? – श्रद्धालु और मंदिर प्रशासन, विद्युत विभाग की कथित लापरवाही

क्या? – मंदिर की छत पर बिजली की तार गिरने से भगदड़

कब? – 27 जुलाई 2025 की सुबह

कहां? – भवानी देवी मंदिर, टिकैतनगर, बाराबंकी

कैसे? – हाई वोल्टेज तार टूटकर छत पर गिरा, करंट फैला और भगदड़ मच गई

आस्था बनाम अव्यवस्था: कब सुधरेगा सिस्टम?
हर साल सावन और दूसरे त्योहारों पर यूपी के मंदिरों में लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन प्रशासनिक तैयारियों का हाल जर्जर ही रहता है।

बिना सुरक्षा मापदंडों के मंदिरों में आयोजन, खुले तार, जर्जर निर्माण और बिजली विभाग की सुस्ती — ये सभी एक आने वाली त्रासदी का इंतजार करते प्रतीत होते हैं।

इस बार ये त्रासदी बाराबंकी में आई, कल किसी और जिले में दस्तक दे सकती है।

निष्कर्ष: श्रद्धा के नाम पर जान का खतरा कब तक?
बाराबंकी की यह दर्दनाक घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की असफलता का आईना है। जब तक प्रशासनिक एजेंसियां, धार्मिक संस्थान और बिजली विभाग मिलकर सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता नहीं देंगे, तब तक ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी।

श्रद्धालुओं की आस्था पर कभी छत गिरती है, कभी आग लगती है, और अब बिजली का करंट उनकी जान ले रहा है।

क्या श्रद्धा की रक्षा अब केवल भगवान भरोसे है?

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Harshita Ahuja

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