हरियाणा के नूंह में पाकिस्तान समर्थित जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। यह दो दिनों के भीतर राज्य में हुई दूसरी गिरफ्तारी है। यह कार्रवाई हाल ही में तेज़ हुई देशव्यापी जासूसी रोधी अभियानों के बीच हुई है।

नूंह, हरियाणा – हरियाणा के नूंह ज़िले में देश की सुरक्षा व्यवस्था को झकझोरने वाला एक बड़ा खुलासा सामने आया है। सुरक्षा एजेंसियों ने यहां सक्रिय एक पाकिस्तानी जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए दो दिनों में दूसरी गिरफ्तारी की है। आरोपियों पर देश की सैन्य और खुफिया सूचनाएं पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई को भेजने का आरोप है। यह मामला देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता का विषय बन गया है और इसके तार जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, दिल्ली और पंजाब जैसे सीमावर्ती और संवेदनशील क्षेत्रों से जुड़ते नज़र आ रहे हैं।
पहली गिरफ्तारी से खुला राज
सूत्रों के अनुसार, पहली गिरफ्तारी 16 मई को नूंह जिले के एक गांव से हुई थी, जब खुफिया इनपुट्स के आधार पर हरियाणा पुलिस और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने एक व्यक्ति को हिरासत में लिया। पूछताछ में आरोपी ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए, जिनमें देश के सैन्य ठिकानों की तस्वीरें, सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी जानकारी और सेना की गतिविधियों से जुड़े डेटा को सोशल मीडिया के माध्यम से पाकिस्तान भेजने की बात सामने आई।
दूसरे आरोपी की गिरफ्तारी और विस्तृत जांच
पहली गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर ही एक और संदिग्ध की पहचान कर ली गई, जिसे नूंह के फिरोजपुर झिरका इलाके से गिरफ्तार किया गया। आरोपी के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों की जांच के बाद पता चला कि वह व्हाट्सएप, टेलीग्राम और इंस्टाग्राम जैसे माध्यमों से विदेशी एजेंटों के संपर्क में था। यही नहीं, उसके फोन से कुछ ऐसे दस्तावेज़ और लोकेशन डेटा मिले हैं जो सेना की गुप्त गतिविधियों से संबंधित हैं।
पाकिस्तानी हैंडलर से संपर्क और ‘हनीट्रैप’ का इस्तेमाल
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इन आरोपियों को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों द्वारा हनीट्रैप के ज़रिए फंसाया गया था। सोशल मीडिया पर फर्जी महिला प्रोफाइल बनाकर इन युवकों को बहलाया गया, उनसे दोस्ती की गई और फिर उन्हें पैसे व वीजा का लालच देकर संवेदनशील जानकारी इकट्ठा करने के लिए उकसाया गया। बताया जा रहा है कि इनमें से एक आरोपी को बिटकॉइन के रूप में भुगतान भी किया गया।
राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर
इस जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश होने के बाद भारत की केंद्रीय खुफिया एजेंसियां पूरी तरह सक्रिय हो गई हैं। एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी), रॉ (रिसर्च एंड एनालिसिस विंग), मिलिट्री इंटेलिजेंस और आईबी (इंटेलिजेंस ब्यूरो) की संयुक्त टीमें नूंह और उसके आस-पास के गांवों में छापेमारी कर रही हैं। साइबर क्राइम विशेषज्ञों की भी मदद ली जा रही है ताकि सोशल मीडिया के ज़रिए हुए संपर्कों की विस्तृत जानकारी मिल सके।
राजनीतिक हलकों में हलचल
इस घटना ने देश की राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार और हरियाणा प्रशासन पर सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही का आरोप लगाया है, जबकि सत्तारूढ़ भाजपा ने इसे सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता का परिणाम बताया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, “देश की सुरक्षा सर्वोपरि है। ऐसे किसी भी राष्ट्र-विरोधी तत्व को बख्शा नहीं जाएगा।”
पिछले वर्षों में बढ़ी है जासूसी गतिविधियां
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले 5 वर्षों में पाकिस्तान द्वारा सोशल मीडिया के ज़रिए जासूसी नेटवर्क को सक्रिय करने की घटनाएं तेज़ी से बढ़ी हैं। 2022 में राजस्थान के जैसलमेर से सेना के एक जवान को हनीट्रैप में फंसाकर गुप्त सूचनाएं लीक करने के मामले में पकड़ा गया था। इसी तरह 2023 में पंजाब और जम्मू-कश्मीर में भी ऐसे ही नेटवर्क का खुलासा हुआ था।
जमीनी हकीकत और साइबर चुनौती
नूंह जैसे संवेदनशील और सीमावर्ती ज़िलों में बेरोजगारी और शिक्षा की कमी के चलते कई युवा साइबर जाल में फंस जाते हैं। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की आईएसआई अब सोशल इंजीनियरिंग और डिजिटल प्रलोभनों के ज़रिए ऐसे नेटवर्क को बढ़ावा दे रही है। इसका सीधा मकसद भारत की सैन्य और रणनीतिक जानकारी इकट्ठा करना और आतंकवाद को बढ़ावा देना है।
अदालत में पेशी और कानूनी कार्रवाई
गिरफ्तार दोनों आरोपियों को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें 7 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि यह एक अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय जासूसी नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जिसकी जड़ें अन्य राज्यों तक फैली हुई हैं। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है।
सरकार और एजेंसियों की सतर्कता
केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को अलर्ट जारी कर सोशल मीडिया पर संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। स्कूल-कॉलेजों, साइबर कैफे और कंप्यूटर प्रशिक्षण संस्थानों को भी सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना पुलिस को देने की अपील की गई है।
निष्कर्ष: क्या सीख मिलती है इस घटना से?
नूंह में हुए इस बड़े खुलासे से स्पष्ट है कि दुश्मन देश अब पारंपरिक जासूसी तरीकों से आगे बढ़कर साइबर और डिजिटल माध्यमों से भारत की सुरक्षा को चुनौती दे रहे हैं। ऐसे में जनता, विशेषकर युवाओं को सजग और जागरूक बनाना बेहद आवश्यक हो गया है। साथ ही, सरकार और एजेंसियों को मिलकर एक व्यापक साइबर सुरक्षा नीति पर काम करना होगा, ताकि ऐसे नेटवर्क भविष्य में भारत की सीमाओं तक न पहुंच सकें।
