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ट्रंप के ‘विशाल’ ट्रेड डील ऐलान पर जापानी PM इशिबा की खुशी, कहा- एशिया के लिए नया आर्थिक युग शुरू

पूर्व में ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि व्यापार वार्ताएं विफल होती हैं, तो 1 अगस्त से जापानी आयात पर 25 प्रतिशत टैरिफ (शुल्क) लागू कर दिया जाएगा।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक “विशाल और ऐतिहासिक” व्यापार समझौते की घोषणा की, जिसे जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने एशिया के लिए एक “नई आर्थिक सुबह” करार दिया। ट्रंप के इस घोषणा के कुछ ही घंटों के भीतर टोक्यो से प्रतिक्रिया आई, जहां प्रधानमंत्री इशिबा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस डील का स्वागत करते हुए कहा कि यह समझौता भारत-प्रशांत क्षेत्र में व्यापारिक स्थिरता और निवेश के नए द्वार खोलेगा।

क्या है यह ‘विशाल’ व्यापार समझौता?
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित इस समझौते के तहत अमेरिका, जापान, भारत, ऑस्ट्रेलिया, वियतनाम और फिलीपींस जैसे एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों के बीच एक नए मल्टीलेटरल ट्रेड फ्रेमवर्क की स्थापना की जाएगी। इसका उद्देश्य चीन की बढ़ती आर्थिक पकड़ और एकतरफा व्यापार नीतियों को संतुलित करना है। ट्रंप ने इस पहल को “Indo-Pacific Strategic Trade Accord (IPSTA)” नाम दिया है।

इस समझौते में प्रमुख बिंदुओं में शामिल हैं:

  • सदस्य देशों के बीच टैरिफ में कटौती
  • टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की खुली नीति
  • सामरिक आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा
  • डॉलरों में ट्रेड से हटकर स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा

इशिबा का बयान: एशिया को मिला व्यापारिक आत्मनिर्भरता का नया मौका
प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा, जो वर्ष 2024 में सत्ता में आए, पहले से ही जापान की विदेश और व्यापार नीतियों में बदलाव के पक्षधर रहे हैं। उन्होंने ट्रंप की इस घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा:

“यह समझौता केवल एक व्यापारिक करार नहीं, बल्कि एशिया के लिए आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास का अवसर है। हम इसका हिस्सा बनकर गौरवान्वित हैं।”

इशिबा ने यह भी जोड़ा कि इस समझौते के ज़रिए जापान अब चीन पर अपनी निर्भरता कम करेगा और भारत व ASEAN देशों के साथ नई रणनीतिक साझेदारी की ओर बढ़ेगा।

भारत की भूमिका: मोदी सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार
भारत सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव पर “सकारात्मक दृष्टिकोण” अपनाया गया है। भारत के लिए यह समझौता Make in India और आत्मनिर्भर भारत अभियान के अनुरूप है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इसमें शामिल होकर वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी भागीदारी और प्रभाव दोनों बढ़ा सकता है। साथ ही, यह चीन से मुकाबले के लिए एक मजबूत मंच बन सकता है।

ट्रंप की वापसी और अंतरराष्ट्रीय राजनीति
ट्रंप की यह घोषणा ऐसे समय आई है जब अमेरिका में 2024 के राष्ट्रपति चुनावों के बाद उनकी वापसी को लेकर फिर से चर्चाएं गर्म हैं। ट्रंप ने हमेशा चीन की व्यापार नीतियों की आलोचना की है और इस नए समझौते को उन्होंने एक “मास्टरस्ट्रोक” करार दिया है।

“चीन ने हमें बरसों तक आर्थिक रूप से लूटा। अब वक्त है कि हम अपने दोस्तों के साथ मिलकर एक नया आर्थिक फ्रंट बनाएं,” – डोनाल्ड ट्रंप, प्रेस ब्रीफिंग में।

चीन की प्रतिक्रिया: ‘विघटनकारी गठबंधन’ करार
चीन के विदेश मंत्रालय ने इस व्यापार समझौते पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजिंग से जारी बयान में कहा गया:

“यह तथाकथित समझौता क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा है और यह देशों को विभाजित करने का एक नया प्रयास है।”

चीन ने यह भी आरोप लगाया कि यह अमेरिका द्वारा नियंत्रित एक ‘New Cold War’ का हिस्सा है जिसमें एशियाई देशों को मोहरा बनाया जा रहा है।

वैश्विक विशेषज्ञों की राय: क्या यह RCEP का विकल्प बन सकता है?
इस समझौते को लेकर विशेषज्ञों में विभाजित राय है। कुछ का मानना है कि यह RCEP (Regional Comprehensive Economic Partnership) का एक विकल्प हो सकता है, जिसमें भारत शामिल नहीं है। वहीं, कुछ इसे “अभी अधूरा और रणनीतिक रूप से अस्थिर” करार दे रहे हैं।

पॉलिटिकल इकॉनमी के विशेषज्ञ डॉ. हिदेओ टनाका के अनुसार:

“ट्रंप के पास राजनीतिक इच्छाशक्ति है, लेकिन इस गठबंधन को मजबूत आर्थिक आधार पर टिकाना आसान नहीं होगा।”

अमेरिकी कांग्रेस में मिश्रित प्रतिक्रिया
अमेरिकी कांग्रेस में इस व्यापार समझौते को लेकर दोहरी प्रतिक्रिया देखी गई। रिपब्लिकन नेताओं ने जहां इसे अमेरिका की ‘लीडरशिप की वापसी’ बताया, वहीं डेमोक्रेट्स ने ट्रंप पर आरोप लगाया कि वे इसे 2028 की राष्ट्रपति दौड़ के लिए प्रचार स्टंट की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।

जापानी मीडिया का समर्थन, जनता में उत्साह
जापान के प्रमुख अखबार जैसे ‘योमिउरी शिंबुन’ और ‘असाही शिंबुन’ ने इस समझौते को लेकर सकारात्मक रिपोर्ट प्रकाशित की है। आम जापानी नागरिकों में भी इसे लेकर उत्साह है, खासकर युवा वर्ग में जो चीन की नीतियों को लेकर असहज महसूस करता है।

समापन: ट्रंप का मास्टरस्ट्रोक या कूटनीतिक जुआ?
यह देखना दिलचस्प होगा कि यह व्यापार समझौता भविष्य में क्या आकार लेता है। क्या यह वास्तव में एशिया को चीन की परछाई से निकाल पाएगा या यह एक राजनीतिक रणनीति बनकर रह जाएगा?

परंतु फिलहाल, जापानी प्रधानमंत्री इशिबा द्वारा दिए गए गर्मजोशी भरे स्वागत से इतना तो तय है कि ट्रंप की यह चाल वैश्विक कूटनीतिक समीकरणों को झकझोर चुकी है।

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Harshita Ahuja

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