खुफिया सूचना के आधार पर सुरक्षा बलों ने हरवान के मुलनार इलाके में आतंकवाद विरोधी अभियान शुरू किया। तलाशी अभियान के दौरान दूर से कई राउंड गोलीबारी की आवाज़ें सुनी गईं, क्योंकि सुरक्षा कर्मी इलाके की गहन तलाशी ले रहे थे।

क्या हुआ? श्रीनगर के डाछीगाम जंगल में सोमवार सुबह एक बड़े आतंकरोधी अभियान ‘ऑपरेशन महादेव’ के तहत सुरक्षाबलों ने तीन आतंकियों को मार गिराया। यह मुठभेड़ उस समय शुरू हुई जब सेना को खुफिया इनपुट मिला कि कुछ आतंकी डाछीगाम के गहरे जंगलों में छिपे हुए हैं। कार्रवाई में आतंकियों के पास से भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और पाकिस्तानी आईडी कार्ड बरामद हुए हैं।
कब हुआ? यह मुठभेड़ सोमवार तड़के लगभग 3 बजे शुरू हुई और दोपहर तक चली। ऑपरेशन महादेव की योजना पहले से तैयार की गई थी, लेकिन जंगल की घनी परिस्थितियों और आतंकी गतिविधियों के खतरे को देखते हुए ऑपरेशन को बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दिया गया।
कहां हुआ? मुठभेड़ स्थल श्रीनगर के डाछीगाम राष्ट्रीय उद्यान के पास का इलाका है, जो घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र के लिए जाना जाता है। यह इलाका अक्सर आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है क्योंकि यहां सुरक्षा बलों की पहुंच कठिन होती है। यही कारण है कि यहां लंबे समय से आतंकियों की हलचल की खबरें मिल रही थीं।
कौन थे शामिल? सुरक्षाबलों की ओर से:
- राष्ट्रीय राइफल्स (RR)
- जम्मू-कश्मीर पुलिस का स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG)
- सीआरपीएफ की विशेष इकाई
आतंकी: सूत्रों के मुताबिक, मारे गए तीनों आतंकी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े थे। इनमें से एक की पहचान इम्तियाज उर्फ अबु हमजा के रूप में हुई है, जो पाकिस्तान का रहने वाला था। शेष दो स्थानीय सहयोगी बताए जा रहे हैं, जिनकी पहचान और संपर्कों की जांच की जा रही है।
कैसे हुआ ऑपरेशन?
- ऑपरेशन महादेव को सुरक्षा बलों ने बेहद सटीक खुफिया सूचना के आधार पर अंजाम दिया।
- सबसे पहले इलाके को चारों ओर से घेरा गया।
- ड्रोन और थर्मल इमेजिंग कैमरों की मदद से जंगल में छिपे आतंकियों की लोकेशन ट्रैक की गई।
- जैसे ही आतंकियों ने गोलीबारी शुरू की, सुरक्षाबलों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए तीनों को मार गिराया।
- मुठभेड़ में एक जेसीओ (जूनियर कमीशंड ऑफिसर) को हल्की चोटें आईं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
क्या बरामद हुआ?
- एके-47 राइफलें
- पिस्तौलें
- ग्रेनेड
- पाकिस्तानी सेना द्वारा जारी किए गए नकली आईडी कार्ड
- अत्याधुनिक संचार उपकरण
- आतंकियों के पास से ऑपरेशन संबंधी दस्तावेज, जो सीमा पार से मिले आदेशों की पुष्टि करते हैं
आतंकी नेटवर्क का बड़ा पर्दाफाश इस ऑपरेशन से यह साफ होता है कि सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा देने की कोशिशें लगातार जारी हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजीपी आरआर स्वैन ने मीडिया को बताया,
“ऑपरेशन महादेव एक बड़ी कामयाबी है। इससे साफ होता है कि पाकिस्तान समर्थित आतंकी अब घाटी में फिर से सक्रिय होने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन हमारी सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क और तैयार हैं।”
राजनीतिक प्रतिक्रिया
घटना के तुरंत बाद कई राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आईं:
गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर लिखा:
“ऑपरेशन महादेव में वीर जवानों की बहादुरी को सलाम करता हूं। आतंक के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी।”
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी ऑपरेशन की सराहना की लेकिन केंद्र सरकार से सवाल पूछते हुए कहा:
“यह बताइए कि पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद अब फिर से कैसे सक्रिय हो रहा है?”
पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कहा कि कश्मीर को युद्ध क्षेत्र न बनाया जाए, और स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
डाछीगाम का आतंक से पुराना नाता डाछीगाम घाटी, जो एक समय केवल राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीवों के लिए जानी जाती थी, पिछले कुछ वर्षों से आतंकियों का सुरक्षित अड्डा बनती जा रही है। घने जंगल, ऊँचाई और सीमित जनसंख्या वाले इस क्षेत्र को आतंकी ठिकानों के रूप में बार-बार इस्तेमाल करते रहे हैं।
2023 में भी इसी इलाके से हथियारों का एक बड़ा जखीरा बरामद हुआ था, जिसे ड्रोन के ज़रिए गिराया गया था। अब यह इलाका हाई-सेंसिटिव जोन में रखा गया है।
ऑपरेशन महादेव नाम क्यों रखा गया? सूत्रों के अनुसार, इस मुठभेड़ को ‘ऑपरेशन महादेव’ नाम इसलिए दिया गया क्योंकि यह डाछीगाम के पास उस क्षेत्र में हुआ, जहाँ महादेव चोटी स्थित है — जो स्थानीय आस्था और पहचान का प्रतीक है। साथ ही, यह ऑपरेशन महाशिवरात्रि के पहले चरण में लॉन्च हुआ था, जिसके चलते इसका नामकरण किया गया।
राष्ट्रीय सुरक्षा नीति पर असर ऑपरेशन महादेव एक बार फिर इस बात की पुष्टि करता है कि आतंकी गतिविधियां खत्म नहीं हुई हैं, बल्कि नए रूप में उभर रही हैं।
- ड्रोन सप्लाई चेन
- स्थानीय युवाओं की भर्ती
- जंगलों का इस्तेमाल छिपने के लिए
- सोशल मीडिया पर स्लीपर सेल्स की गतिविधियां
- इन सभी पर गहन निगरानी की जरूरत है।
- लोगों में मिला-जुला डर और गर्व
स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने कई दिनों से डाछीगाम क्षेत्र में संदिग्ध हलचल देखी थी, लेकिन उन्होंने इसे सामान्य माना। जब गोलियों की आवाज़ आई, तो पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई।हालांकि, ऑपरेशन खत्म होने के बाद लोग सेना की कार्रवाई से संतुष्ट नजर आए।
निष्कर्ष ‘ऑपरेशन महादेव’ एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें सुरक्षाबलों ने बिना किसी नागरिक क्षति के तीन खूंखार आतंकियों को ढेर कर दिया। यह घटना न केवल आतंक के खिलाफ भारत की सख्त नीति को दर्शाती है, बल्कि इस बात की चेतावनी भी देती है कि आतंकी अब नए तरीके अपना रहे हैं। आने वाले समय में सुरक्षा एजेंसियों को और सतर्क रहना होगा, ताकि देश की आंतरिक सुरक्षा पर कोई आँच न आए।
