यह निर्णय, जो 24 जनवरी को महेश्वर में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में मंजूर किया गया, मुख्यमंत्री मोहन यादव की पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य नशामुक्ति को बढ़ावा देना और धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना है।

मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार ने राज्य के धार्मिक शहरों में शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। 24 जनवरी को महेश्वर में आयोजित राज्य कैबिनेट की बैठक में यह प्रस्ताव मंजूर किया गया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस फैसले को न केवल राज्य की धार्मिक भावनाओं के सम्मान के रूप में देखा, बल्कि इसे समाज में नशामुक्ति को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम भी बताया। इस निर्णय के तहत, मध्यप्रदेश के प्रमुख धार्मिक शहरों में शराब की बिक्री और सेवन पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव की पहल
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस निर्णय की घोषणा करते हुए कहा, “धार्मिक नगरीय क्षेत्रों में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाना समाज में शांति और समृद्धि लाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि इन क्षेत्रों में लोगों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान किया जाए और साथ ही साथ समाज में नशामुक्ति की दिशा में काम किया जाए।”
मुख्यमंत्री यादव ने यह भी कहा कि यह पहल धार्मिक स्थलों के पास शराब की दुकानों के कारण होने वाली परेशानियों को खत्म करने के उद्देश्य से की गई है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य लोगों को नशे की लत से बचाना और उन स्थानों पर विशेष ध्यान देना है, जो धार्मिक गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध हैं।
धार्मिक शहरों में शराब पर प्रतिबंध का कारण
मध्यप्रदेश में शराब पर प्रतिबंध लगाने के पीछे मुख्यमंत्री का मानना है कि नशे की लत समाज के लिए एक गंभीर समस्या बन चुकी है, और इसका प्रभाव खासकर युवाओं और धार्मिक स्थलों पर जाने वाले श्रद्धालुओं पर पड़ रहा है। मुख्यमंत्री का कहना था कि धार्मिक शहरों में शराब का सेवन न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करता था, बल्कि इससे वहां आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को भी परेशानी होती थी।
मध्यप्रदेश के धार्मिक शहरों जैसे उज्जैन, ओंकारेश्वर, महेश्वर, और अन्य पवित्र स्थानों पर शराब की दुकानों के कारण वहां के वातावरण में नकारात्मक प्रभाव पड़ा था। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन स्थानों पर धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और वातावरण को शुद्ध रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।
कैबिनेट द्वारा अनुमोदित निर्णय
24 जनवरी को महेश्वर में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव के अलावा, राज्य के अन्य वरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया। कैबिनेट बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि धार्मिक नगरीयों में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने से न केवल धार्मिक भावनाओं को सम्मान मिलेगा, बल्कि यह नशामुक्ति के अभियान में भी सहायक साबित होगा।
राज्य के गृह मंत्री ने इस दौरान कहा कि शराब पर प्रतिबंध से धार्मिक नगरीयों का वातावरण शुद्ध होगा और यहां आने वाले श्रद्धालुओं को शांति मिलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि इस फैसले का पालन सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा और अधिकारियों को निर्देश दिए जाएंगे कि वे इस निर्णय को पूरी सख्ती से लागू करें।
नशामुक्ति के लिए सरकार की अन्य पहलें
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस फैसले को राज्य सरकार की नशामुक्ति पहल का हिस्सा बताया। मध्यप्रदेश सरकार ने पहले ही राज्य में नशे की लत से निपटने के लिए कई योजनाओं की शुरुआत की है। इस संदर्भ में राज्य सरकार ने कई नशामुक्ति केंद्रों की स्थापना की है, जहां लोगों को नशे की लत से छुटकारा दिलाने के लिए उपचार और परामर्श सेवाएं दी जाती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार नशामुक्ति के लिए कार्यरत विभिन्न संस्थाओं और संगठनों के साथ मिलकर काम कर रही है और यह निर्णय इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य समाज में नशे की लत को खत्म करना और परिवारों को इससे होने वाली समस्याओं से बचाना है।
धार्मिक नगरीयों का महत्व
मध्यप्रदेश में कई धार्मिक नगरीय स्थल हैं, जो न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र हैं। उज्जैन, ओंकारेश्वर, महेश्वर, और अन्य पवित्र स्थानों पर हर साल लाखों श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। इन स्थानों का धार्मिक, सांस्कृतिक, और ऐतिहासिक महत्व है, और यहां के मंदिरों, घाटों, और धार्मिक स्थल देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
इन धार्मिक शहरों में शराब की दुकानों के कारण धार्मिक स्थलों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा था। कई बार श्रद्धालुओं ने शराब की बिक्री और सेवन के कारण होने वाली अशांति की शिकायत की थी। मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर ध्यान देते हुए कहा कि इन धार्मिक नगरीयों में शांति बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।
शराब पर प्रतिबंध का प्रभाव
मध्यप्रदेश में शराब पर प्रतिबंध का निर्णय धार्मिक शहरों में सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तनों का कारण बन सकता है। यह कदम न केवल स्थानीय निवासियों के लिए, बल्कि उन पर्यटकों के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है जो धार्मिक स्थलों पर जाने के दौरान एक शांतिपूर्ण और पवित्र वातावरण की तलाश करते हैं।
इसके अलावा, शराब पर प्रतिबंध से राज्य में नशे की लत को कम करने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से समाज में नशे की लत को कम करने के लिए जागरूकता बढ़ेगी और लोगों को इस मुद्दे पर विचार करने का अवसर मिलेगा।
विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया
वहीं, इस फैसले पर विपक्षी दलों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। कुछ विपक्षी नेताओं ने इसे चुनावी राजनीति का हिस्सा बताया और कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव इसे केवल धार्मिक मतों को आकर्षित करने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह निर्णय राज्य में आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है, क्योंकि शराब की बिक्री से राज्य को राजस्व की महत्वपूर्ण राशि मिलती है।
हालांकि, मुख्यमंत्री ने इन आरोपों को नकारते हुए कहा कि यह निर्णय समाज के भले के लिए लिया गया है और राज्य के हित में है। उन्होंने कहा कि शराब पर प्रतिबंध लगाने से न केवल धार्मिक भावनाओं का सम्मान होगा, बल्कि राज्य में स्वस्थ समाज की स्थापना की दिशा में यह एक बड़ा कदम होगा।
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश सरकार का यह निर्णय न केवल धार्मिक नगरीयों में शांति और पवित्रता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समाज में नशामुक्ति की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम भी साबित हो सकता है। मुख्यमंत्री मोहन यादव का यह कदम समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है, जिसमें न केवल धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनी रहेगी, बल्कि नशे की लत से जूझ रहे लोगों के लिए एक नई दिशा भी खुल सकती है।
हालांकि, इस निर्णय के विरोधी भी हैं, लेकिन यह साफ है कि सरकार का उद्देश्य समाज की भलाई और धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि यह निर्णय राज्य के अन्य हिस्सों में भी लागू होता है या नहीं, और इसका समाज पर क्या असर पड़ता है।