यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत ने हाल ही में अपनी वैश्विक आतंकवाद विरोधी मुहिम को संपन्न किया है और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पाकिस्तान द्वारा आतंकवादी संगठनों को पनाह देने की भूमिका एक बार फिर से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बेनकाब हुई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी7 समिट में हिस्सा लेने के लिए सोमवार देर रात कनाडा पहुंच गए। इस बहुप्रतीक्षित दौरे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक हलचल मचा दी है। ऑपरेशन सिंदूर के ऐतिहासिक सफल समापन और भारत की वैश्विक आतंकवाद विरोधी कूटनीति के बाद यह पहला बड़ा मौका है जब मोदी अंतरराष्ट्रीय मंच पर खुलकर आतंकवाद के मुद्दे पर भारत की बात रखने जा रहे हैं।
कनाडा में गर्मजोशी से हुआ स्वागत
पीएम मोदी के टोरंटो पहुंचने पर कनाडाई अधिकारियों और भारतीय मूल के प्रवासियों ने उनका भव्य स्वागत किया। हाथों में भारतीय तिरंगा और “वंदे मातरम्” के नारों के साथ सैकड़ों भारतीय समुदाय के लोग एयरपोर्ट पर एकत्र हुए थे। कनाडा की सरकार ने भी सुरक्षा और सम्मान के लिहाज़ से उच्चतम प्रोटोकॉल लागू किया है।
जी7 समिट का एजेंडा: भारत की कूटनीतिक चालें
जी7 समिट का प्रमुख एजेंडा इस बार वैश्विक सुरक्षा, आतंकवाद से लड़ाई, क्लाइमेट चेंज और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर केंद्रित है। भारत, हालांकि जी7 का स्थायी सदस्य नहीं है, लेकिन उसे एक “स्पेशल इनवाइटेड कंट्री” के तौर पर बुलाया गया है। इससे साफ है कि वैश्विक मंचों पर भारत की प्रतिष्ठा और प्रभाव लगातार बढ़ा है।
प्रधानमंत्री मोदी का प्रमुख फोकस इस बार वैश्विक आतंकवाद पर भारत की “जीरो टॉलरेंस” नीति को मजबूती से पेश करना और पाकिस्तान की दोहरी नीति को उजागर करना है।
ऑपरेशन सिंदूर की गूंज जी7 में भी
भारत में हाल ही में संपन्न हुआ ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ एक निर्णायक कदम था। इस ऑपरेशन ने न केवल भारत की सुरक्षा एजेंसियों की क्षमता को दर्शाया, बल्कि यह भी साबित किया कि भारत अब सिर्फ प्रतिक्रिया नहीं देगा, बल्कि रणनीतिक रूप से हमला भी करेगा।
जी7 समिट में प्रधानमंत्री मोदी इस ऑपरेशन का जिक्र करके यह बताने जा रहे हैं कि भारत आतंकवाद के विरुद्ध सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए लड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार, पीएम मोदी पाकिस्तान द्वारा आतंकवादी संगठनों को दी जा रही पनाह का मुद्दा भी सीधे तौर पर उठाएंगे।
बिलेटरल बैठकों का सिलसिला: अमेरिका, फ्रांस, जापान के साथ अहम मुलाकातें
पीएम मोदी इस समिट के इतर कई द्विपक्षीय बैठकों में हिस्सा लेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जापानी प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा और ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक के साथ उनकी बैठकें तय मानी जा रही हैं।
इन बैठकों में भारत के लिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, क्लीन एनर्जी, और रक्षा सहयोग पर बातचीत होगी। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बिंदु रहेगा – आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति।
पाकिस्तान पर घेरा सख्त, लेकिन रणनीतिक
मोदी सरकार पिछले एक वर्ष से पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर घेरने की कूटनीति पर काम कर रही है। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) हो या यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल – भारत ने हर मंच पर पाकिस्तान की भूमिका को उजागर किया है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद दुनिया के कई देशों ने यह मान लिया है कि पाकिस्तान की ज़मीन आतंकवादियों के लिए स्वर्ग बनी हुई है।
अब कनाडा में जी7 समिट के जरिए भारत पाकिस्तान को एक और बड़ा झटका देने की तैयारी में है। अगर मोदी जी अपने भाषण में आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकता की बात करते हुए पाकिस्तान का नाम लेते हैं, तो यह इस्लामाबाद के लिए एक कूटनीतिक आपदा होगी।
भारत की ‘नारी शक्ति’ और लोकतंत्र की मिसाल भी होगी पेश
मोदी सरकार जी7 में न केवल सुरक्षा और आतंकवाद की बात करेगी, बल्कि भारत की “नारी शक्ति” को भी एक उदाहरण के तौर पर प्रस्तुत करने जा रही है। ऑपरेशन सिंदूर में महिला अफसरों की भूमिका, भारत में महिला आरक्षण कानून, और ग्रामीण महिलाओं की डिजिटल सशक्तिकरण की कहानियां इस मंच पर शेयर की जाएंगी।
इसके अलावा भारत में हाल ही में सम्पन्न हुए आम चुनावों को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की जीत के तौर पर प्रस्तुत किया जाएगा।
कनाडा से तनाव के बीच रिश्तों को नया मोड़
यह दौरा उस वक्त हो रहा है जब भारत-कनाडा रिश्तों में खटास देखी गई थी। खालिस्तान समर्थकों की गतिविधियों को लेकर भारत ने कई बार कनाडा को चेतावनी दी थी। हालांकि हाल के हफ्तों में दोनों देशों के बीच बैकचैनल बातचीत और उच्चस्तरीय संवाद के संकेत मिले हैं।
पीएम मोदी की मौजूदगी कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के लिए भी एक अवसर है कि वे संबंधों को सुधारने की कोशिश करें। यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों नेताओं की आपसी बातचीत होती है या नहीं।
जी7 में भारत की भागीदारी: ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना
भारत अब वैश्विक राजनीति का एक निर्णायक केंद्र बन चुका है। यूक्रेन-रूस युद्ध हो या इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष, हर मसले पर भारत की राय मायने रखती है। जी7 समिट में भारत की भागीदारी “वसुधैव कुटुम्बकम्” यानी पूरी दुनिया एक परिवार है – इस विचारधारा को सशक्त रूप से आगे बढ़ाएगी।
प्रधानमंत्री मोदी अपनी स्पीच में यह संदेश भी देंगे कि दुनिया को सिर्फ सैन्य शक्ति नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों और सहयोग से ही चलाया जा सकता है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, जलवायु परिवर्तन से संघर्ष और तकनीकी समावेश – यही भारत के तीन प्रमुख एजेंडा हैं।
निष्कर्ष: आतंक के खिलाफ वैश्विक जंग में भारत का बिगुल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा न केवल भारत की वैश्विक छवि को और मजबूत करेगा, बल्कि यह भी दिखाएगा कि भारत अब सिर्फ क्षेत्रीय ताकत नहीं रहा, बल्कि वह एक वैश्विक नीति निर्धारक बन चुका है। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और पाकिस्तान की पोल खुलने के बाद अब भारत की आतंकवाद पर नीति को नजरअंदाज करना किसी भी देश के लिए संभव नहीं।
जी7 समिट के मंच से अगर मोदी पाकिस्तान का नाम लेकर वैश्विक चेतावनी जारी करते हैं, तो यह इस्लामाबाद के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलगाव का कारण बन सकता है। और यही भारत की असली कूटनीतिक विजय होगी।
