सुरक्षा बलों ने जंगल में फंसे तीन आतंकवादियों के भागने को रोकने के लिए रातभर का घेरा (कोर्डन) स्थापित किया। फंसे हुए आतंकवादियों का पता लगाने के लिए हवाई निगरानी और स्निफर डॉग्स की सहायता से सर्च ऑपरेशन को तेज कर दिया गया है।

कठुआ जिले में हाल ही में हुई मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों को पकड़ने के लिए एक बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। सुरक्षा बलों ने जंगल में फंसे तीन आतंकवादियों के भागने को रोकने के लिए रातभर का घेरा (कोर्डन) स्थापित किया है। इस ऑपरेशन में हवाई निगरानी, स्निफर डॉग्स और अन्य आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, यह ऑपरेशन पूरी तरह से आतंकवादियों के नष्ट होने या गिरफ्तार होने तक जारी रहेगा।
मुठभेड़ का घटनाक्रम
यह मुठभेड़ कठुआ जिले के एक घने जंगल में उस समय हुई जब सुरक्षा बलों ने खुफिया जानकारी के आधार पर आतंकवादियों की मौजूदगी की पुष्टि की। आतंकवादी जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकवादी संगठनों से जुड़े हुए थे और वे राज्य में बड़ी आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की योजना बना रहे थे। सुरक्षा बलों को उनके बारे में जानकारी मिलने के बाद, सेना और पुलिस ने मिलकर एक संयुक्त ऑपरेशन की शुरुआत की।
मुठभेड़ के दौरान सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों को सरेंडर करने का कई बार मौका दिया, लेकिन आतंकवादियों ने जवाबी फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन को और तेज किया और आतंकवादियों के खिलाफ मोर्चा खोला। मुठभेड़ के दौरान तीन आतंकवादी जंगल में फंस गए, जबकि बाकी को मार गिराया गया या फरार होने में सफल रहे।
रातभर का घेरा (कोर्डन) और सर्च ऑपरेशन
सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ के बाद जंगल क्षेत्र को पूरी तरह से घेर लिया। अधिकारियों का कहना है कि घेरा स्थापित करने का मुख्य उद्देश्य आतंकवादियों को भागने से रोकना था। इसके साथ ही सुरक्षा बलों ने जंगल के अंदर और आसपास के इलाकों में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया। सुरक्षा बलों ने हवाई निगरानी का इस्तेमाल करते हुए उपग्रह चित्रों और ड्रोन कैमरों से क्षेत्र की निगरानी करना शुरू किया।
साथ ही, स्निफर डॉग्स का भी इस्तेमाल किया गया है, जो आतंकवादियों की उपस्थिति का पता लगाने में मदद कर रहे हैं। डॉग्स की मदद से सर्च ऑपरेशन में तेजी आई और सुरक्षा बलों को संदिग्ध इलाकों में आतंकवादियों के छिपे होने की जानकारी मिली। अधिकारियों ने बताया कि यह ऑपरेशन अत्यधिक कठिन और संवेदनशील है, क्योंकि आतंकवादी जंगलों में छिपे हुए हैं और उनका पता लगाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है।
हवाई निगरानी और ड्रोन तकनीक
सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों की खोज के लिए हवाई निगरानी का भी सहारा लिया है। सेना और पुलिस के द्वारा ऑपरेशनल ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो जंगल के अंदर और आसपास के क्षेत्रों की वीडियो फुटेज भेजते हैं। इस फुटेज से सुरक्षा बलों को यह समझने में मदद मिल रही है कि आतंकवादी कहां छिपे हो सकते हैं और किस दिशा में भाग रहे हैं।
इसके अलावा, उपग्रह चित्रों का भी उपयोग किया जा रहा है, जिनसे इलाके की स्थिति और आतंकवादियों के संभावित ठिकानों की पहचान की जा रही है। इन आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से सुरक्षा बलों को आतंकवादियों का ट्रैक करने में काफी मदद मिल रही है, जो पहले के मुकाबले कहीं अधिक प्रभावी है।
स्निफर डॉग्स का योगदान
स्निफर डॉग्स, जिन्हें विशेष रूप से आतंकवादियों की पहचान और उनका पीछा करने के लिए प्रशिक्षित किया गया है, इस ऑपरेशन का अहम हिस्सा बन गए हैं। डॉग्स ने उन इलाकों की पहचान की जहां आतंकवादी छिपे हो सकते हैं। इन डॉग्स का उपयोग न केवल उनकी स्थिति का पता लगाने के लिए किया जाता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करने के लिए कि सुरक्षा बलों को किसी भी प्रकार की अप्रत्याशित घटना का सामना न करना पड़े।
स्निफर डॉग्स के अलावा, पैट्रोलिंग दलों का भी ऑपरेशन में अहम योगदान है। इन दलों के माध्यम से जंगल के सभी हिस्सों की जांच की जा रही है, ताकि आतंकवादियों का कोई भी छिपा हुआ ठिकाना सामने आ सके।
सुरक्षा बलों की रणनीति और तैयारी
सुरक्षा बलों ने इस ऑपरेशन के लिए विशेष रणनीतियों का निर्माण किया है। सबसे पहले, क्षेत्र को पूरी तरह से घेर लिया गया है, ताकि आतंकवादी भागने में सफल न हो सकें। सुरक्षा बलों के पास आधुनिक हथियार और उपकरण हैं, जो उन्हें मुश्किल हालात में भी ऑपरेशन को जारी रखने की ताकत देते हैं। इसके अलावा, सुरंगों और गुफाओं में छिपे आतंकवादियों को खोजने के लिए विशेष उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है।
सुरक्षा बलों के अधिकारी बार-बार यह स्पष्ट कर रहे हैं कि इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य आतंकवादियों को पूरी तरह से नष्ट करना या उन्हें गिरफ्तार करना है। यह ऑपरेशन किसी भी स्थिति में सुरक्षा बलों द्वारा पूरी तरह से नियंत्रण में रखा जाएगा।
स्थानीय लोगों का सहयोग
सुरक्षा बलों को इस ऑपरेशन के दौरान स्थानीय लोगों का सहयोग भी प्राप्त हो रहा है। ग्रामीणों को सुरक्षा बलों ने पूरी स्थिति की जानकारी दी है और उनसे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना देने की अपील की है। स्थानीय लोगों ने भी सुरक्षा बलों की मदद करने का वादा किया है और किसी भी प्रकार के आतंकवादी गतिविधि की सूचना दी है।
स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा बलों से सहयोग करने के लिए गांवों में भी सतर्कता बढ़ा दी है। इसके अलावा, क्षेत्र के आसपास के स्कूलों और अन्य सार्वजनिक स्थानों को भी अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है, ताकि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
मुठभेड़ का राज्य पर असर
इस मुठभेड़ और सर्च ऑपरेशन का जम्मू-कश्मीर राज्य पर गहरा असर पड़ने की संभावना है। अधिकारियों का कहना है कि यह ऑपरेशन राज्य में आतंकवादी गतिविधियों को खत्म करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। यह ऑपरेशन यह साबित करता है कि राज्य सरकार और सुरक्षा बल आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई को जारी रखने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।
वहीं, इस ऑपरेशन के बाद राज्य सरकार ने सुरक्षा बलों को पर्याप्त संसाधन प्रदान करने का वादा किया है ताकि वे आतंकवाद के खिलाफ अपनी कार्रवाई और तेज कर सकें। इस ऑपरेशन से राज्य में नागरिकों के बीच सुरक्षा का एहसास बढ़ेगा, और उन्हें यह विश्वास होगा कि उनकी सुरक्षा के लिए सुरक्षा बल पूरी तरह से तैयार हैं।
निष्कर्ष
कठुआ मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बलों का बड़ा सर्च ऑपरेशन जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। इस ऑपरेशन के जरिए सुरक्षा बल आतंकवादियों को पूरी तरह से नष्ट करने या पकड़ने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। हवाई निगरानी, स्निफर डॉग्स और अन्य आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल इसे एक अत्यधिक प्रभावी ऑपरेशन बना रहा है।
हालांकि, यह ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण है, लेकिन सुरक्षा बलों की तत्परता और रणनीतियों के चलते उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही आतंकवादी गिरफ्तार किए जाएंगे या मारे जाएंगे। इस ऑपरेशन से यह भी संदेश जाता है कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बल आतंकवाद को खत्म करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।