राज्य सरकार ने अंशकालिक (पार्ट-टाइम) कामगारों के लिए न्यूनतम प्रति घंटे की मजदूरी प्रणाली भी शुरू की है। प्रति घंटे की न्यूनतम मजदूरी दर दैनिक मजदूरी का एक-छठा भाग से कम नहीं होगी।

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य के कृषि क्षेत्र में काम करने वाले मज़दूरों को एक बड़ी राहत देते हुए उनकी न्यूनतम दैनिक मज़दूरी में वृद्धि की घोषणा की है। अब खेतिहर मज़दूरों को प्रतिदिन ₹252 मिलेंगे, जो कि पहले ₹202 के आसपास थी। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य में महंगाई बढ़ रही है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सीमित होते जा रहे हैं। सरकार का दावा है कि इससे लाखों कृषि मज़दूरों को सीधा फायदा होगा।
🔺 कृषि मज़दूरों को मिला ‘वेतन न्याय’
उत्तर प्रदेश सरकार ने यह फैसला श्रम विभाग की सिफारिशों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के दबाव के बाद लिया। लंबे समय से ग्रामीण क्षेत्रों से शिकायतें आ रही थीं कि कृषि मज़दूरों को पर्याप्त मेहनताना नहीं मिल रहा, जबकि उनकी दिनभर की मेहनत से खेतों की उपज तैयार होती है। अब इस नई दर से उन्हें सम्मानजनक वेतन मिलने की उम्मीद है।
📌 नए वेतन का विवरण:
श्रेणी पुरानी मज़दूरी (₹/दिन) नई मज़दूरी (₹/दिन)
कृषि मज़दूर ₹202 ₹252
ईंट भट्ठा / निर्माण मज़दूर ₹248 ₹303
कुशल श्रमिक ₹325 ₹367
(नोट: उपरोक्त दरें श्रम विभाग द्वारा अधिसूचित हैं और विभिन्न जिलों में थोड़ी भिन्न हो सकती हैं)
🧑🌾 खुश हुए खेतिहर मजदूर: ‘अब पेट भर खाना मिलेगा’
हरदोई जिले के रामकुमार यादव, जो पिछले 20 वर्षों से खेतों में मजदूरी कर रहे हैं, ने सरकार के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा,
“अब ₹252 मिलेंगे तो कम से कम बच्चों की पढ़ाई और दवा का खर्च निकल पाएगा। पहले तो कुछ बचता ही नहीं था।”
बलिया की रीना देवी, जो खेतों में रोपाई का काम करती हैं, कहती हैं,
“महिलाओं को तो कई बार ₹150-180 ही मिलते थे। अब अगर सबको बराबरी से ₹252 मिलेंगे तो हम भी सम्मान से जी पाएंगे।”
🔍 सरकार की मंशा और योजनाएं
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि यह वृद्धि केवल शुरुआत है। श्रम मंत्री अनिल राजभर ने प्रेस वार्ता में कहा:
“हमारी सरकार मज़दूरों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। न्यूनतम वेतन में यह बढ़ोतरी दीर्घकालिक सुधार की दिशा में पहला कदम है।”
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगले वित्तीय वर्ष में निर्माण और मनरेगा से जुड़े श्रमिकों के लिए भी वेतन पुनः संशोधित किया जा सकता है।
🛠️ कहां और कैसे होगा लागू?
यह नया वेतन राज्य के सभी 75 जिलों में लागू होगा, और इसमें उन मजदूरों को शामिल किया जाएगा जो निजी खेतों, सरकारी कृषि परियोजनाओं, मनरेगा के तहत या किसी प्रकार के अस्थायी कृषि कार्य में लगे हुए हैं।
- शुरुआत तिथि: 1 अगस्त 2025 से लागू
- निगरानी एजेंसी: जिला श्रम कार्यालय और पंचायत स्तर पर निगरानी समितियाँ
- भुगतान का तरीका: नकद और बैंक खातों के माध्यम से (DBT पर ज़ोर)
📊 कितने मजदूरों को होगा फायदा?
राज्य सरकार के मुताबिक उत्तर प्रदेश में लगभग 1.85 करोड़ कृषि श्रमिक कार्यरत हैं। इनमें से एक बड़ा हिस्सा अभी भी अनौपचारिक क्षेत्र में काम करता है। नई मज़दूरी से अनुमानतः 1.2 करोड़ श्रमिकों को सीधा लाभ मिलेगा, खासकर बुंदेलखंड, पूर्वांचल और तराई जैसे क्षेत्रों में।
⚖️ आलोचना भी शुरू: विपक्ष ने उठाए सवाल
जहां सरकार इस घोषणा को ऐतिहासिक मान रही है, वहीं विपक्षी दलों ने इसे “चुनावी स्टंट” करार दिया है। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने कहा:
“ये घोषणा ज़मीनी हकीकत से दूर है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी मजदूरों को आधे पैसे मिलते हैं और सरकार कोई निगरानी नहीं करती। सिर्फ घोषणा से कुछ नहीं होगा, उसे लागू भी करना पड़ेगा।”
कांग्रेस की ओर से प्रियंका गांधी ने ट्वीट कर लिखा:
“मज़दूरों की दशा सुधारना ज़रूरी है, पर केवल वेतन बढ़ाने से नहीं, उन्हें स्वास्थ्य, बीमा और काम की गारंटी भी देनी चाहिए।”
🌱 सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया
कई किसान और मज़दूर संगठनों ने इस फैसले की सराहना की है। “भारतीय खेत मज़दूर यूनियन” के महासचिव विजय पाल सिंह ने कहा:
“हम इस निर्णय का स्वागत करते हैं लेकिन साथ ही मांग करते हैं कि इस न्यूनतम वेतन को राष्ट्रीय कृषि रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) से जोड़कर स्थायी रूप दिया जाए।”
💬 विशेषज्ञों की राय: सही दिशा में कदम
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस प्रकार की वेतन वृद्धि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा देती है। लखनऊ यूनिवर्सिटी के प्रो. अरविंद मिश्रा कहते हैं:
“अभी ग्रामीण मज़दूरी और शहरी न्यूनतम वेतन के बीच बड़ी खाई है। ₹252 एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन महंगाई को देखते हुए यह भी पर्याप्त नहीं है। सरकार को श्रमिकों के लिए स्किल ट्रेनिंग, स्वास्थ्य सुरक्षा और महिला मज़दूरों की अलग नीति बनानी चाहिए।”
🔚 निष्कर्ष: ज़मीन पर दिखे असर तब मानी जाएगी कामयाबी
उत्तर प्रदेश सरकार का यह फैसला निश्चित रूप से गरीब खेतिहर मज़दूरों के लिए राहत भरा है। लेकिन असली सफलता तब मानी जाएगी जब ये नई दरें ज़मीनी स्तर पर लागू भी हों और कोई मज़दूर अपने श्रम के बदले शोषण का शिकार न हो।
आने वाले हफ्तों में यह देखना रोचक होगा कि क्या पंचायत स्तर पर निगरानी मजबूत होती है, क्या बैंक खातों के माध्यम से मजदूरों को समय पर भुगतान होता है, और क्या इससे राज्य की कृषि उत्पादकता में कोई सकारात्मक बदलाव आता है।
