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ट्रंप और पुतिन की 2 घंटे की फोन वार्ता: कैदी विनिमय से लेकर 30 दिन के युद्धविराम तक, छुपे हुए राज़ और अहम मोड़!

पुतिन ने ट्रंप के साथ अपनी बातचीत में यह जोर देकर कहा कि यूक्रेन को सैन्य और खुफिया सहायता का पूर्ण रूप से बंद होना शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए मुख्य शर्त होनी चाहिए।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच 2 घंटे लंबी टेलीफोनिक वार्ता हुई, जो अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस बातचीत में पुतिन ने यूक्रेन संकट के समाधान के लिए अपनी शर्तें रखीं, जिनमें सबसे प्रमुख यूक्रेन को सैन्य और खुफिया सहायता पूरी तरह से बंद करने की बात शामिल थी। पुतिन का कहना था कि यही शर्त शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का मुख्य आधार हो सकती है।

ट्रंप और पुतिन के बीच वार्ता का महत्व
पुतिन और ट्रंप के बीच यह वार्ता उस समय हुई है, जब रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष तीव्र हो गया है और दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने के प्रयासों में कोई खास सफलता नहीं मिल पाई है। ऐसे में इस वार्ता को लेकर दुनिया भर के राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें केंद्रित थीं। यह वार्ता यूक्रेन संकट के समाधान के लिए एक नई दिशा को जन्म दे सकती है।

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमेशा रूस के साथ रिश्तों को सुधारने की बात की थी और उन्होंने कई बार रूस के साथ डिप्लोमेटिक संबंधों को मजबूत करने की आवश्यकता को महसूस किया है। वहीं, पुतिन ने इस बातचीत में अपनी शर्तें रखी, जो शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए अहम हो सकती हैं।

पुतिन की शर्तें: यूक्रेन को सैन्य समर्थन की समाप्ति
पुतिन ने इस बातचीत में सबसे अहम शर्त यह रखी कि यूक्रेन को सैन्य और खुफिया सहायता का पूर्ण रूप से अंत कर दिया जाए। पुतिन का मानना है कि अगर पश्चिमी देशों द्वारा यूक्रेन को यह समर्थन जारी रखा जाता है, तो शांति की कोई उम्मीद नहीं हो सकती। पुतिन ने कहा, “यूक्रेन को मिल रही सैन्य और खुफिया सहायता को पूरी तरह से बंद किया जाना चाहिए। यही शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का एकमात्र तरीका है।”

यह शर्त रूस की लंबी चली आ रही नीति का हिस्सा है, जिसमें वह हमेशा पश्चिमी देशों द्वारा यूक्रेन को दी जा रही सैन्य सहायता को अवैध और शांति प्रक्रिया के लिए खतरे के रूप में देखता है। पुतिन के अनुसार, यह सहायता केवल संघर्ष को बढ़ावा दे रही है और इसका कोई ठोस परिणाम नहीं निकलने वाला।

अमेरिका की भूमिका और ट्रंप की प्रतिक्रिया
इस वार्ता में डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी, जो पश्चिमी देशों के दृष्टिकोण से अलग नजर आई। ट्रंप ने यूक्रेन में शांति स्थापित करने के लिए रूस के साथ बातचीत की आवश्यकता पर बल दिया। हालांकि, उन्होंने इस बात का समर्थन किया कि अमेरिका को यूक्रेन को सैन्य सहायता देने के बजाय एक ऐसी रणनीति अपनानी चाहिए जिससे शांति स्थापित हो सके।

ट्रंप ने कहा, “अगर मैं राष्ट्रपति होता, तो मैं यूक्रेन और रूस के बीच वार्ता का एक मंच तैयार करता और दोनों देशों को शांति की दिशा में एक साथ लाने के लिए हर संभव प्रयास करता।” उन्होंने यह भी कहा कि यदि पश्चिमी देशों ने रूस के साथ एक मजबूत और ईमानदार वार्ता की शुरुआत की होती, तो यह संकट बहुत पहले समाप्त हो सकता था।

पुतिन की रणनीति और शांति प्रक्रिया
पुतिन के अनुसार, पश्चिमी देशों को यह समझना होगा कि रूस यूक्रेन में अपनी रणनीति को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा। उनका कहना था, “हमारी शांति प्रक्रिया तभी सफल हो सकती है जब पश्चिमी देशों द्वारा दी जा रही सहायता को पूरी तरह से समाप्त किया जाए।” पुतिन ने यह भी कहा कि रूस अपने राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की रक्षा करेगा और किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई को यूक्रेन के खिलाफ बंद नहीं करेगा, जब तक पश्चिमी देशों की दखलअंदाजी जारी रहती है।

पुतिन ने बातचीत में यह स्पष्ट किया कि वह किसी भी प्रकार की “समान और निष्पक्ष शांति प्रक्रिया” के लिए तैयार हैं, लेकिन इसमें एक महत्वपूर्ण शर्त है, जो यूक्रेन को मिलने वाली सैन्य सहायता की समाप्ति है। उनका कहना था, “यदि पश्चिमी देशों द्वारा यह समर्थन बंद नहीं किया जाता है, तो रूस के लिए युद्धविराम की स्थिति को मानना संभव नहीं होगा।”

नतीजा और वैश्विक प्रतिक्रिया
इस वार्ता के बाद, वैश्विक स्तर पर कई प्रतिक्रियाएँ सामने आईं। पश्चिमी देशों ने पुतिन की शर्तों को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया दी। कुछ देशों का कहना है कि पुतिन की यह शर्त एकतरफा है और यूक्रेन के खिलाफ रूस की आक्रामकता को बढ़ावा दे सकती है। वहीं, कुछ देशों ने इसे एक नई पहल के रूप में देखा, जो युद्धविराम और शांति की दिशा में एक कदम हो सकता है।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेन्स्की ने इस शर्त पर आपत्ति जताई और कहा कि कोई भी शांति प्रक्रिया तब तक प्रभावी नहीं हो सकती जब तक रूस यूक्रेन की संप्रभुता का सम्मान नहीं करता। ज़ेलेन्स्की ने यह भी कहा कि पश्चिमी देशों को यूक्रेन को आवश्यक सैन्य सहायता प्रदान करनी चाहिए ताकि वह अपनी रक्षा कर सके।

ट्रंप का दृष्टिकोण और भविष्य की दिशा
पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने बातचीत के बाद एक बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि यूक्रेन और रूस के बीच शांति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए गंभीर प्रयास किए जाने चाहिए। ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर वह फिर से राष्ट्रपति बने, तो वह रूस और यूक्रेन के बीच एक शांति समझौता कराने के लिए और अधिक सक्रिय रूप से काम करेंगे।

ट्रंप ने यह भी कहा कि दुनिया में शांति स्थापित करने के लिए अमेरिका को अपने पुराने दृष्टिकोण से बाहर आकर एक नई रणनीति अपनानी होगी। उनका मानना है कि अमेरिका को अब रूस के साथ सख्त लेकिन ईमानदार बातचीत करनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी संघर्ष टाला जा सके।

निष्कर्ष
पुतिन और ट्रंप के बीच हुई यह टेलीफोन वार्ता कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित रही, जिनमें यूक्रेन को मिलने वाली सैन्य सहायता की समाप्ति और शांति प्रक्रिया के लिए नई दिशा निर्धारित करना शामिल था। हालांकि, इस वार्ता से एक बात साफ हो गई कि यूक्रेन संकट का समाधान केवल सैन्य दबाव से नहीं हो सकता, बल्कि इसके लिए गंभीर डिप्लोमेटिक प्रयासों की जरूरत है।

अब देखना यह होगा कि दुनिया के अन्य शक्तिशाली देशों, खासकर पश्चिमी देशों की प्रतिक्रिया क्या होती है और क्या वे पुतिन की शर्तों को मानने के लिए तैयार होंगे या फिर यह संघर्ष इसी तरह जारी रहेगा।

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Harshita Ahuja

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