इससे पहले एससीओ बैठक में बोलते हुए, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ भारत की कड़ी और स्पष्ट नीति को दोहराया। उन्होंने कहा कि भारत को न केवल अपने आत्मरक्षा का पूरा अधिकार है, बल्कि वह उन तत्वों को कड़ा जवाब देने में सक्षम है जो सीमा पार आतंकवाद में लिप्त रहते हैं। उनका यह बयान पाकिस्तान के लिए एक सख्त और स्पष्ट संदेश माना जा रहा है।

चीन की राजधानी बीजिंग में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की रक्षा मंत्रियों की उच्चस्तरीय बैठक में भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक बार फिर से भारत की आतंकवाद के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस नीति को दुनिया के सामने बेबाकी से रखा। उन्होंने मंच से सीधे पाकिस्तान को निशाने पर लेते हुए कहा कि सीमा पार आतंकवाद को किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भारत अपने आत्मरक्षा के अधिकार से कभी पीछे नहीं हटेगा।
विशेष रूप से उन्होंने हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए SCO के सभी सदस्य देशों से इस घटना की बिना शर्त और स्पष्ट शब्दों में निंदा करने की अपील की।
🗣️ “आतंकवाद मानवता के खिलाफ अपराध है, इसकी कोई जाति, मजहब या राजनीतिक औचित्य नहीं” – राजनाथ सिंह
राजनाथ सिंह ने SCO बैठक को संबोधित करते हुए कहा:
“SCO जैसे मंच को आतंकवाद के खिलाफ एक स्वर में बोलना चाहिए। पहलगाम में निर्दोष श्रद्धालुओं पर किया गया हमला मानवता पर सीधा हमला है। ऐसी घटनाओं की स्पष्ट और बिना शर्त निंदा होनी चाहिए।”
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि आतंकवाद के विरुद्ध ‘सामूहिक और ईमानदार प्रयास’ तभी संभव हैं जब सदस्य देश दोहरे मापदंड छोड़ें और राजनीतिक हितों के नाम पर आतंक को संरक्षण देना बंद करें।
🛑 पाकिस्तान को अप्रत्यक्ष लेकिन तीखा संदेश: ‘सीमा पार से होने वाला आतंक अब नहीं सहा जाएगा’
राजनाथ सिंह का पूरा भाषण भले ही कूटनीतिक भाषा में था, लेकिन इसका निशाना पूरी तरह स्पष्ट था – पाकिस्तान। उन्होंने कहा:
“भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगा। यदि कोई देश सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देता है या उसे छिपाने की कोशिश करता है, तो भारत उसका सटीक जवाब देगा।”
यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों पर गुप्त हमले किए हैं, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा हो रही है।
🕌 पहलगाम हमला: अमरनाथ यात्रा पर हमला नहीं, भारत की आत्मा पर प्रहार
राजनाथ सिंह का यह कड़ा रुख 8 जून को पहलगाम में हुए उस आतंकी हमले के संदर्भ में आया है, जिसमें अमरनाथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं से भरी एक बस पर आतंकियों ने अंधाधुंध गोलियां बरसाईं थीं। इस हमले में 12 श्रद्धालु मारे गए और 24 घायल हुए थे।
हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन अल उमर मुजाहिदीन ने ली थी। भारत ने तब पाकिस्तान पर सीधे तौर पर आरोप लगाया था कि यह हमला उसकी शह पर किया गया है।
🌐 SCO की बैठकों में भारत की लगातार आक्रामकता – ‘आतंक के खिलाफ अब चुप्पी नहीं’
भारत अब SCO जैसे बहुपक्षीय मंचों पर केवल सांकेतिक विरोध या शिष्टाचारपूर्ण भाषा तक सीमित नहीं है। राजनाथ सिंह ने 2023 की SCO समिट में भी आतंकवाद के मुद्दे को उठाया था, लेकिन इस बार उनके लहजे में तीखापन, स्पष्टता और चेतावनी दोनों थी।
उन्होंने चीन, रूस, कजाखस्तान, उज्बेकिस्तान, किर्गिज़स्तान और ताजिकिस्तान जैसे सहयोगी देशों से अपील की:
“अगर हम SCO को केवल एक रणनीतिक मंच तक सीमित रखते हैं और आतंकवाद जैसे विषयों पर चुप रहते हैं, तो हम अपने कर्तव्यों से विमुख हो रहे हैं।”
🇨🇳 चीन के मंच से भारत का साहसी रुख – क्या बीजिंग असहज हुआ?
यह तथ्य भी उल्लेखनीय है कि राजनाथ सिंह ने यह बयान बीजिंग में दिया, जहाँ चीन और पाकिस्तान की नजदीकी जगजाहिर है। भारतीय विश्लेषकों का मानना है कि भारत ने जानबूझकर इस मंच का उपयोग करके यह संदेश दिया कि अब भारत कूटनीति में भी आक्रामक हो गया है।
चीन की तरफ से बैठक के दौरान कोई विशेष प्रतिक्रिया नहीं आई, लेकिन सूत्रों के मुताबिक, बैकडोर वार्ताओं में बीजिंग ने भारत की चिंता को ‘संवेदनशील लेकिन समझने योग्य’ बताया।
🧭 राजनाथ सिंह का पूरा एजेंडा: आतंकवाद, रक्षा सहयोग और सीमा पर संतुलन
अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने निम्नलिखित बिंदुओं पर ज़ोर दिया:
- सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक रणनीति
- SCO देशों के बीच रक्षा सूचना साझा करना
- कट्टरपंथ और आतंक के बीच मजबूत लिंक को पहचानना
- ड्रोन तकनीक और साइबर आतंकवाद पर संयम और नियंत्रण
उन्होंने कहा कि भारत SCO के रक्षा सहयोग ढांचे को मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन सुरक्षा के नाम पर आतंक के समर्थन को सहन नहीं करेगा।
📌 पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल का रुख – चुप्पी और कूटनीतिक असहजता
बैठक में मौजूद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने राजनाथ सिंह के बयान पर कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं दी। लेकिन उनके चेहरे के हाव-भाव और टीम के भीतर की हलचल ने संकेत दिया कि नई दिल्ली की इस आक्रामक कूटनीति ने इस्लामाबाद को असहज कर दिया है।
बाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इतना ही कहा:
“SCO एक बहुपक्षीय मंच है, जहाँ द्विपक्षीय मुद्दों को उठाना उचित नहीं।”
📈 भारत की रणनीतिक स्थिति मजबूत, वैश्विक समर्थन भी मिल रहा है
राजनाथ सिंह का यह कड़ा बयान ऐसे समय आया है जब:
- अमेरिका और फ्रांस भारत के ‘आतंक के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर’ को समर्थन दे चुके हैं
- UN में भारत की स्थिति पहले से अधिक मज़बूत हुई है
- G7 और QUAD जैसे मंचों पर भारत आतंकवाद को वैश्विक प्राथमिकता बना चुका है
- भारत अब केवल आत्मरक्षा नहीं, बल्कि ‘आक्रामक प्रतिरोध’ की नीति पर चल रहा है।
🧠 विश्लेषण: क्या SCO अब वास्तव में आतंक के खिलाफ एकजुट होगा?
राजनाथ सिंह के सख्त रुख के बावजूद, यह सवाल बना रहेगा कि क्या SCO जैसे मंच वास्तव में आतंक के खिलाफ ठोस कदम उठाएंगे या फिर यह केवल एक राजनयिक औपचारिकता बना रहेगा।
रक्षा विशेषज्ञ ब्रिगेडियर अनिल मेहता (से.नि.) कहते हैं:
“भारत ने आज जो किया, वो कूटनीतिक साहस है। अब यह SCO की परीक्षा है कि वो आतंकवाद के खिलाफ कितना ईमानदार है।”
🇮🇳 निष्कर्ष: आतंक के खिलाफ अब भारत की आवाज़ गूंज रही है, वह भी चीन की धरती से
राजनाथ सिंह की यह चीन यात्रा केवल एक औपचारिक प्रतिनिधित्व नहीं थी, बल्कि यह एक स्पष्ट और सशक्त संदेश था — भारत अब चुप नहीं रहेगा।
पहलगाम में मारे गए श्रद्धालुओं की चिताओं से उठता धुआं अब बीजिंग की हवाओं में भी गूंज रहा है। भारत ने बता दिया है कि राजनीति चाहे जो हो, आतंकवाद के मुद्दे पर वह किसी समझौते के लिए तैयार नहीं है।
