भारत ने ऑपरेशन ब्रह्मा शुरू किया है, जिसके तहत नई दिल्ली ने म्यांमार को एक भयंकर भूकंप के बाद अपना समर्थन दिया है। शुक्रवार को म्यांमार में तीव्र झटके महसूस हुए, जिससे कम से कम एक हजार लोगों की मौत हो गई और देश में कई संरचनाएं क्षतिग्रस्त हो गईं।

म्यांमार में शुक्रवार को आए भयंकर भूकंप के बाद भारत ने अपनी तत्परता का परिचय देते हुए ऑपरेशन ब्रह्मा की शुरुआत की है। इस ऑपरेशन के तहत भारत ने म्यांमार को राहत और पुनर्निर्माण सहायता प्रदान करने की घोषणा की है। 7.7 तीव्रता के इस शक्तिशाली भूकंप ने म्यांमार को हिला कर रख दिया, जिसमें कम से कम 1000 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और हजारों लोग घायल हो गए हैं। मलबे में दबे लोगों को निकालने का काम जारी है, जबकि कई संरचनाएं बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई हैं। भारत ने म्यांमार के साथ अपनी एकजुटता जताते हुए इस आपदा के समय में मदद का हाथ बढ़ाया है।
भूकंप का विनाशकारी प्रभाव
म्यांमार के कई हिस्सों में शुक्रवार को भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए, जिनकी तीव्रता 7.7 थी। म्यांमार की राजधानी यंगून और अन्य बड़े शहरों में इसका जबरदस्त प्रभाव देखा गया। भूकंप के कारण कई इमारतें ढह गईं, सड़कों पर दरारें पड़ गईं, और बिजली तथा पानी की आपूर्ति भी प्रभावित हुई। बड़े पैमाने पर संपत्ति का नुकसान हुआ और कई लोग मलबे में दब गए। यह भूकंप म्यांमार के नागरिकों के लिए एक भयंकर आपदा के रूप में सामने आया।
भूकंप के कारण मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सरकार और बचाव एजेंसियां राहत कार्यों में जुटी हुई हैं, लेकिन म्यांमार में पहले से ही जारी गृहयुद्ध के कारण बचाव कार्यों में कठिनाइयाँ सामने आ रही हैं। म्यांमार में हालात पहले ही काफी नाजुक थे और अब भूकंप ने स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है।
भारत की त्वरित प्रतिक्रिया: ऑपरेशन ब्रह्मा
भारत सरकार ने म्यांमार में आई इस आपदा के बाद त्वरित प्रतिक्रिया दी और ऑपरेशन ब्रह्मा की शुरुआत की। इस ऑपरेशन के तहत भारत ने म्यांमार को राहत सामग्री भेजी है, जिसमें खाद्य सामग्री, दवाइयां, चिकित्सा उपकरण और तंबू शामिल हैं। भारतीय सेना के विशेष दल भी राहत कार्यों में सहयोग देने के लिए म्यांमार भेजे गए हैं। इसके अलावा, भारतीय सरकार ने म्यांमार को तकनीकी सहायता और विशेषज्ञों की मदद भी प्रदान करने का वादा किया है।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने म्यांमार में आए इस विनाशकारी भूकंप के बारे में ट्वीट करते हुए कहा, “भारत म्यांमार के नागरिकों के साथ इस कठिन समय में खड़ा है। हम हर संभव मदद करने के लिए तैयार हैं और ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत म्यांमार को सहायता भेजी जा रही है। हम सभी प्रभावितों के लिए प्रार्थना करते हैं।”
प्रधानमंत्री मोदी की म्यांमार के जुंटा प्रमुख से बातचीत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने म्यांमार में आए भूकंप के बाद म्यांमार के जुंटा प्रमुख मिन आंग हलिंग से फोन पर बातचीत की। इस बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने म्यांमार के नागरिकों के प्रति भारत की एकजुटता और समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने जुंटा प्रमुख से कहा कि भारत म्यांमार के साथ है और हर संभव मदद प्रदान करेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस आपदा में मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की और राहत कार्यों में तेजी लाने के लिए हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। जुंटा प्रमुख ने भारत की मदद के लिए प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद किया और कहा कि म्यांमार इस कठिन समय में भारत के समर्थन को कभी नहीं भूल पाएगा।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया
म्यांमार में आई इस आपदा के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त की हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने म्यांमार को तत्काल राहत प्रदान करने की घोषणा की और अपने अधिकारियों को राहत कार्यों के लिए भेजने का निर्णय लिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी म्यांमार में स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ाने की कोशिश की है और भारत के साथ मिलकर राहत कार्यों में भागीदारी करने की बात की है।
इसके अलावा, जापान, अमेरिका और यूरोपीय देशों ने भी म्यांमार को मदद भेजने की घोषणा की है। जापान ने अपनी टीम को म्यांमार भेजकर बचाव कार्यों में सहयोग देने की बात की है। वहीं, अमेरिका और यूरोपीय संघ ने म्यांमार को वित्तीय और चिकित्सा सहायता प्रदान करने का प्रस्ताव रखा है।
म्यांमार के नागरिकों के लिए राहत कार्यों की चुनौती
म्यांमार में चल रहे गृहयुद्ध और राजनीतिक अस्थिरता के कारण राहत कार्यों में बहुत सी चुनौतियां सामने आ रही हैं। कई इलाकों में सुरक्षा स्थिति खराब है और विद्रोही समूहों की गतिविधियों के कारण राहत सामग्री को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाना मुश्किल हो रहा है। इसके अलावा, सरकार और सेना के बीच मतभेदों के कारण समन्वय की कमी हो रही है, जिससे राहत कार्यों में देरी हो रही है।
इस पर म्यांमार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हम राहत कार्यों में तेजी लाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं, लेकिन सुरक्षा स्थिति और बुनियादी ढांचे की समस्याएं हमारी राह में रुकावट डाल रही हैं। फिर भी, हम अपनी पूरी कोशिश कर रहे हैं ताकि प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंच सके।”
भारत की भूमिका और क्षेत्रीय सहयोग
भारत ने हमेशा अपने पड़ोसी देशों के लिए राहत कार्यों में भागीदारी की है और इस भूकंप के बाद भी भारत ने म्यांमार को अपना सहयोग दिया है। भारत के इस कदम को क्षेत्रीय सहयोग और आपसी विश्वास के रूप में देखा जा रहा है। भारत और म्यांमार के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंध हैं और इस संकट के समय में भारत ने अपनी प्रतिबद्धता का परिचय दिया है।
म्यांमार में आई इस आपदा के बाद भारत का त्वरित समर्थन और मदद क्षेत्रीय सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। भारत की मदद म्यांमार के लिए एक आशा की किरण बनकर आई है, खासकर जब देश पहले ही आंतरिक संघर्षों और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है।
भारत और म्यांमार के भविष्य के संबंध
भारत और म्यांमार के रिश्ते ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से मजबूत रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, सुरक्षा, और सांस्कृतिक संबंधों में लगातार वृद्धि हो रही है। इस आपदा के बाद, म्यांमार में भारतीय सहयोग और समर्थन को और अधिक महत्व मिलेगा और भविष्य में दोनों देशों के बीच सहयोग और भी मजबूत होगा।
निष्कर्ष
म्यांमार में आए भूकंप ने देश को एक बड़े संकट में डाल दिया है, जिसमें सैकड़ों लोगों की जान गई है और कई अन्य लोग घायल हुए हैं। भारत ने ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत म्यांमार की मदद की है और इस संकट के समय में अपने पड़ोसी देश के साथ खड़ा होने का अपना संकल्प व्यक्त किया है।
भारत की मदद से म्यांमार में राहत कार्यों में गति आई है, लेकिन संकट को पूरी तरह से दूर करने में समय लगेगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय का समर्थन और भारत का नेतृत्व म्यांमार के लिए इस मुश्किल समय में बहुत महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।
भूकंप के बाद की स्थितियों से उबरने के लिए म्यांमार को हर संभव सहायता और सहयोग की आवश्यकता है, और भारत इस प्रक्रिया में अपना अहम योगदान देने के लिए तैयार है।