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झालावाड़ में स्कूल भवन बना बच्चों की कब्रगाह! हादसे में 4 मासूमों की मौत, कई घायल — प्रशासन पर लापरवाही का आरोप

राजस्थान स्कूल छत हादसा: बचाव दल और स्थानीय ग्रामीण लगातार मलबा हटाने के लिए जेसीबी मशीनों की मदद से जुटे हुए हैं। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि घायल बच्चों को तत्काल इलाज के लिए मनोहर थाना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया जा रहा है।

झालावाड़, राजस्थान | 25 जुलाई 2025: राजस्थान के झालावाड़ ज़िले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है जहाँ एक प्राइमरी स्कूल की इमारत अचानक धराशायी हो गई। इस भयावह हादसे में कम से कम चार स्कूली बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक दर्जन से अधिक छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। हादसे के बाद इलाके में मातम पसर गया है और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल उठ रहे हैं।

सुबह का समय, कक्षाएं चल रही थीं — तभी हुआ मौत का मंजर
यह हादसा झालावाड़ जिले के भीलखेड़ी गांव स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय में सुबह करीब 10:45 बजे हुआ, जब कक्षा 1 से 5 तक के लगभग 60 छात्र-छात्राएं कक्षाओं में मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुरानी और जर्जर इमारत का एक बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया, जिससे कई बच्चे मलबे के नीचे दब गए।

स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए तुरंत बच्चों को मलबे से निकालने की कोशिश की और कुछ ही देर में प्रशासनिक अधिकारी और एनडीआरएफ की टीम भी मौके पर पहुंच गई।

4 बच्चों की मौत की पुष्टि, मरने वालों में 2 लड़कियाँ भी शामिल
झालावाड़ जिला प्रशासन ने अब तक चार बच्चों की मौत की पुष्टि की है। मृतकों की पहचान इस प्रकार हुई है:

  • रूचिता मीणा (7 वर्ष) – कक्षा 2
  • सौरभ गुर्जर (9 वर्ष) – कक्षा 4
  • नीलम बैरवा (6 वर्ष) – कक्षा 1
  • अर्जुन धाकड़ (8 वर्ष) – कक्षा 3

इनमें से दो बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो ने अस्पताल ले जाते वक्त दम तोड़ दिया।

गंभीर रूप से घायल बच्चों को कोटा और जयपुर रेफर किया गया
हादसे में घायल बच्चों को तुरंत झालावाड़ के जिला अस्पताल लाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद 8 गंभीर रूप से घायल बच्चों को कोटा मेडिकल कॉलेज और दो अन्य को जयपुर SMS अस्पताल रेफर किया गया।
डॉक्टरों के अनुसार, कुछ बच्चों को सिर, रीढ़ और छाती में गंभीर चोटें आई हैं और उनकी स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है।

मातम में डूबा गांव, गुस्साए परिजनों का प्रदर्शन
घटना की खबर मिलते ही भीलखेड़ी गांव में कोहराम मच गया। मृतकों के परिजन रो-रो कर बेहाल हो गए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि स्कूल भवन की हालत लंबे समय से बेहद जर्जर थी, लेकिन सरपंच और पंचायत समिति को बार-बार शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।

गुस्साए ग्रामीणों ने स्कूल परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
स्थिति को काबू में करने के लिए मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।

पढ़िए: स्कूल भवन की हालत पर पहले भी आए थे संकेत
स्थानीय शिक्षकों ने बताया कि स्कूल भवन की हालत बेहद खराब थी और बारिश के बाद अक्सर दीवारें भीग जाती थीं, प्लास्टर गिरता था। जुलाई महीने की शुरुआत में ही प्रधानाचार्य ने ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर भवन की मरम्मत या नया भवन बनवाने की मांग की थी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

RTI कार्यकर्ता अशोक शर्मा का कहना है कि यह दुर्घटना ‘निर्माण माफियाओं’ और प्रशासन की मिलीभगत का नतीजा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रामीण स्कूलों में घटिया सामग्री से भवन निर्माण होता है, जिससे ऐसी दुर्घटनाएँ होती हैं।

राज्य सरकार की प्रतिक्रिया — मुख्यमंत्री गहलोत ने दिए जांच के आदेश
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए ट्वीट किया:
“झालावाड़ में स्कूल भवन गिरने की खबर अत्यंत दुखद है। मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूँ। हादसे की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।”

मुख्यमंत्री कार्यालय ने मृतकों के परिजनों को ₹5 लाख की अनुग्रह राशि, और घायलों को ₹1 लाख तक की सहायता देने की घोषणा की है।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू — बीजेपी ने सरकार को घेरा
इस हादसे के बाद राजस्थान की सियासत भी गर्म हो गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने इस हादसे को “राज्य सरकार की अपराधपूर्ण लापरवाही” करार दिया। उन्होंने कहा:

“क्या किसी मंत्री का बच्चा इस स्कूल में पढ़ रहा होता तो भी भवन यूँ ही खड़ा रहता? यह घटना भ्रष्टाचार और लापरवाही की जीती-जागती मिसाल है।”

बीजेपी ने इस मामले में राज्य के शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की है और पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है।

क्या कहता है शिक्षा विभाग?
झालावाड़ के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) नरेंद्र शर्मा ने स्वीकार किया कि भवन की हालत खराब थी। उन्होंने कहा:

“इस विद्यालय के भवन को प्राथमिकता में मरम्मत सूची में डाला गया था, लेकिन बजट न मिलने के कारण कार्य शुरू नहीं हो पाया। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इससे पहले हादसा हो गया।”

हालांकि सवाल उठता है कि जब बच्चों की जान का सवाल हो, तो क्या प्रशासन सिर्फ बजट का इंतज़ार करता रहेगा?

राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग (NCPCR) ने लिया संज्ञान
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने इस घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। आयोग ने पूछा है:

  • कब हुई थी भवन की अंतिम मरम्मत?
  • क्या स्कूल के पास सुरक्षा प्रमाणपत्र था?
  • भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे?
  • आयोग ने सरकार से 7 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

समाज में आक्रोश, सोशल मीडिया पर भी उठी आवाजें
जैसे ही घटना सामने आई, सोशल मीडिया पर #JusticeForJhalawarKids और #SchoolCollapse ट्रेंड करने लगे। हजारों यूज़र्स ने सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग की।

कुछ प्रतिक्रियाएं:

  • “बच्चे स्कूल पढ़ने जाते हैं, मरने नहीं।”
  • “हर सरकारी भवन की तुरंत जांच होनी चाहिए।”
  • “जब तक अफसरों पर आपराधिक केस नहीं चलेगा, ऐसे हादसे होते रहेंगे।”

अब क्या हो आगे?
राज्य सरकार ने हादसे की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच समिति गठित की है, जिसमें PWD, शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं।
वहीं, मृत बच्चों के परिजनों ने सीबीआई जांच की मांग की है और मुआवज़े को “जिम्मेदारों की गिरफ्तारी” से जोड़ दिया है।

निष्कर्ष: सिस्टम की ढहती दीवारें, और उसका बोझ मासूमों पर
भीलखेड़ी गांव की यह त्रासदी सिर्फ एक स्थानीय दुर्घटना नहीं है — यह पूरे देश में शिक्षा व्यवस्था की विफलता का प्रतीक है।
जहाँ सरकारी स्कूलों में शिक्षक नहीं, बिल्डिंगें जर्जर और सुविधाएं न्यूनतम हैं, वहाँ यह सवाल उठना लाज़िमी है:
“क्या गरीब बच्चों की जान की कीमत सरकारी सिस्टम के लिए कुछ नहीं?”

इस हादसे ने एक बार फिर यह उजागर किया है कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होती, बजट, फाइलें और नोटिसों के नीचे बच्चों की ज़िंदगियाँ दबती रहेंगी।

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Harshita Ahuja

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