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ट्रम्प प्रशासन ने भारतीय छात्रा का वीजा रद्द किया, ‘हमास’ के समर्थन के आरोप में कोलंबिया विश्वविद्यालय में मचा हंगामा!

भारतीय छात्रा रंजनी श्रीनिवासन ने अपना वीजा ‘हमास’ का समर्थन करने के आरोप में रद्द होने के बाद CBP होम ऐप का उपयोग करते हुए स्वेच्छा से देश से बाहर कर लिया।

कोलंबिया विश्वविद्यालय की एक भारतीय पीएचडी छात्रा रंजनी श्रीनिवासन के लिए अमेरिका में अध्ययन का सपना अचानक चकनाचूर हो गया, जब ट्रम्प प्रशासन ने उनके वीजा को ‘हमास’ के समर्थन के आरोप में रद्द कर दिया। इस कदम के बाद, श्रीनिवासन ने 11 मार्च 2025 को अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा होम ऐप का उपयोग करते हुए स्वेच्छा से देश से बाहर जाने का निर्णय लिया। इस घटना ने न केवल उनकी व्यक्तिगत जिंदगी को प्रभावित किया, बल्कि अमेरिका में अध्ययनरत विदेशी छात्रों के लिए एक नया भय और अनिश्चितता का माहौल भी बना दिया है।

रंजनी श्रीनिवासन का पृष्ठभूमि
रंजनी श्रीनिवासन कोलंबिया विश्वविद्यालय में शहरी योजना में पीएचडी कर रही थीं। वह भारत के एक प्रमुख शहर से ताल्लुक रखती थीं और लंबे समय से अमेरिका में अध्ययन करने का सपना देख रही थीं। उनकी पढ़ाई में उनकी उत्कृष्टता को कई बार विश्वविद्यालय द्वारा सराहा गया था, और वह एक बुद्धिमान और समर्पित छात्रा के रूप में जानी जाती थीं।

रंजनी ने हमेशा सामाजिक न्याय, मानवाधिकार और शहरी विकास से जुड़ी मुद्दों पर गहरी चिंता व्यक्त की थी, जो उनके शोध का मुख्य विषय था। हालांकि, हाल के कुछ महीनों में उन्होंने सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे बयान दिए थे, जिनका अमेरिकी सरकार ने गंभीरता से लिया। इन बयानों में उन्होंने इजरायल के खिलाफ फिलिस्तीनी संघर्ष और कुछ कठोर राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय रखी थी। अमेरिकी सरकार का दावा था कि यह बयान ‘हमास’ जैसे आतंकवादी समूह के समर्थन में थे, हालांकि रंजनी ने इन आरोपों को हमेशा नकारा।

वीजा रद्द होने की घटना
रंजनी श्रीनिवासन का वीजा रद्द होने की प्रक्रिया एक गुप्त जांच के बाद शुरू हुई। अमेरिकी गृह विभाग और ट्रम्प प्रशासन ने इस मामले में कोई औपचारिक सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया, लेकिन सूत्रों के अनुसार, रंजनी के खिलाफ जांच के दौरान कुछ ट्वीट्स और सार्वजनिक बयानों को खंगाला गया, जो इजरायल और फिलिस्तीनी संघर्ष के संदर्भ में थे। इन बयानों के आधार पर अमेरिकी अधिकारियों ने यह निष्कर्ष निकाला कि रंजनी का समर्थन आतंकवादी संगठन ‘हमास’ के लिए था, जो अमेरिकी कानून के तहत प्रतिबंधित है।

फिर, 5 मार्च 2025 को रंजनी को एक आधिकारिक नोटिस मिला, जिसमें उनका वीजा रद्द किए जाने की जानकारी दी गई। इस नोटिस में उन्हें यह भी बताया गया कि उन्हें अमेरिका से बाहर जाने का आदेश दिया गया है और यदि वह ऐसा नहीं करतीं, तो उनका वापस जाने का अधिकार खत्म हो सकता था और भविष्य में अमेरिकी वीजा प्राप्त करना असंभव हो सकता था।

स्वेच्छा से आत्मनिर्वासन
वीजा रद्द होने के बाद रंजनी के पास दो विकल्प थे – या तो वह अमेरिकी अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करतीं या फिर वह स्वयं देश छोड़ देतीं। रंजनी ने पहले विकल्प को अस्वीकार करते हुए स्वेच्छा से आत्मनिर्वासन का निर्णय लिया। 11 मार्च 2025 को उन्होंने CBP होम ऐप के माध्यम से अपनी यात्रा की योजना बनाई और अमेरिका छोड़ने का फैसला किया। यह ऐप उन लोगों के लिए है जिनका वीजा रद्द किया गया है या जिन्होंने स्वेच्छा से देश छोड़ने का निर्णय लिया है।

रंजनी के इस निर्णय ने न केवल उनके परिवार और दोस्तों को हैरान किया, बल्कि यह पूरी तरह से शैक्षिक और राजनीतिक समुदाय में चर्चा का विषय बन गया। इस घटना ने उन विद्यार्थियों को भी सोचने पर मजबूर किया जो अमेरिका में शिक्षा प्राप्त करने के लिए आए थे, क्योंकि यह उनके लिए एक चेतावनी के रूप में सामने आया कि किसी भी प्रकार की राजनीतिक टिप्पणी और विचारधारा के कारण उनका वीजा रद्द किया जा सकता है।

विवाद और प्रतिक्रिया
रंजनी के वीजा रद्द होने पर कई पक्षों से प्रतिक्रियाएं आई हैं। विश्वविद्यालय के कुछ शिक्षकों और छात्रों ने इस निर्णय की आलोचना की है। उनका कहना था कि रंजनी का शोध और उनके विचार किसी भी तरह से आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले नहीं थे। उन्होंने कहा कि रंजनी की आलोचना केवल उनकी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर की जा रही है, न कि उनके कार्यों के आधार पर।

दूसरी ओर, अमेरिकी सरकार के समर्थन में कुछ लोग यह कह रहे हैं कि किसी भी प्रकार के आतंकवादी संगठन का समर्थन करने को बिल्कुल भी सहन नहीं किया जाना चाहिए, चाहे वह किसी भी रूप में हो। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के कदमों से अमेरिका की सुरक्षा सुनिश्चित होती है और यह सभी विदेशी छात्रों को यह संदेश देता है कि उन्हें अपनी गतिविधियों और बयानों पर सतर्क रहना चाहिए।

अमेरिकी सरकार की नीति
यह घटना उस नीति का हिस्सा प्रतीत होती है जिसे ट्रम्प प्रशासन ने अपनी सत्ता में रहते हुए लागू किया था। अमेरिकी प्रशासन का यह मानना था कि विदेशी छात्रों को अमेरिकी राजनीति और सामाजिक जीवन पर अपनी विचारधारा लागू करने का कोई अधिकार नहीं होना चाहिए, खासकर जब वे प्रतिबंधित संगठनों या आतंकवादी गतिविधियों से जुड़ी टिप्पणी करते हैं।

इसके अलावा, ट्रम्प प्रशासन ने अमेरिकी विश्वविद्यालयों में आतंकवाद और हिंसा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की घोषणा की थी, जिससे यह घटना और भी महत्वपूर्ण हो गई है। इस नीति के तहत कई विदेशी छात्रों और शैक्षिक संस्थानों को कठोर निगरानी में रखा गया था, और उनके विचारों को राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से देखा गया।

भारत की प्रतिक्रिया
भारत में रंजनी श्रीनिवासन के वीजा रद्द होने पर भारी प्रतिक्रिया हुई है। भारतीय मीडिया और राजनीतिक दलों ने इस मामले को उठाया और इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के उल्लंघन के रूप में देखा। कुछ राजनीतिक नेताओं ने इसे भारतीय छात्रों के खिलाफ अमेरिका की नीतियों का हिस्सा बताया, जबकि कुछ ने इसे केवल एक “राजनीतिक हमला” करार दिया।

भारतीय छात्रों का कहना है कि इस घटना से उनकी पढ़ाई और भविष्य पर बुरा असर पड़ सकता है। उन्होंने अमेरिका में अपनी शिक्षा के अवसरों को खतरे में देखा, क्योंकि इस घटना के बाद अन्य छात्रों को भी डर हो सकता है कि उनके विचारों के कारण उन्हें निशाना बनाया जा सकता है।

भविष्य की चुनौतियाँ
रंजनी श्रीनिवासन का मामला केवल उनकी व्यक्तिगत घटना नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा संकेत है कि अमेरिकी शैक्षिक संस्थानों में अध्ययन कर रहे विदेशी छात्रों को अब ज्यादा सतर्क रहना होगा। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि क्या विदेशी छात्रों को अपनी व्यक्तिगत विचारधारा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत राजनीतिक मुद्दों पर विचार व्यक्त करने का अधिकार होना चाहिए, या फिर यह सुरक्षा और कूटनीतिक कारणों से सीमित किया जाना चाहिए।

रंजनी के मामले ने यह भी साफ कर दिया है कि अमेरिका में शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र अब खुद को अलग-अलग सुरक्षा मुद्दों और कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए और भी ज्यादा सतर्क रखेंगे।

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Harshita Ahuja

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