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नकल में भी अकल चाहिए: पीएम मोदी की राह पर चले शरीफ, पाकिस्तान में उड़ी खिल्ली!

सीमा पर तनाव के बीच, पाकिस्तान ने ताकत दिखाने के लिए भारत की हरकतों की नकल करनी शुरू कर दी है। भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने पीएम मोदी के सैनिकों से मुलाकात और उनकी छवियों की नकल की, लेकिन उन्हें ऑनलाइन जमकर ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। यहां पांच ऐसी घटनाएं हैं जहां पाकिस्तान ने भारत की नकल करने की कोशिश की, लेकिन पूरी तरह विफल रहा।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने हाल ही में जिस तरह से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैली की हूबहू नकल की है, उसने न केवल पाकिस्तान की सियासत में हलचल मचा दी है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हालिया आतंकी हमले और भारत द्वारा शुरू किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद, शरीफ की पांच प्रमुख घोषणाओं और सार्वजनिक अपीलों ने साबित कर दिया कि पाकिस्तान अब खुद भी जानता है कि मजबूत नेतृत्व कैसा होता है — और उसकी नकल करना ही एकमात्र रास्ता बचा है।

पहला ‘मोदी स्टाइल’ कदम: ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ जैसी चेतावनी
भारत ने 2016 में उरी आतंकी हमले के बाद जिस तरह से सर्जिकल स्ट्राइक की थी, उसी की तर्ज पर शरीफ ने भी मीडिया के सामने आकर कहा कि “अगर कोई देश हमारी संप्रभुता को ललकारेगा, तो उसका करारा जवाब मिलेगा।” यह बयान सुनते ही पाकिस्तानी मीडिया में मोदी की शैली की चर्चा छिड़ गई। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या पाक सेना वास्तव में किसी ‘जवाब’ के लिए तैयार है या यह सिर्फ बयानबाज़ी है?

दूसरा कदम: ‘तिरंगा यात्रा’ की नकल — शरीफ का ‘पाक एकता मार्च’
भारत में ऑपरेशन सिंदूर के समर्थन में जब देशभर में तिरंगा यात्राएं निकाली जा रही थीं, उसी दिन शरीफ सरकार ने ‘पाक एकता मार्च’ का ऐलान कर दिया। यह मार्च इस्लामाबाद से लाहौर तक निकाला गया, जिसमें सरकारी कर्मचारी और स्कूल के बच्चे शामिल किए गए। आलोचकों का कहना है कि यह पूरी कवायद सिर्फ भारत की छवि की नकल है, असली एकता तो आतंक के खिलाफ सख्त एक्शन से दिखती है।

तीसरा कदम: ‘मन की बात’ की नकल में ‘कौम से बात’
पीएम मोदी की मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की लोकप्रियता को देखकर, शरीफ ने भी ‘कौम से बात’ नामक एक नया रेडियो संबोधन शुरू किया। हालांकि पहला एपिसोड ही सोशल मीडिया पर ट्रोल हो गया, क्योंकि उसमें शरीफ ने भारत की रणनीतियों की चर्चा ज़्यादा की, और पाकिस्तान की नीतियों की कम।

चौथा कदम: सेना के साथ सेल्फी – ‘मोदी स्टाइल’ फोटोशूट
शहबाज़ शरीफ ने सेना के जवानों के साथ खड़े होकर जो तस्वीरें ट्विटर पर साझा कीं, वे हूबहू पीएम मोदी की सीमा पर जवानों से मुलाकात की तस्वीरों से मेल खाती थीं। सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे ‘कॉपीकैट लीडरशिप’ करार दिया।

पांचवां कदम: IMF को खरी-खरी – लेकिन सिर्फ दिखावे के लिए
भारत में पीएम मोदी ने जब-जब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की संप्रभुता और आत्मनिर्भरता की बात की, तब-तब उनकी विदेश नीति को सराहा गया। लेकिन जब शरीफ ने IMF से मिलने वाले ऋण को लेकर ‘शर्तों में बदलाव’ की बात की, तो लोगों ने इसे मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘मेक इन इंडिया’ नीतियों की सस्ती नकल बताया।

पाकिस्तानी जनता का रिएक्शन: ‘हमें ओरिजिनल चाहिए, कॉपी नहीं!’
पाकिस्तान के ही एक प्रमुख अखबार Dawn ने अपने संपादकीय में लिखा, “जब आपका नेतृत्व नकल पर उतर आए, तो असली समस्याओं का हल कौन देगा?” ट्विटर पर #ModiKiNakal ट्रेंड करने लगा। कई पाकिस्तानी नागरिकों ने टिप्पणी की — “मोदी जैसा बनने से पहले मोदी जैसी नीतियां अपनाओ।” शरीफ सरकार की यह छवि अब खुद पाकिस्तानियों के लिए हंसी का विषय बन चुकी है।

भारत की प्रतिक्रिया: ‘नकल में भी अकल चाहिए’
भारत की ओर से किसी आधिकारिक टिप्पणी की आवश्यकता नहीं पड़ी, क्योंकि सोशल मीडिया और टीवी चैनलों ने इस ‘कॉपी-कैट पॉलिटिक्स’ की पोल खोल दी। रक्षा विशेषज्ञों ने भी साफ कहा कि पाकिस्तान को पहले अपनी जमीन पर पल रहे आतंकियों को खत्म करना होगा, उसके बाद ही वह किसी मोदी जैसी छवि की उम्मीद कर सकता है।

क्या यह नकल रणनीतिक है या मजबूरी?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शरीफ की यह रणनीति केवल जनता को यह दिखाने की कोशिश है कि पाकिस्तान अब भारत की तरह ‘कड़ा और स्पष्ट नेतृत्व’ चाहता है। लेकिन असल में नीतियों की ताकत और ज़मीन पर अमल करने की इच्छाशक्ति ही किसी नेता को ‘मोदी’ बनाती है। नकल करने से न ही पाकिस्तान को आतंकवाद से मुक्ति मिलेगी और न ही विश्व समुदाय में उसकी छवि सुधरेगी।

निष्कर्ष: नकली लीडरशिप से नहीं बनेगा नया पाकिस्तान
पाकिस्तान को समझना होगा कि प्रधानमंत्री मोदी की ताकत उनके स्पष्ट दृष्टिकोण, सख्त निर्णय और राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखने की नीति में है। सिर्फ उनके भाषणों और अभियानों की नकल करने से शरीफ को भारत जैसी छवि नहीं मिल सकती।

अगर पाकिस्तान वास्तव में अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत जैसी पहचान चाहता है, तो उसे सबसे पहले अपनी ज़मीन से आतंक का सफाया करना होगा, न कि उसकी नकल करके जनता को बहलाने का प्रयास।

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Harshita Ahuja

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