ईरान के ज़ाहेदान शहर में स्थित एक न्यायिक भवन पर जैश अल-अदल आतंकियों द्वारा किए गए घातक हमले में आठ लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। यह हमला क्षेत्र में जारी अशांति और आतंकी गतिविधियों को उजागर करता है।

ज़ाहिदान (सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत), 26 जुलाई 2025 – ईरान के दक्षिण‑पूर्वी अराजक सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी ज़ाहिदान में शनिवार सुबह एक सुनियोजित आतंकवादी हमला हुआ। उग्रवादी समूह Jaish al‑Adl के सदस्यों ने ज़ाहिदान न्यायालय भवन (Judiciary Centre) पर हथियार और ग्रेनेड से हमला किया, जिसमें कुल आठ लोग मारे गए, जिनमें पाँच नागरिक और तीन हमलावर शामिल थे। साथ ही 13 अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
हमला: न्यायिक केंद्र पर बंदूक और ग्रेनेड से विध्वंस
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अलिरेज़ा डलिरी के अनुसार, हमलावरों ने न्यायालय में प्रवेश करने के लिए आगंतुकों के रूप में भेष बदल कर दाखिल होने का प्रयास किया। वे सीधे न्यायाधीशों के कक्षों की ओर बढ़े और ग्रेनेड फेंकने के साथ गोलीबारी शुरू कर दी। इस हमले में एक महिला और एक साल के बच्चे की भी मौत हुई।
🛡️ सुरक्षा प्रतिक्रिया: तीन आतंकवादियों का सफाया
IRGC (Islamic Revolutionary Guard Corps) और स्थानीय पुलिस ने हमलावरों पर जवाबी कार्रवाई की। तीन हमलावर स्वयं भी मारे गए, जिससे आगे का खतरा टल गया और घटना स्थल को तुरंत सुरक्षा घेरे में लिया गया। घायलों को अस्पताल में पहुँचाया गया और बचाव कार्य तेजी से शुरू किया गया।
📌 जवाबदारी Jaish al‑Adl ने ली
आतंकवादी संगठन Jaish al‑Adl (आर्मी ऑफ जस्टिस), जो पाकिस्तान से संचालित है लेकिन ईरान की सीमाइयों में सक्रिय है, ने Telegram पर जारी बयान में इस हमले की जिम्मेदारी ली। संगठन ने दावा किया कि इसे वह “The Hand of Justice” अभियान के तहत अंजाम दे रहा है। साथ ही उसने सभी नागरिकों से अपील की कि वे संकट वाले क्षेत्र से तुरंत निकले।
🏛️ भू‑राजनीतिक पृष्ठभूमि: सिस्तान‑बलूचिस्तान का इतिहास
यह प्रांत पाकिस्तान और अफगानिस्तान से सटी सीमावर्ती क्षेत्र है, जो बलूच मुस्लिम अल्पसंख्यकों का घर है। ये समुदाय लंबे समय से आर्थिक और राजनीतिक वंचना की शिकायत करते रहे हैं। जान्स अल‑Adl जैसे मिल्जन्ट समूह इसी असंतोष को हथियारबंद संघर्ष में बदलते रहे हैं।
प्रान्त पहले भी हिंसक घटनाओं और IRGC पर हमलों का गवाह रहा है—आप्रैल 2024 की Chabahar एवं Rask झड़प, अक्टूबर 2024 में पुलिस काफिले पर हमला, और जनवरी 2025 में तेहरान में सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की हत्या भी इसी श्रृंखला परिदर्शित करती है।
🧾 मृतों और घायलों का विवरण
सरकारी बयानों के मुताबिक, हादसे में मारे गए लोगों में न्यायिक कर्मचारी, सुरक्षा रवैया वाले कर्मचारी और नागरिक शामिल हैं। हालांकि अब तक उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। प्राथमिक रिपोर्टों में यह भी सामने आया कि घटना स्थल पर मानव क्षति बढ़ सकती है क्योंकि घायल संख्या बढ़कर 13 से अधिक हो रही है।
📉 आतंकवाद का नया रूप और रणनीतिक संकेत
इस हमले ने दिखा दिया कि Jaish al‑Adl जैसे समूह भले ही सीमित संख्या में हों, लेकिन उनके निशाने राष्ट्र की न्याय-व्यवस्था और लोगों का विश्वास होते हैं। उन्होंने लक्ष्य न्यायाधीशों और स्टाफ को बनाया और साथ में आम जन भी प्रभावित हुए। ऐसे हमले न केवल सुरक्षा को चुनौती देते हैं, बल्कि सरकार की जवाबदेही को भी परखते हैं।
🔍 क्षेत्रीय प्रभाव और सरकार की प्रतिक्रिया
ईरानी सरकार ने हमले को “क्रूर आतंकी कार्रवाई” करार दिया। सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने, न्यायालयों और संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही समुदायों में फिर से तनाव कम करने की रणनीति पर काम शुरू हुआ है।
सीमा पार Jaish al‑Adl की गतिविधियों पर निगरानी तेज करने और उनकी शिकंजा सांस्कृतिक, राजनीतिक और कूटनीतिक रूप से कसने की आवश्यकता भी उजागर हुई है।
🧠 निष्कर्ष: चुनौतीपूर्ण सुरक्षा स्वास्थ्य और कूटनीतिक द्वंद्व
ईरान में न्यायिक केंद्र पर यह हमला केवल एक आतंकी घटना नहीं है, बल्कि एक सामाजिक और राजनीतिक संकट का प्रतीक भी है। Jaish al-Adl जैसे समूहों की गतिविधियाँ और हिंसात्मक हमलों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सरकार और कानून-व्यवस्था को इस क्षेत्र में व्यापक निष्पक्ष राजनीति, संवाद, और सामुदायिक सहभागिता की जरूरत है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठन को बलूच अल्पसंख्यकों की मांगों और हिंसा के पैटर्न पर ध्यान देना चाहिए।
मातहत न्यायपालिका और नागरिक संरचनाओं की रक्षा करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य हो चुका है।
