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हरियाली तीज पर महिलाएं हरा रंग क्यों पहनती हैं? जानिए इसका धार्मिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व

यह सिर्फ एक रंग नहीं है। हरियाली तीज पर हरा रंग प्रेम, नए आरंभ और मां पार्वती के आशीर्वाद का प्रतीक होता है। यही कारण है कि इसका महत्व इतना गहरा है।

सावन का महीना आते ही वातावरण में हरियाली छा जाती है, मंदिरों में रौनक बढ़ जाती है और सुहागिनों की तैयारी शुरू हो जाती है। इस पावन मौसम में हरियाली तीज एक ऐसा पर्व है जो न केवल महिलाओं के श्रृंगार से जुड़ा है, बल्कि प्रकृति, प्रेम, और परंपरा का भी सुंदर संगम है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हरियाली तीज पर महिलाएं विशेष रूप से ‘हरा रंग’ क्यों पहनती हैं?

इस आर्टिकल में हम इस परंपरा के पीछे छिपे धार्मिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक कारणों की गहराई से पड़ताल करेंगे।

🌿 क्या है हरियाली तीज?
हरियाली तीज सावन मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। यह पर्व विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं और अपने पति की लंबी उम्र और सुखमय वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं।

हरियाली तीज को तीनों तीजों में सबसे विशेष माना जाता है—हरियाली तीज, कजरी तीज और हरितालिका तीज।

🌿 हरा रंग: हरियाली का प्रतीक
तीज का नाम ही “हरियाली” है—यानि हरापन, जीवन, ताजगी और प्रकृति की सजीवता। सावन के महीने में धरती नई हरियाली से ढँक जाती है, पेड़-पौधे, खेत-खलिहान और जंगल हरे रंग में लहलहाने लगते हैं। ऐसे में महिलाएं जब हरे रंग के परिधान पहनती हैं, तो वो प्रकृति के इस उल्लास और सौंदर्य के साथ अपनी आत्मा को जोड़ती हैं।

हरा रंग न केवल फैशन का हिस्सा है, बल्कि इसका गहरा सांस्कृतिक और धार्मिक अर्थ भी है।

🌿 धार्मिक मान्यता: पार्वती का प्रतीक है हरा रंग
पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए 108 बार जन्म लिया था। उनके 108वें जन्म में ही उन्होंने कठोर तपस्या करके शिव जी को प्रसन्न किया। यह दिन ‘हरियाली तीज’ के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि उस दिन माता पार्वती ने हरे वस्त्र पहनकर शिव की पूजा की थी।

इसलिए सुहागिनें भी हरे वस्त्र पहनती हैं ताकि वे भी पार्वती के आशीर्वाद से वैसा ही अखंड सौभाग्य प्राप्त कर सकें।

🌿 सुहाग का रंग: हरे रंग का श्रृंगार
हरियाली तीज पर महिलाएं हरे रंग की चूड़ियाँ, बिंदी, साड़ी, लहंगा, दुपट्टा और मेहंदी लगाकर स्वयं को सजाती हैं। ऐसा माना जाता है कि हरा रंग सौभाग्य, समृद्धि और उर्वरता का प्रतीक है।

चूड़ियाँ: हरे रंग की चूड़ियाँ पहनने से मन को शांति मिलती है और शुभता का आभास होता है।

मेहंदी: हरियाली तीज की पहचान मेहंदी से भी जुड़ी होती है। मेहंदी का रंग जितना गहरा, सौभाग्य उतना मजबूत माना जाता है।

🌿 वैज्ञानिक कारण: मानसून और मनोविज्ञान
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो हरा रंग आंखों के लिए सबसे आरामदायक रंग होता है। मानसून के मौसम में वातावरण में उमस और थकान अधिक होती है। ऐसे में हरा रंग मनोबल बढ़ाने, ठंडक देने और सकारात्मक ऊर्जा के संचार में मदद करता है।

रंग-चिकित्सा (Color Therapy) के अनुसार, हरा रंग दिल और तंत्रिका तंत्र को शांत करता है। यह खुशी, संतुलन और शांति का प्रतीक है।

🌿 सामाजिक दृष्टिकोण: सामूहिक उत्सव और नारी-सशक्तिकरण
हरियाली तीज एक ऐसा पर्व है जहाँ महिलाएं एक-दूसरे के साथ मिलकर गीत गाती हैं, झूले झूलती हैं, पारंपरिक व्यंजन बनाती हैं और अपने अनुभव साझा करती हैं। हरे रंग के वस्त्र पहनना सामूहिकता और एकता का भी संकेत देता है।

यह त्योहार महिलाओं के लिए एक दिन का उत्सव मात्र नहीं, बल्कि उनका सशक्तिकरण भी है, जहाँ वे अपने अस्तित्व, भावनाओं और परंपराओं को गर्व से जीती हैं।

🌿 आधुनिकता में भी परंपरा कायम
आज भले ही महिलाएं वेस्टर्न ड्रेसेज़ पहनें या मॉडर्न जीवनशैली अपनाएं, लेकिन हरियाली तीज के दिन अधिकांश महिलाएं पारंपरिक हरी साड़ी, सूट या लहंगा पहनना नहीं भूलतीं। यही भारतीय परंपरा की खूबसूरती है कि आधुनिकता के बीच भी संस्कृति की जड़ें गहराई से जुड़ी रहती हैं।

🌿 कुछ लोकप्रिय परंपराएं हरियाली तीज से जुड़ी:
झूले पर झूलना: तीज पर झूले की विशेष परंपरा है। महिलाएं पेड़ों पर झूले डालकर पारंपरिक गीत गाती हैं।

तीज गीत: “सावन आया झूम के”, “तीज की रैना आई” जैसे गीतों से वातावरण भावनात्मक हो उठता है।

व्रत: विवाहित महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं।

सजना-संवरना: विशेष श्रृंगार, ब्यूटी ट्रीटमेंट, और हरे रंग के कपड़ों में महिलाएं देवी समान लगती हैं।

🌿 क्या सिर्फ सुहागिनें ही पहनती हैं हरा रंग?
हरियाली तीज मुख्य रूप से सुहागिनों का त्योहार है, लेकिन आजकल कुंवारी लड़कियां भी पारंपरिक परिधान पहनकर इसमें भाग लेती हैं, ताकि उन्हें भी अच्छे वर की प्राप्ति हो। वहीं विधवा या अकेली महिलाएं भी अब इस पर्व को सामाजिक रूप से मनाती हैं।

🌿 हरे रंग का बदलता फैशन
हरियाली तीज के चलते हरे रंग के वस्त्रों की मांग बाजार में बढ़ जाती है। डिजाइनर साड़ियों, अनारकली सूट्स, लहंगों और गहनों में हरे रंग की विविधता देखने को मिलती है। यही नहीं, सोशल मीडिया पर #GreenTeejLook ट्रेंड करता है।

🌿 निष्कर्ष: हरियाली तीज और हरा रंग – आस्था, प्रकृति और सौंदर्य का संगम
हरियाली तीज केवल एक व्रत या त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय नारी की आस्था, प्रेम और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का प्रतीक है। हरा रंग इस पर्व को और भी जीवंत बना देता है। यह रंग जहां प्रेम और समर्पण का प्रतीक है, वहीं धरती और जीवन की हरियाली का उत्सव भी।

तो इस हरियाली तीज पर जब आप किसी महिला को हरे वस्त्रों में मुस्कुराते हुए देखें, तो जान लें — वह सिर्फ सज नहीं रही, बल्कि पार्वती की तरह प्रेम, शक्ति और सौभाग्य को अपने जीवन में आमंत्रित कर रही है।

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Harshita Ahuja

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