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जो बाइडन के कैंसर खुलासे से हिला अमेरिका: ट्रंप हुए ‘आहत’, कमला हैरिस बोलीं- ‘लड़ाका हैं राष्ट्रपति’

जो बाइडन के कैंसर खुलासे से हिला अमेरिका: ट्रंप हुए ‘आहत’, कमला हैरिस बोलीं- ‘लड़ाका हैं राष्ट्रपति’

वाशिंगटन डी.सी., 16 मई 2025 – अमेरिका की राजनीति उस समय भावनात्मक उथल-पुथल का केंद्र बन गई जब व्हाइट हाउस ने पुष्टि की कि राष्ट्रपति जो बाइडन को प्रोस्टेट कैंसर है। इस खबर ने न सिर्फ अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया को चौंका दिया। 82 वर्षीय बाइडन, जो कि पहले ही अपने स्वास्थ्य को लेकर चर्चाओं में रहते आए हैं, अब कैंसर जैसी घातक बीमारी से जूझ रहे हैं।

व्हाइट हाउस ने किया खुलासा
व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी, करीन जीन-पियरे, ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि बाइडन का हाल ही में मेडिकल चेकअप हुआ था, जिसमें प्रोस्टेट कैंसर की शुरुआती अवस्था का पता चला है। हालांकि, डॉक्टरों ने स्थिति को “कंट्रोल में” बताया है और कहा है कि ट्रीटमेंट शुरू कर दिया गया है।

“राष्ट्रपति पूरी तरह से काम करने में सक्षम हैं और देश की बागडोर पूरी तरह उनके हाथों में है।” – करीन जीन-पियरे

ट्रंप ने जताई चिंता, बोले- राजनीति बाद में, इंसानियत पहले
पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो 2024 में बाइडन से चुनाव हारने के बाद से ही आक्रामक राजनीतिक तेवर अपनाए हुए हैं, ने इस खबर पर अप्रत्याशित रूप से नरमी दिखाई। उन्होंने कहा,

“मैं राष्ट्रपति बाइडन के लिए प्रार्थना करता हूँ। राजनीति अपनी जगह है लेकिन एक इंसान की ज़िंदगी की कीमत सबसे ऊपर है। मैं इस खबर से आहत हूँ।”

ट्रंप का यह बयान न सिर्फ उनके आलोचकों को चौंकाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि अमेरिका में कुछ परिस्थितियों में राजनीति भी इंसानियत के आगे झुक जाती है।

कमला हैरिस ने कहा – “बाइडन लड़ाके हैं”
उप-राष्ट्रपति कमला हैरिस ने प्रेस से बात करते हुए कहा,

“राष्ट्रपति बाइडन ने अपने जीवन में कई बार संघर्ष किया है। कैंसर भी उनके आत्मबल के आगे हार जाएगा। वह लड़ाके हैं।”

कमला हैरिस ने यह भी बताया कि बाइडन कैंसर का इलाज करवाते हुए अपने दायित्वों को निभाते रहेंगे। वे हर रोज ब्रीफिंग ले रहे हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा से लेकर आर्थिक नीतियों तक में सक्रिय हैं।

रिपब्लिकन खेमा भी दिखा संवेदनशील
जहां राजनीतिक टकराव चरम पर रहता है, वहीं इस खबर ने कांग्रेस और सीनेट के दोनों दलों को एकजुट कर दिया। रिपब्लिकन सांसद मिच मैककोनेल ने भी ट्वीट कर कहा,

“हम राष्ट्रपति बाइडन की जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हैं। इस समय सभी को उनके लिए दुआ करनी चाहिए।”

यह पहला मौका है जब बाइडन की बीमारी ने अमेरिका के राजनीतिक टकराव को कुछ देर के लिए सस्पेंड कर दिया है।

क्या होगा 2028 के चुनावों का?
इस बीमारी के खुलासे के बाद राजनीतिक विश्लेषक यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या बाइडन 2028 के लिए तैयार होंगे? हालांकि बाइडन ने अभी तक 2028 के चुनावों को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन उनकी उम्र और अब बीमारी एक बड़ा फैक्टर बन सकती है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर ट्रीटमेंट प्रभावी होता है और बाइडन अपनी मौजूदा ऊर्जा को बनाए रखते हैं, तो वे फिर से एक मजबूत उम्मीदवार बन सकते हैं। परंतु, विपक्ष निश्चित रूप से उनके स्वास्थ्य को चुनावी मुद्दा बनाएगा।

अमेरिकी जनता में भी गूंज
बाइडन के कैंसर का खुलासा सोशल मीडिया पर ट्रेंडिंग टॉपिक बन गया है। ट्विटर पर #PrayersForBiden और #StayStrongJoe जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। लाखों लोगों ने राष्ट्रपति के लिए शुभकामनाएं भेजी हैं।

वहीं कुछ आलोचकों ने यह भी सवाल उठाए कि क्या व्हाइट हाउस को यह खबर पहले से थी और इसे जानबूझकर छिपाया गया? इस पर व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि “हमने पारदर्शिता में कोई समझौता नहीं किया है।”

क्या है प्रोस्टेट कैंसर?
प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में एक आम लेकिन गंभीर बीमारी है जो प्रोस्टेट ग्रंथि में होती है। अगर शुरुआती अवस्था में पकड़ में आ जाए, तो इसका इलाज संभव होता है। 80 की उम्र पार कर चुके व्यक्ति में यह कैंसर चुनौतीपूर्ण हो सकता है, परंतु चिकित्सा विज्ञान की उन्नति ने कई संभावनाएं खोली हैं।

बाइडन के डॉक्टरों के अनुसार, उन्हें स्टेज 1 प्रोस्टेट कैंसर है, जिसका इलाज रेडिएशन थैरेपी और हार्मोनल उपचार से किया जा रहा है।

क्या कामकाज पर पड़ेगा असर?
व्हाइट हाउस ने साफ किया है कि राष्ट्रपति रोजाना अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। वे राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की मीटिंग्स में हिस्सा ले रहे हैं और विदेश नीति, बजट, और डिफेन्स से जुड़े निर्णयों में पूरी तरह शामिल हैं।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
अमेरिका के सहयोगी देशों के नेताओं ने भी संवेदनाएं जताईं। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री रिची सुनक, फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों, और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाइडन को शुभकामनाएं भेजी हैं। मोदी ने ट्वीट किया –

“मेरे मित्र जो बाइडन के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूँ। वह ताकत और प्रेरणा के प्रतीक हैं।”

मीडिया की भूमिका
कुछ मीडिया संस्थानों ने इस बीमारी के जरिए राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की, लेकिन अधिकांश प्रतिष्ठानों ने संतुलित रिपोर्टिंग की। CNN, BBC, और The Washington Post ने इसे संवेदनशीलता के साथ कवर किया।

निष्कर्ष: जो बाइडन की लड़ाई अब निजी भी है
अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति अब न सिर्फ दुनिया के सबसे शक्तिशाली पद पर हैं, बल्कि एक व्यक्ति के तौर पर एक बेहद व्यक्तिगत लड़ाई लड़ रहे हैं। प्रोस्टेट कैंसर के खिलाफ उनकी जंग में न सिर्फ देश, बल्कि पूरी दुनिया उनके साथ खड़ी है।

राजनीतिक विरोधियों से लेकर आम नागरिकों तक, हर कोई राष्ट्रपति बाइडन के लिए दुआ कर रहा है। यह क्षण शायद अमेरिका की राजनीति में दुर्लभ मानवीय एकता का उदाहरण बन सकता है।

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Harshita Ahuja

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