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कोलकाता के आसमान में मंडराते ‘ड्रोन’, ममता बनर्जी ने दिए अलर्ट पर रहने के निर्देश, खुफिया एजेंसियां सतर्क

केंद्रीय सरकार ने कोलकाता में ड्रोन देखे जाने की घटना पर पश्चिम बंगाल सरकार से रिपोर्ट तलब की है। इस बीच, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य के उत्तरी हिस्से में तैनात प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को सीमा पार से होने वाले खतरों को लेकर सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।

कोलकाता, 19 मई 2025:
देश की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले कोलकाता में उस समय हड़कंप मच गया जब सोमवार की सुबह आसमान में संदिग्ध ड्रोन जैसी वस्तुएं देखी गईं। ये घटना राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ और कुछ प्रमुख सरकारी भवनों के ऊपर की बताई जा रही है। इस घटना के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अधिकारियों को तत्काल अलर्ट रहने और सुरक्षा एजेंसियों से समन्वय बनाकर निगरानी तेज़ करने के निर्देश दिए हैं।

ड्रोन या कुछ और? रहस्य बरकरार
राज्य प्रशासन के अनुसार सोमवार तड़के लगभग 5:45 बजे कुछ स्थानीय निवासियों और पुलिसकर्मियों ने हावड़ा ब्रिज और बागबाजार क्षेत्र के आसमान में “ड्रोन जैसी चमकदार वस्तुएं” देखीं। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि ये वस्तुएं न सिर्फ उड़ रहीं थीं, बल्कि कुछ मिनटों के लिए स्थिर भी रहीं।

कोलकाता पुलिस ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) और भारतीय वायुसेना को सूचित किया। फिलहाल तक इन उड़न वस्तुओं की पहचान नहीं हो सकी है, जिससे संदेह और भी गहरा गया है।

मुख्यमंत्री ने बुलाई आपात बैठक
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तुरंत उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठक बुलाई, जिसमें राज्य के गृह सचिव, डीजीपी, कोलकाता पुलिस कमिश्नर, और खुफिया एजेंसियों के अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा:

“हम कोई जोखिम नहीं ले सकते। आज देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं हो सकता। हर संदिग्ध गतिविधि पर पैनी नजर रखनी होगी।”

उन्होंने विशेष रूप से नबन्ना, विधाननगर, दमदम एयरपोर्ट, और कोलकाता पोर्ट के आस-पास के क्षेत्रों में सुरक्षा कड़ी करने के निर्देश दिए।

खुफिया एजेंसियों की एंट्री, राष्ट्रीय सुरक्षा का मसला?
खुफिया सूत्रों के मुताबिक इन उड़न वस्तुओं को लेकर केंद्र सरकार भी गंभीर है। RAW, IB और NTRO जैसी केंद्रीय एजेंसियों ने पश्चिम बंगाल सरकार से रिपोर्ट तलब की है। NIA भी इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।

कुछ एजेंसियों का संदेह है कि ये घटना पाकिस्तान या चीन द्वारा चलाए जा रहे ड्रोन निगरानी कार्यक्रम से जुड़ी हो सकती है। हाल के दिनों में जम्मू-कश्मीर और पंजाब में सीमा पार से आने वाले ड्रोन को लेकर पहले ही सतर्कता बढ़ाई गई थी।

पृष्ठभूमि: बढ़ती ड्रोन गतिविधियां और सुरक्षा चिंताएं
भारत में पिछले एक साल में ड्रोन गतिविधियों में आश्चर्यजनक वृद्धि देखी गई है। विशेषकर सीमावर्ती क्षेत्रों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों के आस-पास। BSF और सेना के अनुसार 2024 में पाकिस्तान से 310 से अधिक ड्रोन घुसपैठ के मामले सामने आए थे।

विशेषज्ञों का मानना है कि:

ड्रोन का इस्तेमाल आतंकियों को हथियार या ड्रग्स पहुँचाने में हो सकता है।

शत्रु देश द्वारा संवेदनशील इमारतों की रेकी भी कराई जाती है।

साइबर निगरानी और फोटोग्राफी के लिए भी इनका उपयोग बढ़ा है।

DRDO की टीम जांच में शामिल
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की एक टीम को भी कोलकाता भेजा गया है जो इस बात की जांच करेगी कि क्या यह घटना किसी विदेशी ड्रोन तकनीक से जुड़ी है या किसी घरेलू तत्व का प्रयास। DRDO के विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई ड्रोन बिना अनुमति के उड़ा है, तो यह सीधे तौर पर एयरस्पेस उल्लंघन और राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला बनता है।

राजनीतिक हलचल भी तेज
इस घटना को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी हलचल देखी जा रही है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कहा:

“राज्य सरकार सुरक्षा के मामलों में लापरवाही बरत रही है। यदि यह ड्रोन पाकिस्तान या किसी अन्य दुश्मन देश से आए हैं, तो यह बेहद गंभीर मसला है।”

वहीं, तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने पलटवार करते हुए कहा कि केंद्र सरकार को राज्यों के साथ समन्वय बनाकर काम करना चाहिए, न कि सिर्फ राजनीति।

आम जनता में डर का माहौल
इस रहस्यमयी ड्रोन घटना के बाद स्थानीय नागरिकों में भय का माहौल है। सोशल मीडिया पर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ लोग इसे आतंकी साजिश से जोड़ रहे हैं तो कुछ इसे अंतरिक्ष यान जैसी किसी गतिविधि से।

विशेषज्ञों की राय
साइबर और रक्षा विशेषज्ञ प्रवीण साहनी का कहना है:

“ड्रोन तकनीक जितनी तेजी से विकसित हो रही है, उतनी ही तेजी से सुरक्षा व्यवस्था को भी अपडेट करना होगा। ड्रोन से जुड़ी हर छोटी गतिविधि को गंभीरता से लेना चाहिए क्योंकि इनका उपयोग जासूसी, बम विस्फोट और डेटा चोरी के लिए किया जा सकता है।”

केंद्र से सहयोग की उम्मीद
राज्य सरकार ने केंद्र से ड्रोन निरोधक उपकरणों की माँग की है। गृह मंत्रालय ने पहले ही दिल्ली, पंजाब और जम्मू-कश्मीर को एंटी-ड्रोन तकनीक उपलब्ध कराई है। अब पश्चिम बंगाल को भी इन तकनीकों से लैस करने की मांग तेज हो गई है।

निष्कर्ष: एक चेतावनी या बड़ी साजिश की आहट?
कोलकाता में ड्रोन जैसी वस्तुओं का दिखना एक साधारण घटना नहीं मानी जा रही। ऐसे समय में जब भारत आतंकवाद, जासूसी और साइबर खतरों से जूझ रहा है, यह घटना गंभीर चिंता का विषय है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की त्वरित प्रतिक्रिया भले ही सराहनीय है, लेकिन यह घटना दर्शाती है कि भारत के महानगरों को भी अब हवाई खतरों से सतर्क रहना होगा।

अब यह देखना होगा कि जांच एजेंसियां क्या निष्कर्ष निकालती हैं—क्या यह किसी दुश्मन देश की चाल थी, या सिर्फ एक भटका हुआ नागरिक ड्रोन? लेकिन एक बात तय है, भारत अब कोई जोखिम नहीं लेना चाहता।

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Harshita Ahuja

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