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अमरनाथ यात्रा पर ब्रेक: जम्मू से यात्रा 17 जुलाई को भारी बारिश के कारण निलंबित, आधार शिविरों से श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाला गया

अमरनाथ यात्रा 2025: अब तक 2.47 लाख से अधिक श्रद्धालु पवित्र गुफा मंदिर में दर्शन कर चुके हैं, श्रद्धा के साथ प्रार्थना अर्पित करते हुए इस पावन यात्रा में भाग लिया है।

जम्मू/श्रीनगर, 17 जुलाई 2025 — देशभर के लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक अमरनाथ यात्रा एक बार फिर मौसम की मार की चपेट में आ गई है। लगातार हो रही भारी बारिश और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने 17 जुलाई को जम्मू से अमरनाथ यात्रा को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही, बालटाल और पहलगाम जैसे प्रमुख आधार शिविरों से तीर्थयात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।

भारी बारिश बनी बाधा, प्रशासन अलर्ट पर
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने स्पष्ट किया कि 16 जुलाई की रात से शुरू हुई मूसलधार बारिश ने राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के कई हिस्सों को नुकसान पहुंचाया है। इस कारण नाशरी सुरंग, रामबन और बनिहाल क्षेत्रों में भारी भूस्खलन हुआ है, जिससे यातायात बाधित हो गया है।

अधिकारियों के अनुसार, “श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि है। जब तक मौसम सामान्य नहीं होता और रास्तों की पूरी तरह से मरम्मत नहीं हो जाती, तब तक यात्रा को रोकना अनिवार्य है।”

लगातार दूसरे वर्ष भी मौसम बना चुनौती
यह लगातार दूसरा वर्ष है जब मौसम की विकट परिस्थितियों के चलते अमरनाथ यात्रा को बीच में रोकना पड़ा है। इस वर्ष यात्रा की शुरुआत 29 जून से हुई थी और अब तक लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। लेकिन पिछले कुछ दिनों से जारी वर्षा ने सुरक्षा और राहत दलों की चिंता बढ़ा दी है।

CRPF और सेना ने संभाला मोर्चा
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, CRPF, जम्मू-कश्मीर पुलिस और भारतीय सेना के जवानों को तैनात कर दिया गया है ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सके। यात्रियों को उनके लंगर स्थलों और टेंटों से निकाल कर प्रशासनिक भवनों, सामुदायिक केंद्रों और स्कूलों में अस्थायी रूप से ठहराया गया है।

हेलीकॉप्टर सेवाएं भी प्रभावित
वहीं, खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर सेवाएं भी स्थगित कर दी गई हैं। बालटाल और पहलगाम मार्ग से हेलिकॉप्टर के जरिए दर्शन के इच्छुक श्रद्धालुओं को भी निराशा का सामना करना पड़ा है।

एक अधिकारी ने जानकारी दी कि, “हेलिकॉप्टर उड़ान के लिए दृश्यता न्यूनतम स्तर से भी नीचे आ चुकी है। उड़ान भरना फिलहाल संभव नहीं है।”

श्रद्धालुओं का संयम, प्रशासन की सराहना
हालांकि भारी बारिश और रुकावटों के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ है। लंगर समितियां, स्वयंसेवक संगठन और तीर्थयात्री मिलकर एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के कानपुर से आए एक श्रद्धालु रमेश तिवारी ने कहा, “हम बाबा बर्फानी के बुलावे पर आए हैं। मौसम की वजह से कुछ समय रुकना पड़ा, लेकिन जो सेवा और व्यवस्था यहां मिल रही है, वह सराहनीय है।”

रास्तों की निगरानी, रेस्क्यू टीमें सक्रिय
जम्मू-कश्मीर प्रशासन के अनुसार, सड़क मार्गों की निरंतर निगरानी की जा रही है। ड्रोन्स, CCTV और सेना की विशेष इंजीनियरिंग टीमों को तैनात किया गया है ताकि किसी भी भूस्खलन, पानी के बहाव या सड़क क्षति की स्थिति में तत्परता से कार्रवाई हो सके।

मौसम विभाग की चेतावनी
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले 48 घंटों तक तेज बारिश और गरज-चमक के साथ तूफान की चेतावनी जारी की है। विशेषकर रामबन, अनंतनाग, पहलगाम और बालटाल क्षेत्रों में भारी वर्षा की आशंका जताई गई है।

केंद्र और राज्य सरकार की निगरानी
केंद्रीय गृह मंत्रालय और जम्मू-कश्मीर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा स्वयं हालात पर नजर बनाए हुए हैं। यात्रा के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने और प्रभावी राहत कार्य के लिए लगातार बैठकें हो रही हैं।

गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “प्रधानमंत्री कार्यालय तक को हालात से अवगत कराया जा चुका है। यदि आवश्यक हुआ तो अतिरिक्त फोर्स और संसाधन भी भेजे जाएंगे।”

पुनः शुरू होने की संभावना कब?
अधिकारियों के अनुसार, यात्रा कब दोबारा शुरू होगी यह पूरी तरह मौसम और रास्तों की स्थिति पर निर्भर करेगा। उम्मीद की जा रही है कि यदि अगले 2–3 दिनों में मौसम सुधरता है, तो जम्मू से यात्रा को दोबारा बहाल किया जा सकता है।

पंजीकृत श्रद्धालुओं को संदेश
अमरनाथ श्राइन बोर्ड और प्रशासन ने पंजीकृत श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे वर्तमान में अपने-अपने गृहनगर से यात्रा शुरू न करें। मोबाइल नंबरों और वेबसाइट के माध्यम से लगातार स्थिति से अवगत कराया जा रहा है।

अब तक की यात्रा रिपोर्ट
अब तक के आंकड़ों के अनुसार, 29 जून से लेकर 16 जुलाई तक लगभग 3.5 लाख श्रद्धालु बाबा अमरनाथ के दर्शन कर चुके हैं। इनमें से अधिकांश ने बालटाल और पहलगाम मार्ग से यात्रा पूरी की।

स्वास्थ्य सेवाएं मुस्तैद
घाटी में तैनात डॉक्टरों की विशेष टीम, मोबाइल एंबुलेंस, और हेली-रेस्क्यू सुविधाएं लगातार काम कर रही हैं। अब तक 14 श्रद्धालुओं की मौत विभिन्न स्वास्थ्य कारणों से हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोगों को समय पर प्राथमिक चिकित्सा देकर बचा लिया गया।

निष्कर्ष:
अमरनाथ यात्रा, आस्था, साहस और व्यवस्था की असाधारण मिसाल है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु तमाम मुश्किलों के बावजूद इस पवित्र यात्रा में हिस्सा लेते हैं। हालांकि इस बार बारिश ने अस्थायी विराम लगाया है, लेकिन प्रशासन, सुरक्षाबलों और सेवा समितियों की तत्परता ने यह सुनिश्चित किया है कि हर श्रद्धालु सुरक्षित और सम्मान के साथ इस यात्रा का हिस्सा बने।

श्रद्धालुओं से अपील है कि आधिकारिक सूचनाओं का ही अनुसरण करें, अफवाहों से दूर रहें और धैर्य बनाए रखें। बाबा बर्फानी का आशीर्वाद सभी के साथ है।

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Harshita Ahuja

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