प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाकुंभ मेला को ‘एकता का महायज्ञ’ बताया, और भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर में इसके महत्व पर जोर दिया। उन्होंने प्रयागराज में 2025 के महाकुंभ से पहले श्रद्धालुओं से स्वच्छता और अनुशासन बनाए रखने की अपील की।

प्रयागराज: भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता का महत्वपूर्ण प्रतीक महाकुंभ मेला हर 12 साल में आयोजित होता है, और यह न केवल धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह देश की एकता, सांस्कृतिक धरोहर और सामाजिक समरसता का भी प्रतीक बन चुका है। इस वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाकुंभ मेला को ‘एकता का महायज्ञ’ करार देते हुए इसके महत्व पर विशेष रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने श्रद्धालुओं से आगामी महाकुंभ मेला 2025 के लिए स्वच्छता और अनुशासन बनाए रखने की अपील की।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि महाकुंभ मेला भारत के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा है। यह मेला न केवल लाखों लोगों के लिए धार्मिक आस्था और विश्वास का केंद्र है, बल्कि यह भारत के विविधता में एकता की मिसाल भी प्रस्तुत करता है। इसके माध्यम से पूरी दुनिया में भारत की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक समृद्धि का संदेश जाता है।
महाकुंभ मेला: एकता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक
महाकुंभ मेला, जो हर 12 साल में आयोजित होता है, न केवल एक धार्मिक आयोजन है बल्कि यह एक बड़ा सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजन भी होता है। यह मेला प्रयागराज (पूर्व में इलाहाबाद) में गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर आयोजित होता है। यहाँ लाखों श्रद्धालु स्नान करने के लिए पहुंचते हैं, और इस दौरान विभिन्न धर्मों और पंथों के लोग एक साथ एकता और शांति का संदेश फैलाते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने महाकुंभ मेला को ‘महायज्ञ’ के रूप में स्वीकार करते हुए यह भी कहा कि यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक सामाजिक एकता का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने इस अवसर पर लोगों से अपील की कि वे महाकुंभ मेला को और भी प्रभावी और अनुशासित तरीके से मनाने में योगदान दें, ताकि यह दुनिया भर में भारत की संस्कृति का प्रभावी रूप से प्रचार कर सके।
स्वच्छता और अनुशासन का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने महाकुंभ मेला 2025 के लिए श्रद्धालुओं से स्वच्छता और अनुशासन बनाए रखने की विशेष अपील की। उन्होंने कहा कि महाकुंभ मेला केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि यह भारत की सामाजिक जिम्मेदारी का भी प्रतीक है। स्वच्छता को लेकर उनके संदेश में यह भी कहा गया कि भारत को एक स्वच्छ और सुंदर राष्ट्र बनाने की दिशा में यह महाकुंभ मेला महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से यह आग्रह किया कि वे महाकुंभ मेला के दौरान न केवल अपनी आस्था की अभिव्यक्ति करें, बल्कि स्वच्छता के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभाएं।
प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि महाकुंभ मेला सिर्फ एक पूजा-अर्चना का अवसर नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक आंदोलन बन सकता है, अगर हम इसे स्वच्छता और अनुशासन के साथ जोड़ दें। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस दौरान स्थानीय प्रशासन, सरकारी एजेंसियों और स्वयंसेवकों को मिलकर काम करना होगा ताकि मेला स्थल पर किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो और हर श्रद्धालु को शांति और सौहार्द्र के माहौल में स्नान और पूजा करने का अवसर मिले।
भारत की आध्यात्मिक धरोहर को बढ़ावा
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में भारत की अद्वितीय आध्यात्मिक धरोहर पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि महाकुंभ मेला इस बात का प्रतीक है कि भारत में आस्था, विश्वास और सद्भाव की कोई कमी नहीं है। यह मेला केवल भारत के आंतरिक विश्वास का प्रतीक नहीं, बल्कि विश्वभर में भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक ताकत का भी प्रतिनिधित्व करता है।
इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात को भी रेखांकित किया कि महाकुंभ मेला एक विश्व धरोहर के रूप में उभरा है, जो न केवल भारत के लिए बल्कि समूचे विश्व के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन बन चुका है। उन्होंने कहा कि महाकुंभ मेला न केवल एक बार का धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह हमारे पूर्वजों की धरोहर को सहेजने और उसकी सार्थकता को समर्पित करने का एक तरीका भी है।
आने वाला महाकुंभ मेला: एक नई दिशा
2025 में होने वाला महाकुंभ मेला भारत के लिए एक नई दिशा और दृष्टिकोण ला सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस मेला को भारत के आत्मविश्वास, विकास और स्वच्छता की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर बताया। उन्होंने कहा कि इस मेले को एक सकारात्मक और प्रगति की दिशा में मोड़ने के लिए हम सभी को मिलकर काम करना होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि महाकुंभ मेला न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारतीय समाज के समृद्ध और विविध सांस्कृतिक स्वरूप को प्रदर्शित करने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि हम सभी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का आयोजन हो, बल्कि यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का एक अद्भुत प्रदर्शन भी बने।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का महाकुंभ मेला को ‘एकता का महायज्ञ’ कहकर इसे भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक बनाना, केवल एक धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं बल्कि यह भारतीय समाज की सामाजिक और सांस्कृतिक शक्ति को एक नई दिशा देने का प्रयास है। उनकी अपील, जिसमें स्वच्छता और अनुशासन को महत्व दिया गया है, यह दर्शाता है कि महाकुंभ मेला अब केवल एक धार्मिक समारोह नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन बन चुका है। 2025 का महाकुंभ मेला भारतीय संस्कृति और एकता की नई मिसाल प्रस्तुत करेगा।