बुधवार को कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने कहा कि कांग्रेस 15 मई से बिहार में राज्यव्यापी ‘न्याय संवाद’ अभियान शुरू करेगी।

दरभंगा (बिहार): देश की राजनीति में शिक्षा और युवाओं के भविष्य को लेकर गरमाहट तेज हो चुकी है। आज कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बिहार के दरभंगा में ‘शिक्षा न्याय संवाद’ की शुरुआत की। इस अभियान का उद्देश्य ना सिर्फ छात्रों की आवाज़ को मंच देना है, बल्कि केंद्र सरकार की शिक्षा नीति और बेरोजगारी को लेकर उसकी विफलताओं को भी कठघरे में खड़ा करना है।
दरभंगा के राज मैदान में आयोजित इस संवाद में हजारों की संख्या में युवा, छात्र संगठन, बेरोजगार अभ्यर्थी और स्थानीय जनता ने भाग लिया। राहुल गांधी का यह कदम ऐसे समय में आया है जब देश भर में नौकरियों की कमी, परीक्षाओं में धांधली और NEET-UG जैसे विवादों ने युवाओं के बीच असंतोष को जन्म दिया है।
राहुल का कटाक्ष: “मोदी जी के राज में शिक्षा सिर्फ अमीरों के लिए!”
अपने भाषण में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा निशाना साधते हुए कहा:
“आज की सरकार ने शिक्षा को व्यापार बना दिया है। सरकारी स्कूलों और कॉलेजों की हालत बद से बदतर है, और प्राइवेट संस्थान फीस के नाम पर युवाओं को लूट रहे हैं। क्या गरीब का बच्चा अब डॉक्टर या इंजीनियर बनने का सपना नहीं देख सकता?”
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी सत्ता में आने पर एक ऐसी शिक्षा नीति लाएगी, जो सभी वर्गों के युवाओं के लिए समान अवसर सुनिश्चित करेगी।
‘शिक्षा न्याय संवाद’ क्या है?
‘शिक्षा न्याय संवाद’ कांग्रेस का एक राष्ट्रव्यापी अभियान है, जिसका लक्ष्य है युवाओं के साथ प्रत्यक्ष संवाद और उनके सवालों को संसद में ले जाना। राहुल गांधी के नेतृत्व में यह संवाद विभिन्न शहरों में आयोजित किया जाएगा, जहां छात्र अपनी समस्याओं को खुलकर रख सकेंगे। दरभंगा इसका पहला पड़ाव बना है।
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक़, इस अभियान का मकसद सिर्फ चुनावी फायदा नहीं बल्कि एक दीर्घकालिक शिक्षा आंदोलन खड़ा करना है। राहुल गांधी ने इसे “नई पीढ़ी के लिए न्याय की लड़ाई” बताया।
छात्रों के सवाल, राहुल के जवाब
संवाद के दौरान कई छात्रों ने मंच पर आकर सवाल पूछे। एक छात्रा ने पूछा, “सर, जब पेपर लीक होता है और एग्जाम कैंसिल होता है, तो हमारे साल बर्बाद हो जाते हैं। कोई जवाबदेही क्यों नहीं होती?”
राहुल गांधी ने जवाब दिया:
“इस देश में अगर एक अरबपति को नुकसान हो जाए, तो सरकार उसके लिए राहत पैकेज बना देती है। लेकिन जब लाखों छात्रों का भविष्य बर्बाद होता है, तो कोई जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता। यही अन्याय है, और इसी के खिलाफ हमारा यह अभियान है।”
NEET, UPSC और रेलवे परीक्षाओं पर भी उठाए सवाल
राहुल गांधी ने कहा कि NEET की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठे हैं, लेकिन केंद्र सरकार चुप है। उन्होंने यह भी कहा कि UPSC और रेलवे परीक्षाओं में सालों भर की मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों को अक्सर निराशा हाथ लगती है, क्योंकि सीटें कम कर दी जाती हैं या परीक्षा ही रद्द हो जाती है।
“यह सरकार चाहती है कि युवा अस्थायी नौकरी करे, ठेके पर काम करे, पेंशन का सपना देखना छोड़ दे। लेकिन कांग्रेस इस सोच को बदलना चाहती है,” राहुल ने कहा।
बिहार को क्यों चुना पहला पड़ाव?
बिहार लंबे समय से देश में शिक्षा के मुद्दों और छात्र आंदोलनों का गढ़ रहा है। जेपी आंदोलन से लेकर नीतीश-लालू की राजनीति तक, बिहार ने हमेशा छात्र राजनीति को दिशा दी है। शायद यही वजह है कि राहुल गांधी ने अपने इस राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत यहीं से की।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी 2024 के लोकसभा चुनावों में युवाओं को केंद्र में रखकर राजनीति की नई ज़मीन तैयार करना चाहते हैं, और ‘शिक्षा न्याय संवाद’ उसी रणनीति का हिस्सा है।
NDA सरकार पर निशाना: “कर्ज माफ अरबपतियों का, युवाओं को सिर्फ जुमले”
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने पिछले 10 वर्षों में 14 लाख करोड़ रुपये से अधिक के कॉरपोरेट लोन माफ किए हैं, लेकिन छात्रों के लिए स्कॉलरशिप, कोचिंग सहायता और एजुकेशन लोन पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
उन्होंने तीखे लहज़े में कहा:
“मोदी सरकार ने युवाओं से सिर्फ दो चीजें दी हैं — जुमले और जॉबलेस ग्रोथ।”
युवाओं का उत्साह, सत्तापक्ष की बेचैनी
दरभंगा के संवाद स्थल पर राहुल गांधी का भाषण सुनने आए छात्र रवि कुमार ने कहा:
“पहली बार कोई बड़ा नेता हमारे जैसे छात्रों की बात खुलकर कर रहा है। हमें लगता है कि अब हमारी आवाज़ संसद तक पहुंचेगी।”
वहीं, सत्तापक्ष भाजपा के नेताओं ने इस संवाद को “चुनावी नौटंकी” बताया है। बीजेपी के स्थानीय सांसद गोपालजी ठाकुर ने कहा कि “कांग्रेस को पहले अपने कार्यकाल में शिक्षा व्यवस्था सुधार लेनी चाहिए थी, अब दिखावा कर रहे हैं।”
अगला पड़ाव: इलाहाबाद, भोपाल और दिल्ली
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, ‘शिक्षा न्याय संवाद’ का अगला आयोजन इलाहाबाद में होगा, उसके बाद भोपाल और दिल्ली में इसका विस्तार किया जाएगा। इस क्रम में राहुल गांधी विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों और शिक्षाविदों से भी मुलाकात करेंगे।
निष्कर्ष: क्या यह संवाद कांग्रेस के लिए वोटबैंक बनेगा या सिर्फ मंच की गूंज रह जाएगा?
जहाँ एक ओर राहुल गांधी युवाओं के दिलों में जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं यह भी देखना होगा कि क्या यह संवाद वास्तविक नीति बदलाव में बदलता है या सिर्फ एक और चुनावी अभियान बनकर रह जाता है।
लेकिन एक बात तय है—इस देश के युवा अब सवाल कर रहे हैं, और उनके सवालों का जवाब हर सरकार को देना होगा।
