पुलिस ने बताया कि हत्या के समय घर की पहली मंज़िल पर केवल राधिका, उसकी माँ और पिता मौजूद थे। मंजू, जो बीमार थीं और बुखार की वजह से आराम कर रही थीं, इस घटना से पूरी तरह अनजान थीं और उन्हें तब तक कुछ पता नहीं चला जब तक सब कुछ हो नहीं गया।

खुशियों का दिन बना मातम – राधिका की मौत से कांपा पूरा मोहल्ला
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक प्रतिभाशाली टेनिस खिलाड़ी राधिका यादव की उसके अपने ही पिता ने गोली मारकर हत्या कर दी।
यह घटना तब और भी अधिक हृदयविदारक बन गई जब पता चला कि यह हत्या माँ के जन्मदिन के दिन किचन में हुई, जहां परिवार सुबह की तैयारियों में जुटा था।
पिता द्वारा बेटी की हत्या, वो भी घर के अंदर, समाज को झकझोर देने वाली घटना है। यह न सिर्फ मानव संवेदना, बल्कि पिता-पुत्री के रिश्ते को भी सवालों के घेरे में ले आता है।
घटना का समय और स्थान: किचन में चली मौत की गोली
घटना रविवार सुबह करीब 9:30 बजे गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित कृष्णा विला सोसाइटी की है।
राधिका यादव, जो कि एक उभरती हुई टेनिस खिलाड़ी थी, अपनी माँ के जन्मदिन के लिए किचन में चाय बना रही थी। उसी समय उसके पिता राजीव यादव ने अचानक अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर निकालकर उसे गोली मार दी।
माँ सीमा यादव उस समय पास के कमरे में थीं और जब तक वह दौड़ती हुई किचन पहुंचीं, तब तक राधिका ज़मीन पर लहूलुहान गिर चुकी थी।
पुलिस की शुरुआती जांच – ‘गुस्से में उठाया खौफनाक कदम’
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम मौके पर पहुंची।
घटना स्थल से रिवॉल्वर बरामद कर ली गई है, और आरोपी पिता राजीव यादव को गिरफ्तार कर लिया गया है।
प्रारंभिक पूछताछ में पिता ने स्वीकार किया कि उसने गुस्से में आकर गोली चलाई। उनका कहना है कि राधिका ने हाल के दिनों में पढ़ाई-लिखाई और खेल में ध्यान देना बंद कर दिया था, और वह पारिवारिक अनुशासन तोड़ रही थी।
हालांकि पुलिस यह भी मान रही है कि घरेलू कलह, संवेदनात्मक असंतुलन और मानसिक दबाव इस हत्या के पीछे बड़े कारण हो सकते हैं।
राधिका कौन थी? सपनों से भरी एक उभरती खिलाड़ी
18 वर्षीय राधिका यादव दिल्ली के एक प्रतिष्ठित कॉलेज की छात्रा थी और राष्ट्रीय स्तर पर टेनिस प्रतियोगिताओं में भाग ले चुकी थी।
उसने पिछले साल लखनऊ ओपन जूनियर टूर्नामेंट में सेमीफाइनल तक पहुंचकर सबका ध्यान खींचा था।
पड़ोसियों और रिश्तेदारों के अनुसार, राधिका अत्यंत मिलनसार, मेहनती और आत्मनिर्भर लड़की थी, जो अपने स्पोर्ट्स करियर को लेकर बेहद गंभीर थी।
कोच विक्रम ठाकुर ने मीडिया से कहा:
“राधिका में भविष्य का स्टार बनने की पूरी क्षमता थी। वह मेहनती थी और मानसिक रूप से मजबूत भी। हम सब स्तब्ध हैं।”
पड़ोसियों की जुबानी – “ऐसा घर जिसमें हर सुबह हंसी गूंजती थी, आज मातम है”
घटना से पूरा मोहल्ला सदमे में है।
पड़ोस में रहने वाली रीना मिश्रा ने बताया:
“हमने गोली की आवाज सुनी तो पहले समझ नहीं पाए। लेकिन जब सीमा (राधिका की माँ) की चीखें सुनाई दीं, तो सब भागकर पहुंचे। जो देखा, उससे पैर कांपने लगे।”
कई पड़ोसियों ने यह भी बताया कि पिछले कुछ हफ्तों से राजीव और राधिका के बीच बहस होती रहती थी, लेकिन किसी को यह अंदेशा नहीं था कि बात हत्या तक पहुंच जाएगी।
माँ का बयान – ‘मेरे जन्मदिन पर मेरी दुनिया उजड़ गई’
सबसे ज़्यादा दिल को झकझोर देने वाला बयान राधिका की माँ सीमा यादव का था, जिन्होंने कहा:
“मैं अपने जन्मदिन की सुबह की तैयारियों में लगी थी। राधिका किचन में मेरे लिए चाय बना रही थी। मुझे क्या पता था कि वही आखिरी बार होगी जब मैं उसे मुस्कुराते हुए देखूंगी। मेरे सामने मेरी बेटी को उसके पिता ने छीन लिया। ये कैसा जन्मदिन था, ये कैसा जीवन?”
सीमा इस समय गहरे सदमे में हैं और बार-बार बेहोश हो रही हैं। उनकी देखभाल के लिए मनोवैज्ञानिकों और काउंसलिंग टीम को बुलाया गया है।
आरोपी पिता कौन है? जानिए राजीव यादव का प्रोफाइल
राजीव यादव गाजियाबाद के एक सरकारी उपक्रम में इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं।
वे समाज में सम्मानित और शांत स्वभाव के व्यक्ति माने जाते थे, लेकिन कुछ सालों से मानसिक तनाव में रहने की खबरें भी सामने आई हैं।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि राजीव यादव को अपनी बेटी के ‘फैशन’, ‘सोशल मीडिया पर एक्टिविटी’, और ‘रात को देर से आने-जाने’ पर आपत्ति थी।
अब जांच का रुख यह देखने की ओर है कि क्या राजीव किसी तरह के मानसिक रोग से जूझ रहे थे या यह पूरी तरह से पूर्व नियोजित हत्या थी।
सामाजिक प्रतिक्रिया – ‘यह हत्या नहीं, पितृसत्ता का सबसे खौफनाक चेहरा है’
सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर आक्रोश और शोक की लहर दौड़ गई है।
JusticeForRadhika ट्रेंड करने लगा है और लोग इस घटना को “पितृसत्ता की मानसिकता का नतीजा” बता रहे हैं।
फेमिनिस्ट एक्टिविस्ट शाइस्ता रिज़वी ने लिखा:
“एक बेटी जिसने अपने सपनों को पंख दिए थे, उसे उसके अपने ही पिता ने मार डाला, क्योंकि वह उसकी आज़ादी बर्दाश्त नहीं कर पाया। ये हत्या नहीं, सोच का खून है।”
राजनीतिक प्रतिक्रिया – महिला सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
घटना पर कई राजनीतिक दलों ने बयान जारी किया है।
सपा नेता स्वाति सिंह ने कहा:
“अब वक्त आ गया है कि परिवार के भीतर हो रही हिंसा को भी कानून के दायरे में गंभीरता से लिया जाए। राधिका जैसी बेटियां देश का भविष्य थीं।”
बीजेपी प्रवक्ता प्रियंका रावत ने कहा:
“यह घटना दिल दहला देने वाली है। अपराधी को सख्त से सख्त सजा दी जानी चाहिए, चाहे वह पिता ही क्यों न हो।”
कानूनी प्रक्रिया – हत्या का मामला दर्ज, चार्जशीट जल्द
पुलिस ने आईपीसी की धारा 302 (हत्या) के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
राजीव यादव को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और केस को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाए जाने की सिफारिश की गई है।
एसपी ग्रामीण राकेश कुमार ने कहा:
“हमारे लिए यह केस संवेदनशील है। परिवार, समाज और देश – हर किसी को जवाब चाहिए। हम जल्दी चार्जशीट दाखिल करेंगे।”
निष्कर्ष: सपनों की हत्या सिर्फ कोर्ट में नहीं रुकेगी – समाज को भी बदलना होगा
राधिका यादव की मौत सिर्फ एक बेटी की मौत नहीं है, यह हर उस लड़की की उम्मीद की हत्या है, जो अपने जीवन को अपनी शर्तों पर जीना चाहती है।
एक टैलेंटेड, मेहनती, सपने देखने वाली लड़की, जो देश के लिए खेल सकती थी, पिता की ‘सम्मान’, ‘अनुशासन’ और ‘पुरुष अहं’ की गोली से खत्म हो गई।
अब वक्त है कि:
- परिवार के भीतर हिंसा को भी गंभीरता से लिया जाए
- बेटियों की आज़ादी को समर्थन मिले, संदेह नहीं
- मानसिक स्वास्थ्य की जांच हर स्तर पर हो
- समाज पुरुषों के गुस्से को ‘प्राकृतिक अधिकार’ मानना बंद करे
