दिल्ली पुलिस की बम निरोधक दस्ते (बम स्क्वॉड), डॉग स्क्वॉड, फायर ब्रिगेड टीम और विशेष स्टाफ की टीम मौके पर मौजूद है। जांच जारी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि ये धमकियाँ सिर्फ एक अफवाह थीं या इसके पीछे कोई गंभीर साजिश छुपी है।

राजधानी में बढ़ती धमकियों ने बढ़ाई चिंता, ATS और बम स्क्वॉड फिर एक्शन में
दिल्ली एक बार फिर आतंक और अफरातफरी के साये में आ गई है। मंगलवार सुबह देश की प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थाओं सेंट स्टीफेंस कॉलेज (दिल्ली यूनिवर्सिटी) और सेंट थॉमस स्कूल (मंडावली) को गुमनाम ईमेल के ज़रिए बम विस्फोट की धमकी दी गई। ईमेल में लिखा गया था कि परिसरों में बम लगाया गया है जो किसी भी वक्त फट सकता है।
धमकी मिलते ही दिल्ली पुलिस, एटीएस (Anti-Terrorism Squad), बम स्क्वॉड और साइबर सेल हरकत में आ गई। दोनों संस्थानों को तुरंत खाली कराया गया और तलाशी अभियान शुरू हुआ।
कैसे मिली धमकी? – सुबह 7:10 बजे आया मेल
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मंगलवार सुबह 7:10 बजे सेंट स्टीफेंस कॉलेज और 7:18 बजे सेंट थॉमस स्कूल की आधिकारिक ईमेल आईडी पर एक गुमनाम मेल प्राप्त हुआ। इस मेल में दावा किया गया कि कॉलेज और स्कूल परिसर में बम लगाया गया है।
मेल की भाषा डर फैलाने वाली थी और इसमें लिखा था:
“यह कोई मज़ाक नहीं है। परिसर में बम लगाया गया है। सब नष्ट हो जाएगा।”
पुलिस का कहना है कि मेल फ्री ईमेल सर्विस के जरिए भेजा गया है और शुरुआती जांच में इसमें VPN और प्रॉक्सी नेटवर्क के इस्तेमाल के संकेत मिले हैं।
तुरंत निकाले गए छात्र और स्टाफ
धमकी मिलते ही स्कूल और कॉलेज प्रशासन ने बिना देर किए सभी छात्रों और स्टाफ को बाहर निकाला। फायर एग्जिट प्लान के तहत सायरन बजाया गया और सुरक्षा कर्मियों ने बच्चों को खुले मैदान में एकत्रित किया।
सेंट स्टीफेंस कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. अंजू मैथ्यूज ने बताया:
“हमारे लिए छात्रों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता थी। प्रशासन ने तुरंत पुलिस को सूचित किया और पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्वक संपन्न हुई।”
सेंट थॉमस स्कूल की वाइस प्रिंसिपल ने कहा कि कई बच्चे डर के मारे रोने लगे थे। माता-पिता को तुरंत सूचित किया गया और 30 मिनट के भीतर अधिकांश बच्चे उनके साथ सुरक्षित चले गए।
पुलिस का बयान: कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली, लेकिन जांच जारी
दिल्ली पुलिस के जॉइंट कमिश्नर राजेश खुराना ने प्रेस को बताया:
“अब तक की तलाशी में कोई विस्फोटक सामग्री या संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है। लेकिन हम सर्च ऑपरेशन पूरी तरह खत्म होने तक कुछ भी निष्कर्ष नहीं निकाल सकते।”
उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की धमकियाँ समाज में भय का वातावरण बनाने की साजिश हो सकती हैं और इसमें साइबर अपराधियों की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता।
साइबर सेल की टीम कर रही ईमेल की तकनीकी जांच
दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने धमकी वाले ईमेल की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, ईमेल यूक्रेन बेस्ड प्रॉक्सी सर्वर के ज़रिए भेजा गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि यह एक अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क की हरकत हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ समय से भारत के शैक्षणिक संस्थानों को लगातार निशाना बनाकर ऐसे ईमेल भेजे जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य छात्रों, अभिभावकों और संस्थानों में डर और भ्रम फैलाना है।
पिछले मामलों से जुड़ा है क्या कोई पैटर्न?
गौरतलब है कि मई 2024 में भी दिल्ली के लगभग 100 स्कूलों और कुछ निजी विश्वविद्यालयों को इसी तरह की बम धमकियाँ मिली थीं। तब भी कुछ स्कूलों को खाली कराया गया था, लेकिन कोई विस्फोटक बरामद नहीं हुआ।
एटीएस के एक अधिकारी के अनुसार,
“मेल की भाषा, टाइमिंग और IP पैटर्न देखकर लगता है कि यह उसी साइबर समूह की कारस्तानी हो सकती है जिसने पहले भी ऐसे मेल भेजे हैं।”
छात्रों और अभिभावकों में बढ़ा डर
घटना के बाद छात्रों और अभिभावकों में भारी दहशत फैल गई है। सेंट थॉमस स्कूल के बाहर एक अभिभावक ने बताया:
“मुझे स्कूल से कॉल आया तो मैं काम छोड़कर भागा। सोचिए, क्या हालत होती अगर सच में बम होता!”
कई छात्रों ने कहा कि वे अब स्कूल आने में डर महसूस कर रहे हैं। कॉलेज छात्रों ने भी प्रशासन से क्लासेज ऑनलाइन करने की मांग की है जब तक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाती।
राजनीतिक हलकों में मचा घमासान
घटना की खबर आते ही राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आने लगीं। आम आदमी पार्टी ने कहा कि दिल्ली पुलिस केंद्र सरकार के अधीन है और केंद्रीय गृह मंत्रालय को इस पर जवाब देना चाहिए।
AAP प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा:
“अगर बार-बार दिल्ली के स्कूलों और कॉलेजों को बम से उड़ाने की धमकी मिल रही है, तो यह सुरक्षा एजेंसियों की असफलता है।”
वहीं भाजपा नेता मनोज तिवारी ने कहा कि यह समय राजनीति का नहीं, बल्कि एकजुट होकर ऐसे अपराधियों को पकड़ने का है।
क्या ज़रूरत है दिल्ली के स्कूलों-कॉलेजों में नई सुरक्षा रणनीति की?
सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि बार-बार हो रही ऐसी घटनाएं बताती हैं कि दिल्ली के शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा प्रणाली अपडेट नहीं हुई है।
उन्होंने सुझाव दिया:
- सभी स्कूलों और कॉलेजों में AI आधारित CCTV सर्विलांस लगाया जाए।
- इमरजेंसी रेस्पॉन्स सिस्टम हर संस्थान में अनिवार्य किया जाए।
- ईमेल मॉनिटरिंग और साइबर डिटेक्शन सिस्टम को और तेज़ किया जाए।
- स्कूल स्टाफ को बॉम्ब थ्रेट मैनेजमेंट की ट्रेनिंग दी जाए।
विदेशी हाथ की भी हो सकती है भूमिका?
साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि ये धमकियाँ सिर्फ “मज़ाक” नहीं हैं बल्कि हाइब्रिड वॉरफेयर का हिस्सा हो सकती हैं। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान और चीन के साइबर प्रॉक्सी नेटवर्क्स भारत की शिक्षा प्रणाली को निशाना बना रहे हैं ताकि अस्थिरता फैलाई जा सके।
हालांकि दिल्ली पुलिस ने अभी तक किसी विदेशी एजेंसी की पुष्टि नहीं की है, लेकिन जांच की दिशा उसी ओर इशारा कर रही है।
सरकार की अपील – “अफवाहों पर ध्यान न दें”
दिल्ली सरकार ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। एक प्रेस रिलीज़ में कहा गया:
“हमारी एजेंसियाँ पूरी तरह सतर्क हैं। अब तक किसी भी धमकी की पुष्टि नहीं हुई है। कृपया सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही अफवाहों से बचें।”
सरकार ने यह भी कहा कि अगर किसी को कोई संदिग्ध मेल, कॉल या गतिविधि दिखे तो वह तुरंत 112 या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें।
निष्कर्ष: डर की चादर तनी, लेकिन चौकसी ज़रूरी
दिल्ली के स्कूलों और कॉलेजों को बार-बार मिल रही बम धमकियाँ अब सिर्फ मज़ाक या शरारत नहीं रह गईं। यह एक सुनियोजित साइबर मनोवैज्ञानिक युद्ध का संकेत हो सकता है, जिसका मकसद देश की शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक मनोबल को प्रभावित करना है।
जरूरत है कि प्रशासन, सरकार, शिक्षण संस्थान और आम नागरिक मिलकर सतर्कता और सहयोग की भावना अपनाएँ, ताकि इन धमकियों का मुँहतोड़ जवाब दिया जा सके – न सिर्फ शब्दों में, बल्कि कड़ी कार्रवाई में।
