ज्योति मल्होत्रा को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है और उनकी जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), खुफिया ब्यूरो (IB) और सैन्य खुफिया अधिकारियों द्वारा की जा रही है।

नूंह/नई दिल्ली, मई 2025: भारत की सुरक्षा एजेंसियों द्वारा हाल ही में गिरफ्तार की गई यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा के मामले ने देश की आंतरिक सुरक्षा के समक्ष एक नया खतरा उजागर किया है। ताज़ा जांच में यह सामने आया है कि ज्योति ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले से कुछ ही दिन पहले पाकिस्तानी अधिकारियों से संपर्क किया था। यह हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी।
हरियाणा के नूंह जिले से गिरफ्तार ज्योति ने पूछताछ के दौरान सुरक्षा एजेंसियों के सामने कबूल किया है कि वह पाकिस्तानी एजेंट्स के संपर्क में थी और उसने कुछ संवेदनशील सूचनाएं भी साझा की थीं। यह खुलासा ऐसे वक्त में हुआ है जब भारत की खुफिया एजेंसियां लगातार सोशल मीडिया पर सक्रिय संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी बढ़ा रही हैं।
📌 पहलगाम हमले से पहले PAK संपर्क: गंभीर संयोग या साजिश?
सूत्रों के मुताबिक, ज्योति मल्होत्रा ने हमले से ठीक पहले कश्मीर का दौरा किया था। पहलगाम जैसे संवेदनशील क्षेत्र में उसकी मौजूदगी ने एजेंसियों के कान खड़े कर दिए। जांच में पता चला कि कश्मीर दौरे के दौरान वह इंटरनेट के माध्यम से पाकिस्तान के एक सरकारी अधिकारी से जुड़ी हुई थी। उसके मोबाइल फोन और लैपटॉप से मिले डेटा में पाकिस्तान स्थित IP एड्रेस से बातचीत के स्पष्ट साक्ष्य मिले हैं।
इन डिजिटल ट्रेल्स के आधार पर दिल्ली, जम्मू और हरियाणा पुलिस की संयुक्त टीम ने उसे पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। पूछताछ में ज्योति ने माना कि उसने ‘कई बार’ पाकिस्तान से संवाद किया था, जिसमें ‘जानकारी साझा करने’ की बात भी उसने स्वीकारी है।
🔎 कौन है ज्योति मल्होत्रा?
ज्योति मल्होत्रा एक फुल-टाइम यूट्यूबर थी, जिसके 3 लाख से अधिक सब्सक्राइबर थे। वह स्वयं को एक “ट्रैवल और सोशल व्लॉगर” के रूप में प्रस्तुत करती थी, लेकिन अब पता चला है कि उसकी गतिविधियाँ सिर्फ कैमरे तक सीमित नहीं थीं।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, ज्योति ने कश्मीर के अलावा राजस्थान, पंजाब, और गुजरात की सीमा क्षेत्रों की कई यात्राएं कीं और वहां के सैन्य ठिकानों के पास से वीडियो शूट कर अपलोड किए। आशंका जताई जा रही है कि इनमें से कुछ वीडियो पाकिस्तान को हस्तांतरित किए गए हो सकते हैं।
🔥 Instagram अकाउंट Meta ने किया सस्पेंड
पाकिस्तान से कथित संपर्क और संवेदनशील स्थानों के वीडियो अपलोड किए जाने के बाद Meta ने ज्योति मल्होत्रा का Instagram अकाउंट सस्पेंड कर दिया है। कंपनी ने बताया कि उन्हें “राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से खतरनाक गतिविधियों” की सूचना मिली थी, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।
यह पहली बार नहीं है जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस तरह की देश-विरोधी गतिविधियाँ पाई गई हैं। लेकिन इस बार आरोपी एक भारतीय नागरिक है जो लंबे समय से इस तरह की गतिविधियों में शामिल थी — यह सबसे ज्यादा चिंता की बात है।
🧠 कबूलनामा: ‘मैंने संपर्क किया था’
जांच के दौरान पुलिस द्वारा प्रस्तुत चार्जशीट में लिखा गया है कि ज्योति ने “जानबूझकर और नियमित रूप से” पाकिस्तान के एक ISI अधिकारी से बातचीत की थी। उसने स्वीकार किया कि उसने “भारत में सैन्य मूवमेंट” और “स्थानीय विरोधों की स्थिति” के बारे में जानकारी साझा की।
हालांकि वह अब दावा कर रही है कि उसने ये जानकारियाँ ‘असावधानीवश’ साझा की थीं और उसे यह अंदाजा नहीं था कि सामने वाला व्यक्ति एक पाकिस्तानी एजेंट है। लेकिन जांच एजेंसियाँ इसे ‘सोची-समझी साजिश’ मान रही हैं।
📍 कड़ी सुरक्षा और संभावित नेटवर्क का पता लगाने में जुटी एजेंसियाँ
गृह मंत्रालय ने इस मामले को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला’ मानते हुए NIA को जांच सौंप दी है। अब जांच केवल ज्योति तक सीमित नहीं, बल्कि उसके संभावित नेटवर्क और सोशल मीडिया के माध्यम से अन्य संदिग्धों की तलाश भी की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, NIA यह भी जांच कर रही है कि क्या ज्योति मल्होत्रा ने किसी संगठन से पैसे लिए थे। उसके बैंक खाते और डिजिटल वॉलेट की ट्रांजैक्शन रिपोर्ट की गहन जांच हो रही है।
🗣️ राजनीतिक प्रतिक्रिया: ‘घुसपैठ डिजिटल होती जा रही है’
भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने इस घटना को “डिजिटल जासूसी की खतरनाक मिसाल” बताया और कहा कि यह स्पष्ट है कि भारत के खिलाफ साजिशें अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और यूट्यूब जैसे मंचों पर चल रही हैं।
वहीं कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने सरकार से सवाल किया कि आखिर ऐसी गतिविधियाँ इतनी देर तक क्यों चलती रहीं और खुफिया एजेंसियाँ पहले क्यों नहीं जागीं।
🛡️ पहलगाम हमला और संदिग्ध साजिश का धागा
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि ज्योति की गतिविधियाँ पहलगाम हमले से ठीक पहले की हैं। पहलगाम में हुए आत्मघाती हमले में 26 लोगों की जान गई थी और करीब 50 लोग घायल हुए थे। जांच एजेंसियाँ अब इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि कहीं ज्योति द्वारा साझा की गई जानकारी ने उस हमले में मदद तो नहीं पहुंचाई।
✍️ निष्कर्ष: क्या अब व्लॉगर बनेंगे नया खतरा?
ज्योति मल्होत्रा का मामला बताता है कि अब खतरा सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रहा। आज देश के भीतर डिजिटल माध्यमों से जासूसी का ऐसा जाल बुना जा रहा है, जो किसी भी आतंकी साजिश को सफल बना सकता है।
भारत सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के सामने अब यह नई चुनौती है कि वह सोशल मीडिया और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स पर भी उतनी ही निगरानी रखे, जितनी सीमा पार दुश्मनों पर रखी जाती है।
