प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस आयोजन को वैश्विक एकता का प्रतीक क्षण बताते हुए कहा कि आज दुनिया भर में करोड़ों लोग योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बना रहे हैं, जो राष्ट्र, भाषा और संस्कृति की सीमाओं को पार कर रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को 11वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर विश्व को एक बार फिर ‘योग के माध्यम से शांति और संतुलन’ का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक संघर्षों और तनावों के बीच योग ही वह माध्यम है जो दुनिया को एकजुट रख सकता है और तनाव को संतुलन में बदल सकता है।
इस वर्ष का योग दिवस थीम था – “Yoga for Unity, Peace and Resilience”। दुनिया के 180 से अधिक देशों में करोड़ों लोगों ने इस आयोजन में भाग लिया, जिनमें संयुक्त राष्ट्र, वेटिकन, यूरोपीय संघ, अफ्रीकी संघ, एशियाई देशों और खाड़ी क्षेत्र के प्रतिनिधि विशेष रूप से शामिल रहे।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा – “आज की दुनिया को योग की सबसे अधिक ज़रूरत है”
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा:
“जब दुनिया युद्ध, संघर्ष, तनाव और अस्थिरता से जूझ रही है, तब योग एक ऐसा मार्ग है जो हमें भीतर से शांत करता है और बाहर की अशांति से लड़ने की शक्ति देता है।”
उन्होंने आगे कहा:
“योग अब एक वैश्विक आंदोलन बन चुका है। यह राष्ट्र, भाषा, रंग, जाति या धर्म नहीं देखता। यह मनुष्य की आत्मा से जुड़ता है और उसे प्रकृति के साथ जोड़ता है। यही इसकी सबसे बड़ी शक्ति है।”
विश्वभर में लाखों लोगों की भागीदारी
संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय से लेकर हिमालय की वादियों और न्यूयॉर्क के सेंट्रल पार्क से लेकर अफ्रीका के गांवों तक, योग दिवस 2025 के आयोजनों में दुनिया भर में अनुमानित 25 करोड़ लोगों ने भाग लिया।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी न्यूयॉर्क में आयोजित एक सामूहिक योग कार्यक्रम में भाग लिया और कहा:
“भारत ने योग के माध्यम से दुनिया को आत्म-संयम और आंतरिक शांति का रास्ता दिखाया है।”
वेटिकन सिटी में पहली बार योग दिवस आधिकारिक रूप से मनाया गया, जिसमें 120 से अधिक पादरियों और धार्मिक नेताओं ने भाग लिया।
अफगानिस्तान, इजरायल, फिलिस्तीन, रूस और यूक्रेन में भी सीमित संसाधनों और संकटों के बावजूद सामूहिक योग आयोजन किए गए।
भारत में 75,000 से अधिक केंद्रों पर आयोजन, राजधानी दिल्ली बना केंद्रबिंदु
भारत में योग दिवस को जन अभियान के रूप में मनाया गया। दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित केंद्रीय कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने हजारों लोगों के साथ योग किया। इस दौरान आयुष मंत्रालय, पतंजलि, आर्ट ऑफ लिविंग और रामकृष्ण मिशन जैसी संस्थाओं के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
प्रधानमंत्री के साथ दिल्ली में मौजूद अन्य प्रमुख हस्तियां:
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह
योगगुरु बाबा रामदेव
अभिनेत्री श्रद्धा कपूर और अभिनेता अक्षय कुमार
“बंदूक नहीं, बंद आंखों में है शांति का रास्ता” – मोदी का संदेश दुनियाभर में वायरल
प्रधानमंत्री मोदी के इस बयान ने विशेष रूप से ध्यान खींचा:
“आज विश्व को ये समझना होगा कि बंदूकें शांति नहीं ला सकतीं। वह शक्ति एकाग्रता, समरसता और आत्मनियंत्रण में है – और ये सब योग से संभव है।”
यह कथन सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और कई अंतरराष्ट्रीय नेताओं व बुद्धिजीवियों ने इसका समर्थन किया।
भारत की विदेश नीति में ‘योग डिप्लोमेसी’ की भूमिका
मोदी सरकार के आने के बाद से भारत ने ‘योग डिप्लोमेसी’ को एक प्रभावशाली सांस्कृतिक हथियार के रूप में प्रस्तुत किया है। संयुक्त राष्ट्र में 2014 में प्रधानमंत्री मोदी के प्रस्ताव पर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को 21 जून को मनाने की मंजूरी मिली थी, जिसे 177 देशों का समर्थन मिला था – यह UN के इतिहास में किसी प्रस्ताव को मिला सबसे तेज़ और सर्वाधिक समर्थन है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, योग अब भारत की सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी का एक प्रमुख स्तंभ बन चुका है। 2025 में भारत के सभी 198 दूतावासों में विशेष आयोजन किए गए और योग प्रशिक्षकों को विदेशों में भेजा गया।
राज्यों में भव्य आयोजन, गिनीज रिकॉर्ड बनाने की होड़
भारत के विभिन्न राज्यों ने भी योग दिवस को बड़े धूमधाम से मनाया:
उत्तराखंड में 25,000 लोगों ने गंगा किनारे एकसाथ योग किया
राजस्थान के कोटा में 1.2 लाख छात्रों ने एकसाथ योग कर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया
बिहार के बोधगया में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध योग शिविर का आयोजन हुआ
केरल में समुद्र तटों पर योग सत्रों ने सैलानियों का ध्यान खींचा
डॉक्टरों और वैज्ञानिकों ने भी माना – योग है तनाव और मानसिक रोगों का इलाज
AIIMS, ICMR और अन्य चिकित्सा संस्थानों द्वारा प्रस्तुत रिसर्च में यह स्पष्ट किया गया कि:
नियमित योग से ब्लड प्रेशर और शुगर नियंत्रण में लाभ मिलता है
डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसे मानसिक विकारों में योग अत्यंत प्रभावी
कोविड के बाद की रिकवरी में योग ने रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई
AIIMS के वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. एन.के. मिश्रा ने कहा:
“योग अब सिर्फ आध्यात्मिक अभ्यास नहीं, एक चिकित्सा पद्धति बन चुका है। इसे वैज्ञानिक रूप से अपनाने की ज़रूरत है।”
- PM मोदी के नेतृत्व में योग का वैश्विक आंदोलन कैसे बना?
2014 से अब तक योग दिवस की यात्रा: - 2015: पहला योग दिवस, राजपथ पर 35,000 लोगों की भागीदारी
- 2016: चंडीगढ़ में पीएम मोदी की अगुआई में योग
- 2018: देहरादून से पीएम मोदी का संदेश
- 2023: संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय की छत पर मोदी का ऐतिहासिक योग सत्र
- 2025: योग दिवस की वैश्विक भागीदारी 250 मिलियन के पार
न्यूजीलैंड से नाइजीरिया तक – योग की गूंज
कुछ उल्लेखनीय वैश्विक आयोजन:
- न्यूजीलैंड: सूर्य उदय के समय समुद्र तट पर हजारों की भागीदारी
- नाइजीरिया: मिलिट्री स्कूल में योग प्रशिक्षण शुरू
- फ्रांस: एफिल टावर के नीचे योग सत्र
- चीन: शंघाई में भारतीय वाणिज्य दूतावास द्वारा भव्य आयोजन
विपक्ष की प्रतिक्रिया: राजनीतिकरण नहीं हो योग का
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने योग दिवस की सराहना की लेकिन साथ ही यह भी कहा:
“योग भारत की धरोहर है। इसका राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। इसे सभी धर्मों और विचारधाराओं से ऊपर रखा जाना चाहिए।”
वहीं, AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसे “संवैधानिक अधिकार के रूप में व्यक्तिगत चुनाव” करार दिया।
निष्कर्ष: योग – भारत का तोहफ़ा, विश्व के लिए समाधान
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2025 केवल एक आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह भारत की ओर से दुनिया को दिया गया एक ऐसा तोहफ़ा बन चुका है जो तनाव, अवसाद, संघर्ष और असंतुलन से जूझ रहे समाज को एक नया मार्ग दिखा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी का यह स्पष्ट संदेश कि “अब शांति के लिए योग को ही साधन बनाना होगा”, न केवल भारत की आध्यात्मिक नेतृत्व की भूमिका को पुष्ट करता है, बल्कि बदलती भू-राजनीतिक स्थिति में भारत को एक शांतिदूत राष्ट्र के रूप में स्थापित करता है।
