सात चरणों वाले इस मिशन की पहली दो टीमें, जिनमें विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद शामिल हैं, अब अबू धाबी और टोक्यो में सक्रिय हैं।

भारत ने एक बार फिर पूरी दुनिया को यह जता दिया है कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी “ज़ीरो टॉलरेंस” नीति सिर्फ़ शब्दों की बाज़ीगरी नहीं, बल्कि ज़मीन पर उतर कर किए गए ठोस कदमों की गवाही है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत सरकार ने अपने कूटनीतिक मोर्चे को तेज़ करते हुए ऑल पार्टी डेलिगेशन को वैश्विक राजधानियों की ओर रवाना किया है। इस मिशन का उद्देश्य है – पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद की असलियत को दुनिया के सामने बेनकाब करना और यह दिखाना कि भारत किसी भी हालत में अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा।
यूएई में गूंजा ऑपरेशन सिंदूर का संदेश
भारतीय ऑल पार्टी डेलिगेशन सबसे पहले पहुँचा संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी, जहाँ भारत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान की जमीन से संचालित आतंकवादी संगठन केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र के लिए खतरा हैं। भारत के प्रतिनिधिमंडल में बीजेपी, कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके, बीजेडी और अन्य दलों के वरिष्ठ नेता शामिल थे, जिन्होंने वहां के संसद सदस्यों, विदेश मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों के साथ गहन चर्चा की।
यूएई के अधिकारियों को ऑपरेशन सिंदूर की डिटेल्स, उपग्रह चित्र और पाकिस्तानी सेना और ISI की संलिप्तता के ठोस प्रमाण सौंपे गए। भारतीय पक्ष ने बताया कि किस तरह 22 अप्रैल को हुए पहलगाम हमले के बाद भारत ने सिर्फ 22 मिनट में दुश्मन के 9 ठिकाने तबाह कर दिए और इसमें कोई आम नागरिक नहीं मारा गया। यह एक “सटीक, स्मार्ट और संदेश देने वाला” अभियान था।
जापान में सुरक्षा सहयोग की नई इबारत
इसके बाद डेलिगेशन जापान पहुँचा, जहाँ टोक्यो में प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा के शीर्ष सलाहकारों से मुलाकात हुई। जापान पहले ही भारत के साथ इंडो-पैसिफिक रणनीति में सहयोग बढ़ा रहा है, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद उसकी समझ और स्पष्ट हुई कि दक्षिण एशिया में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का खात्मा आवश्यक है।
जापानी सांसदों को यह भी जानकारी दी गई कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI किस प्रकार भारत में सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स, यूट्यूबर्स और एजुकेशनल संस्थानों के माध्यम से जासूसी नेटवर्क चला रही है। ताज़ा उदाहरण के तौर पर यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा का केस भी सामने रखा गया, जो पाकिस्तानी एजेंट्स से संपर्क में थी।
एकता का वैश्विक प्रदर्शन
यह पहली बार है कि भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर अपने राजनीतिक मतभेदों को पीछे रखकर एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साझा रुख पेश किया है। बीजेपी से लेकर कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों तक, सभी ने संयुक्त रूप से ऑपरेशन सिंदूर के पीछे भारत की सुरक्षा नीति को समर्थन दिया।
इस प्रयास का उद्देश्य न केवल वैश्विक समर्थन जुटाना है, बल्कि पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाना भी है, ताकि वह FATF की निगरानी सूची से बाहर निकलने की बजाय, अपने अंदर झांक कर यह समझे कि आतंक के रास्ते का अंजाम विनाश ही है।
सोशल मीडिया पर गूंज
ऑपरेशन सिंदूर और इस डिप्लोमैटिक ड्राइव को लेकर सोशल मीडिया पर भी जमकर चर्चा हो रही है। हैशटैग #SindoorGoesGlobal और #IndiaVsTerror कई दिनों से ट्विटर ट्रेंड कर रहे हैं। लोग प्रधानमंत्री मोदी की रणनीति की सराहना कर रहे हैं और साथ ही विपक्षी नेताओं के इस पहल में शामिल होने को एक सकारात्मक बदलाव मान रहे हैं।
पाकिस्तान की बौखलाहट
भारत की इस अंतरराष्ट्रीय पहल से पाकिस्तान में हड़कंप मच गया है। ISPR (पाकिस्तानी सेना का मीडिया विंग) ने एक बयान में कहा कि “भारत फर्जी नैरेटिव फैलाकर पाकिस्तान को बदनाम कर रहा है।” लेकिन भारत की तरफ़ से इसे हास्यास्पद करार दिया गया। रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “सच को फर्जी कहना उसी की निशानी है जो अपराधी है। हमारे पास सबूत हैं, शब्द नहीं।”
भविष्य की रणनीति
भारत का यह कूटनीतिक अभियान केवल यूएई और जापान तक सीमित नहीं है। ऑल पार्टी डेलिगेशन अगली कुछ हफ्तों में अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका समेत 32 देशों की यात्रा करेगा। हर मुलाकात में ऑपरेशन सिंदूर के बारे में जानकारी दी जाएगी, सबूत दिखाए जाएंगे और संयुक्त कार्रवाई की माँग की जाएगी।
निष्कर्ष
ऑपरेशन सिंदूर के सैन्य पक्ष ने जहां दुश्मन को चेताया, वहीं इसका कूटनीतिक विस्तार दुनिया को यह बताने के लिए है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ केवल अकेला नहीं लड़ेगा, बल्कि एक वैश्विक गठजोड़ के माध्यम से इस कैंसर को जड़ से खत्म करेगा। पाकिस्तान को अब यह समझ लेना चाहिए कि न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया अब उसकी चालों को समझ चुकी है और अब उसकी झूठी कहानियों पर कोई विश्वास नहीं करता।
