सियासत गरम, महिला आयोग भड़का, जनता नाराज़ – क्या यही है जनता के प्रतिनिधियों की सोच?

कोलकाता/नई दिल्ली – पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक शर्मनाक बलात्कार की घटना के बाद जब पूरा देश पीड़िता के लिए इंसाफ की मांग कर रहा है, तभी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी के बयान ने पूरे देश में बवाल खड़ा कर दिया है। बनर्जी ने कहा कि, “अगर एक दोस्त ने अपनी ही दोस्त का रेप कर दिया, तो इसमें कोई क्या कर सकता है?” — इस कथन के सामने आते ही महिला संगठनों, विपक्षी पार्टियों और सोशल मीडिया पर बवाल मच गया।
यह बयान न केवल संवेदनहीन है, बल्कि यह एक जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारियों और समझ पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सवाल यह है कि क्या देश के सांसद बलात्कार जैसे जघन्य अपराध को भी अब ‘मामूली व्यक्तिगत मामला’ मानने लगे हैं?
कोलकाता रेप केस: घटना क्या थी?
कोलकाता के सॉल्ट लेक इलाके में कुछ दिन पहले एक युवती ने अपने करीबी दोस्त पर बलात्कार का आरोप लगाया। रिपोर्ट के अनुसार, लड़की और आरोपी दोस्त लंबे समय से परिचित थे और घटना के समय एक निजी पार्टी में साथ थे। पीड़िता ने पुलिस में दर्ज कराए बयान में कहा कि आरोपी ने नशे का फायदा उठाकर उसके साथ बलात्कार किया।
मामले की जांच बिधाननगर पुलिस कर रही है। एफआईआर दर्ज की जा चुकी है, आरोपी से पूछताछ हो रही है और लड़की का मेडिकल परीक्षण कराया गया है।
कल्याण बनर्जी का बयान: “अगर दोस्त ने रेप किया तो क्या किया जा सकता है?”
जब मीडिया ने TMC सांसद कल्याण बनर्जी से इस घटना पर प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने कहा:
“ये मामला दो दोस्तों के बीच का है। अगर किसी दोस्त ने ही रेप किया है, तो इसमें कोई क्या कर सकता है? हम इस पर क्या प्रतिक्रिया दें?”
बनर्जी के इस बयान ने न केवल कोलकाता बल्कि पूरे देश को झकझोर दिया है। जब एक जनप्रतिनिधि रेप जैसे अपराध को ‘दोस्ती का मामला’ बता दे, तो सवाल उठता है कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए संवैधानिक जिम्मेदारियाँ कहां गईं?
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: विपक्षी दलों ने मांगा इस्तीफा
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस और सीपीएम ने कल्याण बनर्जी के बयान की कड़ी निंदा की है।
भाजपा की महिला मोर्चा अध्यक्ष लॉकेट चटर्जी ने कहा:
“कल्याण बनर्जी का बयान शर्मनाक और आपराधिक है। यह महिलाओं के खिलाफ अपराध को सामान्य बनाने की कोशिश है। हम मांग करते हैं कि ममता बनर्जी तुरंत उन्हें पार्टी से निलंबित करें और लोकसभा में उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।”
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी बोले:
“टीएमसी के नेताओं को महिलाओं की गरिमा का कोई सम्मान नहीं। ऐसे लोग संसद में बैठने लायक नहीं हैं।”
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने भेजा नोटिस
राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कल्याण बनर्जी को नोटिस भेजा है और उनसे 48 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा:
“इस तरह का बयान बलात्कार जैसे गंभीर अपराध को तुच्छ बना देता है। यह न केवल कानून का अपमान है, बल्कि पीड़िता की पीड़ा का भी मज़ाक है।”
सोशल मीडिया पर भड़का जनाक्रोश
ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर #ShameOnKalyanBanerjee ट्रेंड कर रहा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब एक महिला किसी पुरुष मित्र से भरोसे में धोखा खाती है, तो क्या नेता सिर्फ कंधे उचकाकर जवाब देंगे?
एक यूज़र ने लिखा – “अगर यही बयान किसी भाजपा सांसद ने दिया होता, तो पूरा लिबरल गैंग अब तक आसमान सिर पर उठा लेता।”
एक अन्य यूज़र ने टिप्पणी की – “टीएमसी की नारी सुरक्षा नीति बस नारे तक सीमित है।”
ममता बनर्जी की चुप्पी सवालों के घेरे में
अब तक पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। यह वही ममता हैं जिन्होंने निर्भया कांड के समय दिल्ली सरकार को घेरा था और महिला सुरक्षा को चुनावी मुद्दा बनाया था। अब उन्हीं की पार्टी के वरिष्ठ नेता महिलाओं के खिलाफ अपराध पर गैरजिम्मेदार बयान दे रहे हैं और ममता खामोश हैं।
क्या यह चुप्पी मौन समर्थन है?
कल्याण बनर्जी का ट्रैक रिकॉर्ड: विवादों से पुराना नाता
यह पहली बार नहीं है जब कल्याण बनर्जी विवादों में आए हों। इससे पहले भी उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की महिला जजों को लेकर विवादास्पद टिप्पणियाँ की थीं। 2021 में भी उन्होंने भगवान राम और माता सीता को लेकर अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया था, जिस पर कोर्ट तक में फटकार लगी थी।
ऐसे में सवाल यह भी है कि क्या टीएमसी अपने नेताओं को पूरी छूट दे चुकी है, बिना किसी अनुशासन या जवाबदेही के?
कानूनी नजरिया: दोस्त हो या गैर, रेप तो रेप है
भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के अनुसार, यदि किसी महिला की सहमति के बिना उसके साथ यौन संबंध बनाया गया है, तो वह बलात्कार की श्रेणी में आता है — चाहे वह अपराधी उसका मित्र हो, प्रेमी हो या पति।
वरिष्ठ अधिवक्ता करुणा शर्मा कहती हैं:
“यह कहना कि ‘दोस्त ने किया तो क्या किया जाए’ — यह सीधे IPC और महिलाओं की गरिमा के खिलाफ है। कोर्ट को ऐसे बयानों का स्वतः संज्ञान लेना चाहिए।”
सामाजिक पहलू: क्या महिलाओं को अब दोस्तों से भी डरना होगा?
यह घटना और उस पर आया सांसद का बयान हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि आज की समाजिक व्यवस्था में महिलाओं की सुरक्षा कितनी कमजोर हो गई है। जब एक महिला अपने दोस्त पर भरोसा नहीं कर सकती और सत्ता के लोग इस पर ‘लाचार’ नजर आएं, तो समाज में संदेश क्या जाएगा?
कई महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस बात पर चिंता जताई है कि ये बयान रेप को ‘नॉर्मलाइज’ करने की कोशिश हैं, जो बेहद खतरनाक हैं।
निष्कर्ष: राजनीति की हदें पार, इंसानियत की हार
कल्याण बनर्जी का बयान न केवल असंवेदनशील है, बल्कि यह पूरे राजनीतिक वर्ग के चरित्र पर सवाल खड़ा करता है। क्या राजनीति अब इतनी बेशर्म हो गई है कि जनप्रतिनिधि बलात्कार पर भी हल्के-फुल्के तर्क दे सकते हैं?
सवाल ममता बनर्जी से भी है — क्या वह अपने सांसद पर कार्रवाई करेंगी या राजनीतिक मजबूरी के चलते आंखें मूंदे बैठेंगी?
देश की जनता अब जवाब मांग रही है, और यह केवल बयान का मामला नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा, गरिमा और न्याय के हक़ का सवाल बन चुका है।
