चिराग पासवान ने कहा कि बिहार में बलात्कार, हत्या, अपहरण और डकैती जैसी घटनाएं नियमित रूप से हो रही हैं, लेकिन राज्य प्रशासन स्थिति को नियंत्रित करने में “बुरी तरह विफल” रहा है।

केंद्रीय मंत्री एवं लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) अध्यक्ष चिराग पासवान ने शनिवार को बिहार की कानून-व्यवस्था की स्थिति को “बिल्कुल नियंत्रण से बाहर” करार दिया और कहा कि उन्हें उस सरकार को समर्थन देने में “शर्म महसूस होती है”, जो जनता की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पा रही है। यह बयान बिहार विधानसभा चुनावों की तैयारी के बीच एक राजनीतिक तूफान की तरह सामने आ रहा है।
🧭 प्रशासन की आलोचना और नेताओं का मनोबल
चिराग ने पटना में संवाददाताओं से बातचीत में कहा:
“राज्य में हालात डरावने हो चुके हैं। अपराध नियंत्रण से बाहर हो गए हैं और प्रशासन मानो अपराधियों के सामने आत्मसमर्पण कर चुका है।”
उन्होंने सवाल उठाया कि “एक ऐसी सरकार का समर्थन करना जो लोगों को सुरक्षित नहीं रख सकती, मुझे शर्मिंदगी महसूस कराता है।”
चिराग ने कहा कि हर रोज हत्या, अपहरण, डकैती और बलात्कार जैसी घटनाएं हो रही हैं, जो प्रशासन की निष्क्रियता और भ्रष्टाचार पर प्रत्यक्ष प्रश्न खड़े कर रही हैं। (उल्लेखनीय: चल रही राजनीतिक लड़ाई में यह बयान उस ताजगी और गंभीर विरोधाभास को दिखाता है, जिसमें वे खुद NDA गठबंधन का हिस्सा हैं।)
📉 बिहार में कानून-व्यवस्था की गिरती स्थिति
चिराग की यह टिप्पणी विकृति नहीं, बल्कि लगातार बढ़ती घटनाओं के संदर्भ में स्पष्ट चेतावनी है:
- नालंदा में निर्मम हत्याएं, जहां हाथ में बंदूक से घुसकर अपराधी ने निर्दोष नागरिकों को मार दिया।
- पटना के Paras अस्पताल में दिनदहाड़े हुई गोलीकांड, जहां इलाज के दौरान एक अपराधी की हत्या हो गई।
- गोपाल खेमका मर्डर—पटन हुआ गोलीकांड जिसमें एक व्यापारी की हत्या से राज्य प्रषासन पर तीखा सवाल उठ गया। (इन घटनाओं में पारदर्शिता की कमी, पुलिस की भूमिका पर गंभीर संदेह और प्रशासनिक उदासीनता ग़ौरतलब रही।
चिराग ने स्पष्ट किया:
“यदि सुरक्षित इलाके में इतनी गंभीर घटना हो सकती है, तो ग्रामीण इलाकों में क्या हालात होंगे?”
🤝 NDA गठबंधन में विद्रोह
यह पहली बार नहीं है जब चिराग पासवान ने NDA सरकार की नीतियों पर कड़ा सवाल उठाया हो। हाल ही में उन्होंने जाट-जनसंख्या रिपोर्ट, शिक्षक भर्ती घोटाले, और जातिगत डेटा पर भी सरकार को सुस्त बताया है। उनकी पार्टी Bihar First, Bihari First विजन के तहत विकास की राजनीति प्रमुख है, जिसमें चिराग ने पारंपरिक सत्ता-संघर्ष से अलग राह अपनाने का दावा किया है।
विशिष्ट रूप से, चिराग ने शिक्षक नियुक्तियों में वित्तीय और राजनीतिक प्रभाव की व्याप्तियता पर सवाल उठाया है, जिसमें उन्होंने कहा कि “बहुत से योग्य उम्मीदवारों को पारदर्शी तरीके से पीछे किए गए”।
⚖️ विपक्ष की प्रतिक्रिया और राजनीतिक धाराएँ
चिराग के बाद विपक्ष—विशेष रूप से RJD और कांग्रेस—ने भी मंगलवार-दिनीन लगातार कानून-व्यवस्था पर सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया। कांग्रेस नेता कृष्णा अल्लावरू ने पिछली घोषणाओं को “फ़र्ज़ी वादे” बताया और कहा कि बेरोजगारी और अपराध दोनों में केंद्र और बिहार सरकार विफल रही है। उन्होंने घोषित किया कि युवाओं को रोजगार दिलाना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है, जो पूरी नहीं हो रही।
🧠 राजनीतिक रणनीति: चिराग की नई राह?
विश्लेषकों के अनुसार चिराग पासवान का उद्भव एक संभावित विपक्षी चेहरा के तौर पर हो सकता है, खासकर बिहार में चुनाव दरवाज़े पर खड़े हैं।
उनकी आलोचनाएँ संस्था और सत्ता से सीधे जुड़ी नीतियों पर केंदित हैं।
RJD और कांग्रेस की तरह जातिमा विभाजन से अलग होकर उन्होंने विकास आधारित राजनीति की बात तेज़ी से शुरू की है।
उन्होंने विपक्ष पर धार्मिक और वोट-बैंक विभाजन की राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि वे विकास को बाधित करना चाहते हैं ताकि निवेश से डरावनी ख़बर बने और युवा रोजगार से दूर रहें।
📊 सारांश – मुद्दों की तालिका
विषय विवरण
बयान की तारीख 26 जुलाई 2025
कौन बोला चिराग पासवान (केंद्रीय मंत्री)
प्रधान आरोप बिहार में कानून-व्यवस्था पूरी तरह टूट गई
सरकार से नाराज़गी कहते हैं कि उन्हें उस सरकार को समर्थन देने की “शर्म” आती है जो जनता को सुरक्षित नहीं रख पा रही
मुख्य घटनाएँ Paras Hospital शूटिंग, गोपाल खेमका हत्या, नालंदा हत्या आदि
राजनीतिक संदर्भ NDA गठबंधन का सदस्य हैं पर लगातार निशाने पर
भविष्य की तैयारी बिहार विधानसभा चुनाव, अपनी ‘बिहार फर्स्ट’ रणनीति के तहत विपक्षी चेहरे की संभावना
🗣️ निष्कर्षः दोषारोपण और कदम आगे
चिराग पासवान का यह बयान सिर्फ एक व्यक्तिगत गुस्सा नहीं, बल्कि प्रदेश में एक स्वायत्त राजनीतिक धारणा की घोषणा भी है।
उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि अपराध की बढ़ती घटनाओं और सरकार की अनदेखी के बीच वे उस सत्ता का समर्थन जारी नहीं रख पाएंगे।
यह बयान आने वाले विधानसभा चुनावों में राजनीतिक समीकरणों को सधी हुई उथल-पुथल की ओर ले जा सकता है।
यदि प्रशासन और सरकार सुधार नहीं लाते हैं, तो बिहार के लोग नया राजनीतिक विकल्प खोज सकते हैं। चिराग पासवान की भूमिका चुनावी लहर में परिवर्तन का संकेत दे सकती है।
