महाराष्ट्र: प्रसव के तुरंत बाद, दंपति ने नवजात को reportedly एक कपड़े में लपेटा और बस की खिड़की से बाहर फेंक दिया। जब सहयात्रियों और ड्राइवर ने सवाल किया तो उन्होंने दावा किया कि महिला को यात्रा के दौरान उल्टी हो गई थी, इसलिए सीट पर गंदगी हो गई।

घटना से बस यात्रियों में मची अफरा-तफरी, पुलिस ने महिला और उसके प्रेमी को हिरासत में लिया, नवजात की मौत की पुष्टि
महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले से एक दिल को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने न केवल लोगों की संवेदनाओं को झकझोर दिया है बल्कि एक बार फिर समाज में बढ़ती संवेदनहीनता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक 19 वर्षीय युवती ने चलती बस में बच्चे को जन्म दिया और फिर अपने प्रेमी के साथ मिलकर उसे बस की खिड़की से बाहर फेंक दिया।
घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। बस के अन्य यात्री हक्के-बक्के रह गए और तुरंत ही ड्राइवर और कंडक्टर ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने आरोपी महिला और उसके साथी को गिरफ्तार कर लिया है और बाल हत्या का मामला दर्ज किया गया है।
क्या है पूरी घटना?
यह घटना 10 जुलाई 2025 की दोपहर महाराष्ट्र राज्य परिवहन (MSRTC) की अहमदनगर से पुणे जा रही बस में हुई। बस में करीब 40 यात्री सवार थे। इनमें एक युवा महिला और एक युवक भी थे, जो आपस में प्रेमी बताए जा रहे हैं।
- घटना का विवरण:
युवती को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। - महिला ने सीट पर ही बच्चे को जन्म दिया, लेकिन बिना किसी को बताए।
- कुछ मिनटों बाद युवक ने खिड़की का शीशा खोला और दोनों ने नवजात को बाहर फेंक दिया।
- यह सब इतने गुप्त तरीके से हुआ कि कुछ यात्रियों को पहले इसका आभास तक नहीं हुआ।
- लेकिन एक महिला यात्री ने सीट के पास खून देखा और संदेह होने पर शोर मचाया।
बस को तुरंत रोका गया और पुलिस को सूचना दी गई।
पुलिस का बयान: हत्या की धाराओं में मामला दर्ज
घटना की सूचना मिलते ही पारनेर पुलिस स्टेशन की टीम मौके पर पहुंची और दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया। पुलिस ने प्राथमिक पूछताछ में पाया कि:
“महिला 7 महीने की गर्भवती थी और दोनों ने यह बात किसी को नहीं बताई थी। डर के कारण और समाजिक बदनामी से बचने के लिए उन्होंने यह अमानवीय कदम उठाया।”
पुलिस ने बताया कि पास के एक खेत में बच्चे का शव बरामद किया गया है, जो बस के गुजरने के कुछ मिनटों बाद एक स्थानीय किसान को दिखाई दिया।
नवजात की मौत: जन्म के तुरंत बाद या गिरने से?
पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि नवजात ने जन्म लिया था और कुछ मिनट तक जीवित भी रहा। लेकिन उसके बाद उसे जोर से जमीन पर गिरा देने के कारण उसकी मृत्यु हो गई।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार:
“नवजात के सिर और गर्दन में गंभीर चोटें थीं, जो ऊंचाई से गिरने के कारण संभव हैं। फेफड़ों में हवा और कुछ रोने के संकेत मिले हैं, जो यह दर्शाता है कि वह जीवित पैदा हुआ था।”
आरोपियों की पहचान और बैकग्राउंड
पुलिस के अनुसार, महिला का नाम पूजा (बदला हुआ नाम) है और वह पुणे के पास एक छोटे कस्बे की रहने वाली है। युवक का नाम विक्रम (बदला हुआ नाम) है और वह एक प्राइवेट कंपनी में कार्यरत है।
दोनों एक ही गांव के रहने वाले हैं और बीते दो वर्षों से प्रेम संबंध में थे। लेकिन उनके परिवार इस रिश्ते से सहमत नहीं थे। गर्भधारण के बाद लड़की के घरवालों ने उसे घर से निकाल दिया था। युवक ने उसे साथ रखने का वादा किया था, लेकिन जब समय आया तो समाज के डर और जिम्मेदारी से भागने की कोशिश में इस वीभत्स घटना को अंजाम दिया।
बस में मौजूद यात्री बोले – “हमने कभी सोचा भी नहीं था ऐसा होगा”
बस में मौजूद यात्रियों ने बताया कि युवती पहले से ही असहज दिख रही थी। किसी को शक नहीं था कि वह प्रसव पीड़ा में है क्योंकि वह बार-बार सिर झुका रही थी और कपड़े से खुद को ढके हुए थी।
एक यात्री ने कहा:
“जब महिला यात्री ने खून देखा और शोर मचाया, तब हम सब समझ ही नहीं पाए कि क्या हो गया है। लेकिन जैसे ही कंडक्टर ने खिड़की की ओर देखा, वो चौंक गया। ऐसा लग रहा था जैसे किसी जानवर को फेंका गया हो।”
MSRTC और ड्राइवर-कंडक्टर की भूमिका सराहनीय
बस ड्राइवर और कंडक्टर ने तुरंत जिम्मेदारी समझते हुए बस को रोका और पुलिस को सूचित किया। MSRTC प्रशासन ने भी घटना की निंदा करते हुए जांच में पूरी मदद की।
MSRTC अधिकारी ने कहा:
“हमारे कर्मचारी सतर्क थे। हमने महिला को तुरंत प्राथमिक उपचार दिलवाया और पुलिस को सौंपा। यह घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।”
मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया: यह ‘सोच की हत्या’ है
घटना के बाद महिला अधिकार और बाल कल्याण संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। National Commission for Protection of Child Rights (NCPCR) ने महाराष्ट्र पुलिस से सुपरवाइज्ड चार्जशीट और केस ट्रैकिंग की मांग की है।
महिला आयोग की अध्यक्ष ने कहा:
“यह एक नवजात की हत्या ही नहीं, बल्कि समाज की उस सोच की हत्या है जो आज भी एक महिला को डराकर ऐसे कदम उठाने को मजबूर करती है।”
क्या कहता है कानून? IPC की धाराएं और संभावित सजा
पुलिस ने आरोपियों पर IPC की धारा 302 (हत्या), 315 (गर्भवती महिला द्वारा भ्रूण को नुकसान पहुंचाना), 34 (साझा अपराध) के तहत केस दर्ज किया है।
यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो दोनों को आजन्म कारावास या मृत्युदंड तक की सजा हो सकती है।
कानूनी विकल्प थे, लेकिन जानकारी और समर्थन का अभाव बना सबसे बड़ा कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युवती को सही समय पर सरकारी सहायता या काउंसलिंग मिली होती, तो यह घटना रोकी जा सकती थी। सरकार की जननी सुरक्षा योजना, बाल संरक्षण केंद्र जैसी कई योजनाएं हैं, लेकिन जागरूकता की भारी कमी है।
निष्कर्ष: यह सिर्फ एक हत्या नहीं, हमारे सामाजिक ढांचे की असफलता है
महाराष्ट्र की इस भयावह घटना ने एक बार फिर हमें झकझोर कर रख दिया है। एक नवजात का जीवन जो दुनिया देखने से पहले ही खामोश कर दिया गया, वो एक परिवार की नाकामी नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।
जब तक हम युवाओं को सुरक्षित, सामाजिक और मानसिक सहयोग नहीं देंगे, तब तक ऐसी घटनाएं रुकना मुश्किल हैं। अब ज़रूरत है कि कानून के साथ-साथ जागरूकता, संवेदनशीलता और सिस्टम की जिम्मेदारी को भी सक्रिय किया जाए।
