ममता बनर्जी ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के केलॉग कॉलेज में एक सभा को संबोधित कर रही थीं। उनका भाषण ‘सामाजिक विकास – पश्चिम बंगाल में लड़की, बालिका और महिला सशक्तिकरण’ पर था।

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, इंग्लैंड: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के केलॉग कॉलेज में एक महत्वपूर्ण सभा को संबोधित किया। उनका भाषण ‘सामाजिक विकास – लड़की, बालिका और महिला सशक्तिकरण में पश्चिम बंगाल का योगदान’ पर केंद्रित था। इस अवसर पर ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में महिलाओं के सशक्तिकरण और बच्चों के विकास के लिए किए गए कार्यों का विवरण दिया। हालांकि, उनका यह भाषण उस समय विवादों में घिर गया जब एक समूह के छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया और उनका भाषण रोकने की कोशिश की।
ममता बनर्जी का भाषण: महिलाओं का सशक्तिकरण और सामाजिक विकास
ममता बनर्जी ने अपने भाषण में कहा, “पश्चिम बंगाल में महिलाओं और लड़कियों के सशक्तिकरण के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की गई हैं। हम यह सुनिश्चित करते हैं कि हर बच्ची को शिक्षा मिले, हर महिला को समान अवसर मिले, और वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें।” उन्होंने अपनी सरकार द्वारा महिलाओं के लिए लागू की गई योजनाओं का उल्लेख किया, जैसे कि ‘केनुका योजना’ (Kanyashree Scheme) और ‘स्वाधीनता योजना’ (Swasthya Sathi Scheme), जो राज्य में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देती हैं।
ममता ने यह भी बताया कि उनकी सरकार ने महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाए हैं, ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो सकें। इसके अलावा, उन्होंने बालिका शिक्षा पर भी जोर दिया और कहा कि बंगाल में हर लड़की को शिक्षा का अधिकार मिलना चाहिए, ताकि वह समाज में बराबरी की स्थिति हासिल कर सके।
विरोध प्रदर्शन: छात्रों ने किया हंगामा
ममता बनर्जी का भाषण इस समय विवादों में फंसा जब एक समूह के छात्रों ने उनके भाषण के दौरान हंगामा शुरू कर दिया। छात्रों ने ममता बनर्जी की कुछ नीतियों और पश्चिम बंगाल सरकार के प्रशासनिक कार्यों पर सवाल उठाए। वे इस बात से असहमत थे कि ममता बनर्जी ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए जो कदम उठाए, वे पर्याप्त नहीं थे और राज्य में कई मुद्दों पर सरकार की नीतियां विफल रही हैं।
छात्रों का आरोप था कि ममता बनर्जी की सरकार ने पश्चिम बंगाल में नागरिक अधिकारों को कुचला है और मीडिया पर दबाव डालने की कोशिश की है। इसके अलावा, उन्होंने बंगाल में बढ़ते हुए राजनीतिक हिंसा और विरोधियों के खिलाफ उत्पीड़न के मुद्दों पर भी सवाल उठाए। छात्रों ने कहा कि जबकि ममता बनर्जी महिला सशक्तिकरण और सामाजिक विकास की बात करती हैं, राज्य में महिलाओं और अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है।
छात्रों के विरोध प्रदर्शन ने सभा को कुछ समय के लिए प्रभावित किया और ममता बनर्जी को अपना भाषण रोकने के लिए मजबूर किया। हालांकि, कुछ समय बाद ममता ने अपने भाषण को जारी रखा और इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “विरोध हर लोकतांत्रिक देश का हिस्सा है, लेकिन हमें यह समझना चाहिए कि हर विरोध का उद्देश्य सरकार को सुधारने और बेहतर बनाने का होता है, न कि उसे गिराने का।”
पश्चिम बंगाल में महिला सशक्तिकरण की स्थिति
ममता बनर्जी ने अपने भाषण में बंगाल में महिला सशक्तिकरण की स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने राज्य में महिला सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं लागू की हैं, जिनका उद्देश्य महिलाओं को उनकी पूरी क्षमता तक पहुंचने में मदद करना है। ‘कन्याश्री योजना’ एक ऐसी योजना है, जिसके तहत राज्य सरकार 13 वर्ष से अधिक उम्र की लड़कियों को शिक्षा प्राप्त करने और उनकी शादी को स्थगित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
इसके अलावा, ममता सरकार ने ‘स्वास्थ्य साथी योजना’ भी शुरू की है, जिसका उद्देश्य महिलाओं को स्वास्थ्य सुविधाओं तक बेहतर पहुंच प्रदान करना है। इस योजना के तहत, महिलाओं को मुफ्त चिकित्सा सेवा, दवाइयां और स्वास्थ्य जांच उपलब्ध कराई जाती है।
ममता ने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने महिलाओं के खिलाफ हिंसा को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं। राज्य में ‘महिला हेल्पलाइन’ और ‘सखी केंद्र’ स्थापित किए गए हैं, ताकि महिलाओं को अपनी समस्याओं का समाधान मिल सके। इसके अतिरिक्त, पुलिस बल में महिलाओं की संख्या बढ़ाने का भी प्रयास किया गया है।
राजनीतिक हिंसा और छात्र विरोध
ममता बनर्जी के भाषण के दौरान छात्रों का विरोध केवल महिला सशक्तिकरण के मुद्दों तक सीमित नहीं था। उन्होंने राज्य में बढ़ती हुई राजनीतिक हिंसा के खिलाफ भी आवाज उठाई। ममता बनर्जी पर आरोप है कि उनकी सरकार ने विपक्षी दलों और उनके समर्थकों के खिलाफ हिंसा और उत्पीड़न की अनुमति दी है। विरोध करने वाले छात्रों ने इस पर गंभीर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि ममता सरकार ने राज्य में लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया है।
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के इस कार्यक्रम में आए कुछ छात्र नेताओं ने ममता की आलोचना करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में एक मजबूत लोकतांत्रिक माहौल बनाने की बजाय, ममता बनर्जी ने अपने राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए प्रशासन का इस्तेमाल किया है।
ममता की प्रतिक्रिया और लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान
ममता बनर्जी ने इस विरोध प्रदर्शन के दौरान अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि, “हम लोकतंत्र में विश्वास करते हैं और हमें हर विरोध का स्वागत करना चाहिए। विरोध का अधिकार हर नागरिक को है। लेकिन यह जरूरी है कि विरोध के तरीके लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण हों।” उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य हमेशा समाज के कमजोर वर्गों, खासकर महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना है और वे इस दिशा में काम करना जारी रखेंगी।
उन्होंने यह भी कहा कि विरोध की आड़ में किसी भी प्रकार की हिंसा या उत्पीड़न को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। ममता ने छात्रों से यह भी अपील की कि वे अपनी आवाज उठाने के साथ-साथ सामाजिक मुद्दों पर समाधान के लिए रचनात्मक तरीके अपनाएं।
निष्कर्ष
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में ममता बनर्जी का भाषण और उसके दौरान हुआ विरोध इस बात का प्रतीक है कि राजनीतिक विवाद और समाजिक मुद्दे हर मंच पर उभर कर आते हैं। ममता का महिला सशक्तिकरण पर दिया गया भाषण और उनके द्वारा पश्चिम बंगाल में लागू की गई योजनाओं का महत्व अपने स्थान पर है, लेकिन उनके विरोधियों और छात्रों का यह कहना कि उनकी सरकार में कई मुद्दे हल नहीं हुए, इस पर विचार करने की आवश्यकता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र में विभिन्न विचारों और दृष्टिकोणों का सम्मान होना चाहिए। ममता बनर्जी की आलोचना के बावजूद यह स्पष्ट है कि वे महिलाओं और बच्चों के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध हैं, और उनका यह अभियान पश्चिम बंगाल के सामाजिक और राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में एक महत्वपूर्ण कदम है।