प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को अपने ब्रिटिश समकक्ष कीर स्टार्मर के साथ व्यापक स्तर पर बातचीत करेंगे। यह वार्ता भारत और ब्रिटेन के बीच रणनीतिक संबंधों को नई गति देने पर केंद्रित रहने की उम्मीद है। वर्ष 2023-24 में भारत-ब्रिटेन द्विपक्षीय व्यापार 55 अरब अमेरिकी डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवा चुके हैं। इस बार मंच है – यूनाइटेड किंगडम यानी ब्रिटेन, जहां उन्होंने न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूती दी, बल्कि वैश्विक प्रगति में भारत-UK साझेदारी को भविष्य का आधार बताया। पीएम मोदी के इस दौरे को राजनयिक गलियारों में काफी अहम माना जा रहा है, खासकर ब्रेक्सिट के बाद बदलते वैश्विक समीकरणों के मद्देनज़र।
लंदन में मोदी की गरज: “भारत-ब्रिटेन की दोस्ती दुनिया के लिए ज़रूरी”
प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री रिची सनक के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में साफ कहा कि “भारत और ब्रिटेन की दोस्ती केवल द्विपक्षीय रिश्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक विकास और स्थिरता के लिए आवश्यक है।” उन्होंने कहा कि दोनों देशों की साझेदारी, तकनीक, शिक्षा, रक्षा, व्यापार और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में नई ऊंचाइयों तक पहुंच रही है।
रणनीतिक सहयोग पर हुआ जोर
ब्रिटेन और भारत के बीच रणनीतिक रक्षा साझेदारी को एक नया आयाम देने पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने रक्षा उपकरणों के सह-निर्माण और साइबर सुरक्षा सहयोग पर सहमति जताई। ब्रिटिश प्रधानमंत्री रिची सनक ने कहा, “भारत वैश्विक स्थिरता का एक स्तंभ है और हम इस साझेदारी को और गहरा करना चाहते हैं।”
व्यापार समझौते की तैयारी अंतिम चरण में
सबसे अहम मुद्दा था – भारत-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA), जिसकी बातचीत पिछले दो वर्षों से जारी है। इस दौरे के दौरान सूत्रों के मुताबिक, दोनों पक्ष अब अंतिम चरण में हैं और जल्द ही इस पर हस्ताक्षर की उम्मीद है। यह करार न केवल दो देशों के बीच व्यापार बढ़ाएगा, बल्कि भारतीय उद्योगों के लिए यूरोपियन बाज़ार के नए रास्ते खोलेगा।
पीएम मोदी की ब्रिटिश संसद में ऐतिहासिक स्पीच
प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिटिश संसद को भी संबोधित किया, जहां उन्होंने गांधी से लेकर टैगोर और नेताजी सुभाष चंद्र बोस तक की विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि “आज का भारत आत्मनिर्भर है, आत्मविश्वासी है और वैश्विक मंच पर नेतृत्व करने के लिए तैयार है।” उन्होंने ब्रिटिश सांसदों के बीच तालियों की गूंज के बीच कहा कि “नई सदी का नया भारत साझेदारी में विश्वास रखता है, गुलामी में नहीं।”
भारतीय समुदाय में जोश, लंदन की सड़कों पर ‘मोदी-मोदी’
पीएम मोदी के ब्रिटेन आगमन पर भारतीय प्रवासी समुदाय ने ज़ोरदार स्वागत किया। लंदन की सड़कों पर हजारों लोग ‘मोदी-मोदी’ के नारों के साथ झंडे लहराते नजर आए। ओवरसीज़ फ्रेंड्स ऑफ बीजेपी के नेता राकेश शर्मा ने कहा, “हमारे लिए गर्व का क्षण है कि भारत का प्रधानमंत्री विश्व में भारत की साख को नई ऊंचाई दे रहा है।”
ब्रिटिश मीडिया में छाया भारत
बीबीसी से लेकर ‘द गार्जियन’ तक, पीएम मोदी की यात्रा ने ब्रिटिश मीडिया में सुर्खियां बटोरीं। एक प्रमुख शीर्षक था – “India’s Modi walks tall in London, as UK seeks new partner in changing world”। विश्लेषकों ने इसे ब्रिटेन के लिए नई वैश्विक रणनीति की दिशा बताया जिसमें भारत को केंद्रीय भूमिका सौंपी जा रही है।
शिक्षा और स्टूडेंट वीज़ा पर अहम समझौते
पीएम मोदी और रिची सनक के बीच शिक्षा सहयोग को लेकर भी बड़ा ऐलान हुआ। अब दोनों देशों के विश्वविद्यालयों में डिग्रियों को आपसी मान्यता दी जाएगी, जिससे भारतीय छात्रों को ब्रिटेन में उच्च शिक्षा और नौकरी की संभावनाएं बढ़ेंगी। इसके अलावा, छात्रों के लिए वर्क वीज़ा की अवधि बढ़ाने पर भी विचार हुआ।
विपक्ष की आलोचना और सरकार का जवाब
हालांकि पीएम मोदी के दौरे पर भारत में विपक्षी दलों ने सवाल खड़े किए। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा, “प्रधानमंत्री को विदेश जाने से पहले देश की समस्याओं को हल करना चाहिए।” इस पर विदेश मंत्रालय ने जवाब देते हुए कहा कि “प्रधानमंत्री की हर यात्रा देशहित में है और वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति को मजबूत करने के लिए है।”
जलवायु परिवर्तन और सतत विकास पर साझेदारी
जलवायु संकट को लेकर भारत और ब्रिटेन ने एक संयुक्त हरित मिशन लॉन्च किया है, जिसके अंतर्गत दोनों देश ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और स्वच्छ ऊर्जा अनुसंधान में मिलकर काम करेंगे। पीएम मोदी ने कहा, “हम सिर्फ एक समृद्ध भविष्य नहीं चाहते, बल्कि एक टिकाऊ और सुरक्षित भविष्य चाहते हैं।”
चीन और वैश्विक भू-राजनीति पर परोक्ष संदेश
भले ही सीधे तौर पर चीन का नाम न लिया गया हो, लेकिन दोनों नेताओं के बयानों में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्वतंत्रता और संप्रभुता को लेकर ज़ोर दिया गया। यह स्पष्ट संकेत था कि भारत और ब्रिटेन अब इस क्षेत्र में चीन की आक्रामकता को चुनौती देने के लिए सुरक्षा सहयोग बढ़ा सकते हैं।
निष्कर्ष: भारत की सॉफ्ट पॉवर का विस्तार
पीएम मोदी का यह दौरा केवल औपचारिकता नहीं था, बल्कि एक रणनीतिक प्रयास था भारत की सॉफ्ट पॉवर को आगे बढ़ाने का। ब्रिटेन जैसे पुराने उपनिवेश शासक देश के साथ समानता के स्तर पर साझेदारी की यह नई शुरुआत भारत के बदले हुए वैश्विक चेहरे को दर्शाती है।
अंतिम विचार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह ब्रिटेन दौरा कई मायनों में ऐतिहासिक और कूटनीतिक दृष्टिकोण से निर्णायक रहा। भारत अब वैश्विक मंच पर मांगने वाला नहीं, दिशा देने वाला देश बन चुका है। ब्रिटेन जैसे विकसित देशों के साथ साझेदारी अब बराबरी के स्तर पर हो रही है। इस दौरे ने साफ कर दिया कि आने वाले वर्षों में भारत न केवल एक आर्थिक शक्ति बनेगा, बल्कि एक वैश्विक नेता के रूप में भी उभरेगा।
