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“अगर आतंकी पाकिस्तान में हैं, तो वहीं मारेंगे”: विदेश मंत्री जयशंकर का करारा वार, ऑपरेशन सिंदूर की गूंज अंतरराष्ट्रीय मंचों तक

पहलगाम हमले से पहले, पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ने कश्मीर मुद्दे को फिर से उछालते हुए उसे पाकिस्तान की “शरीयान नस” (जुगुलर वेन) बताया था। उन्होंने दो-राष्ट्र सिद्धांत का समर्थन करते हुए यह दावा किया कि पाकिस्तानी “हिंदुओं से अलग” हैं।

भारत की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा पर विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने एक बार फिर स्पष्ट शब्दों में देश की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का परिचय देते हुए पाकिस्तान को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है। उन्होंने कहा, “अगर आतंकवादी पाकिस्तान में हैं, तो भारत उन्हें वहीं जाकर मारेगा।” यह बयान उस समय आया है जब पूरी दुनिया में ऑपरेशन सिंदूर की चर्चा हो रही है — वह साहसी सैन्य कार्रवाई जिसमें भारत ने अप्रैल 22 को पहलगाम हमले के जवाब में महज 22 मिनट में पाकिस्तान के भीतर 9 आतंकी शिविरों को तबाह कर दिया।

आतंक के खिलाफ भारत का नया रुख
डॉ. जयशंकर, जो कि अपनी स्पष्टवादिता और ठोस कूटनीतिक शैली के लिए प्रसिद्ध हैं, ने कहा कि भारत अब उन दिनों से काफी आगे बढ़ चुका है जब सीमापार से हमला होने पर जवाब देने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहानुभूति का इंतजार किया जाता था। उन्होंने जोर देकर कहा, “अब भारत आतंक के खिलाफ proactive (सक्रिय) नीति अपनाता है, जिसमें इंतजार नहीं, एक्शन प्राथमिकता है।”

ऑपरेशन सिंदूर: आतंक के खिलाफ भारत की सैन्य दृढ़ता
22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी। इस हमले के तुरंत बाद, भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत एयरस्ट्राइक और ड्रोन हमलों की सहायता से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और बलूचिस्तान में आतंकियों के लॉन्च पैड्स को निशाना बनाया। इस कार्रवाई ने पाकिस्तान को हिला कर रख दिया और वैश्विक मंचों पर भारत की सैन्य क्षमता और निर्णायक नेतृत्व की मिसाल पेश की।

जयशंकर ने स्पष्ट किया, “जब हमारे लोगों की जान जाती है, तो यह सिर्फ आतंक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संप्रभुता पर हमला होता है। ऐसे में हमारा उत्तर निर्णायक होगा।”

पाकिस्तान की बौखलाहट और भारत की रणनीतिक चुप्पी
पाकिस्तान ने इस ऑपरेशन के बाद संयुक्त राष्ट्र और ओआईसी में शिकायत दर्ज करवाई, लेकिन भारत ने सिर्फ इतना कहा कि यह ‘रक्षा का अधिकार’ है। जयशंकर ने कहा, “हम किसी से प्रमाण-पत्र नहीं लेंगे। आतंकवाद को खत्म करने का नैतिक और कानूनी अधिकार भारत के पास है और रहेगा।”

अंतरराष्ट्रीय समर्थन और कूटनीतिक सफलता
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने 33 देशों में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजने की घोषणा की है जो वैश्विक मंचों पर भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का समर्थन जुटाएंगे। जयशंकर ने कहा, “हम अब पीड़ित की भूमिका में नहीं रहेंगे, हम आतंक का मुंहतोड़ जवाब देने वाले राष्ट्र हैं।”

विशेष रूप से अमेरिका, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, जापान और इज़राइल ने भारत के आत्मरक्षा के अधिकार को उचित ठहराया है। वहीं संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी भारत और पाकिस्तान से ‘संयम’ बरतने की अपील की, लेकिन आतंक के मुद्दे पर भारत की स्थिति को पूरी तरह खारिज नहीं किया।

‘नए भारत’ का संदेश: आतंकवाद पर कोई सौदा नहीं
जयशंकर ने यह भी बताया कि भारत की नीति अब सिर्फ प्रतिक्रियात्मक नहीं बल्कि निवारक (preventive) है। उन्होंने कहा, “हमारी रणनीति अब यह है कि अगर कोई हमला होता है, तो उसका जवाब सीमाओं के भीतर नहीं, सीमा पार दिया जाएगा — वहां, जहां से हमला शुरू होता है।”

पाकिस्तान को दी गई चेतावनी: ठिकाना ढूंढ लो
एक शीर्ष भारतीय सैन्य अधिकारी के हवाले से जयशंकर ने कहा कि, “अगर पाकिस्तानी सेना अपने मुख्यालय को स्थानांतरित करना चाहती है तो उन्हें ऐसा गड्ढा ढूंढना होगा जिसमें वे खुद को पूरी तरह छिपा सकें। क्योंकि भारत की मिसाइल रेंज अब पूरे पाकिस्तान को कवर करती है।”

यह बयान सिर्फ सैन्य ताकत की झलक नहीं, बल्कि पाकिस्तान के लिए एक कड़ा संदेश भी है कि अब भारत किसी भी आतंकी हरकत को बर्दाश्त नहीं करेगा।

राहुल गांधी की चुप्पी पर तंज
विपक्ष की ओर से किसी बड़े समर्थन की जगह उठे सवालों पर जयशंकर ने चुटकी ली। जब राहुल गांधी ने पूछा कि “पाकिस्तान को ऑपरेशन की जानकारी कैसे लगी?” तो जयशंकर ने जवाब दिया, “राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में राजनीतिक सस्ती बयानबाजी से बचना चाहिए। यह समय एकजुटता का है, ना कि पाकिस्तान के बयानों की पुष्टि करने का।”

IMF और पाकिस्तान पर तीखा हमला
जयशंकर ने कहा कि “पाकिस्तान को IMF द्वारा दिया जाने वाला कर्ज दरअसल आतंकवाद का परोक्ष पोषण है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक पाकिस्तान आतंक के खिलाफ ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक भारत उसके किसी भी प्रकार के आर्थिक राहत पैकेज का विरोध करता रहेगा।

सोशल मीडिया पर समर्थन की बाढ़
जयशंकर के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर #HitThemWhereTheyAre और #OperationSindoor ट्रेंड करने लगे। लाखों भारतीयों ने विदेश मंत्री की नीतिगत स्पष्टता और राष्ट्रीय सुरक्षा पर उनके अडिग रुख की सराहना की।

निष्कर्ष:
विदेश मंत्री एस. जयशंकर का यह बयान केवल एक कूटनीतिक वक्तव्य नहीं, बल्कि ‘नए भारत’ की सोच, रणनीति और संकल्प का प्रतीक है। अब भारत न केवल आतंकी हमलों का जवाब देने में सक्षम है, बल्कि उन्हें शुरू होने से पहले ही समाप्त करने की नीति पर काम कर रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने जो सैन्य, कूटनीतिक और नैतिक उदाहरण प्रस्तुत किया है, वह न केवल पाकिस्तान के लिए चेतावनी है, बल्कि विश्व के उन सभी देशों के लिए भी संकेत है जो दोहरी नीति अपनाकर आतंक के खिलाफ लड़ाई में ईमानदारी नहीं दिखाते।

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Harshita Ahuja

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