डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने भारतीय नागरिक और पोस्टडॉक्टरल फेलो, बदर खान सूरी, को हिरासत में लिया है। उन पर यह आरोप है कि वे एंटीसेमिटिज़्म फैला रहे थे और हमास से संबंध रखते थे। सूरी ने अपनी याचिका में कहा कि उन्हें उनके पत्नी के फिलिस्तीनी मूल के कारण लक्षित किया जा रहा है।

अमेरिका की डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने भारतीय नागरिक और पोस्टडॉक्टरल फेलो, बदर खान सूरी, को हिरासत में लिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने एंटीसेमिटिज़्म फैलाने के साथ-साथ हमास से संबंध बनाए और उन्हें वित्तीय और अन्य समर्थन दिया। सूरी का कहना है कि उन्हें यह सब कुछ उनके पत्नी के फिलिस्तीनी मूल के कारण लक्षित किया जा रहा है। इस घटना ने न केवल भारतीय समुदाय को प्रभावित किया है, बल्कि अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों में भी तीव्र विवाद उत्पन्न कर दिया है।
कौन हैं बदर खान सूरी?
बदर खान सूरी एक भारतीय नागरिक हैं, जिन्होंने अमेरिका में पोस्टडॉक्टरल फेलो के रूप में काम किया था। वह एक प्रसिद्ध शोधकर्ता हैं और उनके शोध कार्य ने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में योगदान दिया है। सूरी के खिलाफ जो आरोप लगाए गए हैं, वे न केवल उनके पेशेवर जीवन को प्रभावित करते हैं, बल्कि उनके व्यक्तिगत जीवन पर भी गंभीर असर डालते हैं। सूरी की पत्नी फिलिस्तीनी मूल की हैं, और यह तथ्य उनका कहना है कि उन्हें लक्षित करने का मुख्य कारण बन सकता है।
सूरी ने अपनी याचिका में यह दावा किया कि उनका नाम और कार्यों को अमेरिका की सुरक्षा एजेंसियों द्वारा उनके व्यक्तिगत जीवन के आधार पर लक्षित किया गया है। उन्होंने कहा कि उनका कोई अपराध नहीं है और उन्हें केवल उनके परिवारिक संबंधों के कारण परेशान किया जा रहा है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके खिलाफ उठाए गए आरोप राजनीति से प्रेरित हैं और उन्हें एक ऐसे समय में लक्षित किया जा रहा है, जब अंतरराष्ट्रीय राजनीति में तात्कालिक तनाव बढ़ गया है।
अमेरिकी सरकार का आरोप
अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने बदर खान सूरी पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों में मुख्य रूप से एंटीसेमिटिज़्म फैलाने और हमास से संबंध रखने का आरोप है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, सूरी ने सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफार्मों के जरिए यह विचार फैलाए थे कि इजरायल के खिलाफ हिंसा को उचित ठहराया जा सकता है और उनका समर्थन किया जाना चाहिए। इसके अलावा, अधिकारियों का कहना है कि सूरी ने हमास से संबंधित गतिविधियों के लिए वित्तीय और अन्य समर्थन प्रदान किया, हालांकि इस मामले में किसी भी प्रकार के ठोस सबूत सामने नहीं आए हैं।
अमेरिका के जस्टिस विभाग और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने कहा है कि इस मामले की जांच गहराई से की जाएगी और अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो सूरी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी कहा कि देश की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ किसी भी प्रकार की गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सूरी का बचाव
बदर खान सूरी ने अपनी गिरफ्तारी और आरोपों का विरोध किया है। उनका कहना है कि उन्हें उनके परिवार के संबंधों के कारण लक्षित किया जा रहा है। सूरी ने यह भी कहा कि उनकी पत्नी का फिलिस्तीनी मूल होने के कारण वे और उनका परिवार पिछले कई सालों से राजनीतिक दबाव का सामना कर रहे हैं। सूरी का कहना है कि उन्हें इस सबके कारण गलत तरीके से निशाना बनाया जा रहा है और वह इस मामले को अदालत में ले जाने के लिए तैयार हैं।
सूरी ने एक बयान में कहा, “मैंने कभी भी कोई ऐसी गतिविधि नहीं की है जो अमेरिका या किसी अन्य देश के कानूनों का उल्लंघन करती हो। मेरे और मेरे परिवार के खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं और मुझे लगता है कि मुझे और मेरी पत्नी को उनके परिवारिक संबंधों के कारण निशाना बनाया जा रहा है।”
सूरी ने यह भी कहा कि उनका शोध कार्य और उनका पेशेवर जीवन पूरी तरह से निष्पक्ष था, और वह हमेशा मानवाधिकारों और शांति के पक्षधर रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि वे हमेशा से ही इजरायल और फिलिस्तीन के बीच संघर्ष को शांतिपूर्ण समाधान के माध्यम से सुलझाने की वकालत करते रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और मानवाधिकार संगठन
बदर खान सूरी की गिरफ्तारी के बाद, विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इस मामले पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। इन संगठनों का कहना है कि सूरी की गिरफ्तारी में राजनीतिक हस्तक्षेप हो सकता है और यह एक प्रकार का सामूहिक दंड है, जिसे उनके व्यक्तिगत और परिवारिक संबंधों के आधार पर किया जा रहा है।
मानवाधिकार संगठन ‘अम्नेस्टी इंटरनेशनल’ ने बयान जारी करते हुए कहा, “हमने यह देखा है कि कई बार ऐसे मामलों में व्यक्तियों को उनके परिवारिक और सामाजिक संबंधों के कारण लक्ष्य बनाया जाता है, न कि किसी ठोस अपराध के आधार पर। बदर खान सूरी के मामले में भी ऐसा ही हो सकता है। हमें इस मामले की निष्पक्ष जांच की जरूरत है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सूरी के खिलाफ उठाए गए आरोप सही हैं या नहीं।”
सूरी के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर कई देशों और संगठनों ने चिंता जताई है, जिसमें भारत सरकार भी शामिल है। भारतीय अधिकारियों ने इस मामले में सूरी को पूरी तरह से न्याय दिलाने की बात कही है और अमेरिका से अपील की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो।
भारत सरकार की प्रतिक्रिया
भारत सरकार ने इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया दी है और भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह इस मामले की निगरानी कर रहा है। विदेश मंत्रालय ने कहा, “हम अपने नागरिकों की सुरक्षा और अधिकारों का सम्मान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। बदर खान सूरी के मामले में हम अमेरिकी अधिकारियों से पूरी जानकारी प्राप्त करेंगे और उचित कार्रवाई के लिए उनका समर्थन करेंगे।”
भारत सरकार ने अमेरिका से यह भी अपील की है कि वह इस मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करे और सूरी को न्याय मिले।
भविष्य की दिशा
बदर खान सूरी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच अब अमेरिका में चल रही है, और यह देखना होगा कि इस मामले में क्या निष्कर्ष निकलता है। अगर आरोप सिद्ध होते हैं, तो सूरी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन अगर आरोप निराधार साबित होते हैं, तो उन्हें जल्द ही रिहा किया जा सकता है।
इस घटना ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या अंतरराष्ट्रीय राजनीति और व्यक्तिगत संबंधों के आधार पर किसी व्यक्ति को निशाना बनाया जा सकता है? क्या यह मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं है? इस पर भी आने वाले दिनों में चर्चा हो सकती है।
निष्कर्ष
बदर खान सूरी की गिरफ्तारी और उन पर लगाए गए आरोपों ने न केवल भारतीय समुदाय, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भी चिंता का माहौल बना दिया है। इस मामले में राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप भी लगाए जा रहे हैं, और यह देखना होगा कि क्या अमेरिका की न्यायपालिका इस मामले में निष्पक्ष रूप से फैसला करेगी। फिलहाल, सूरी के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं, और उनका बचाव इस बात पर जोर दे रहा है कि उन्हें गलत तरीके से निशाना बनाया जा रहा है।
समय के साथ इस मामले में और जानकारी सामने आ सकती है, लेकिन फिलहाल यह एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय मामला बन चुका है, जिसे सभी देशों को गंभीरता से लेना होगा।