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लैंड-फॉर-जॉब्स घोटाले में नया मोड़, दिल्ली कोर्ट ने लालू यादव और उनके बच्चों को तलब किया!

दिल्ली कोर्ट ने लैंड-फॉर-जॉब्स घोटाले के मामले में लालू प्रसाद यादव, उनके बेटे तेजस्वी और तेजप्रताप यादव, और बेटी हेमा यादव को 11 मार्च को तलब किया है।

नई दिल्ली, 25 फरवरी: लैंड-फॉर-जॉब्स घोटाले में दिल्ली की एक अदालत ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव, उनके दोनों पुत्र तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव, और बेटी हेमा यादव को 11 मार्च को तलब किया है। यह मामला भारतीय रेलवे में भूमि के बदले नौकरी देने के आरोपों से जुड़ा हुआ है, जिसके तहत कथित रूप से बड़ी संख्या में भूमि मालिकों से जमीन लेकर रेलवे में जॉब्स देने का आरोप लगाया गया है।

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने यह आदेश हाल ही में दिए गए एक आवेदन पर दिया, जिसमें सीबीआई ने अदालत से कहा था कि इस मामले में आरोपियों के खिलाफ सुनवाई को तेज किया जाए। कोर्ट ने लालू यादव, उनके बच्चों और अन्य संबंधित लोगों को आगामी तारीख पर अदालत में पेश होने का आदेश दिया है।

लैंड-फॉर-जॉब्स घोटाले का मामला
लैंड-फॉर-जॉब्स घोटाला 2004 से 2009 तक के समय का है, जब लालू प्रसाद यादव भारतीय रेलवे के मंत्री थे। इस मामले में आरोप है कि लालू यादव और उनके परिवार ने विभिन्न व्यक्तियों से भूमि ली और इसके बदले में उन्हें रेलवे में नौकरी देने का वादा किया। सीबीआई ने आरोप लगाया है कि इस मामले में रेलवे मंत्रालय में पदस्थ अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों ने इन व्यक्तियों को नौकरी देने के लिए भूमि का आदान-प्रदान किया।

सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार, आरोपियों ने लगभग 1,000 करोड़ रुपये की संपत्ति का हेर-फेर किया। इसमें प्रमुख तौर पर पटना, रांची, दिल्ली और अन्य स्थानों पर भूमि के सौदे शामिल हैं, जिन्हें रेलवे में नौकरी देने के बदले लिया गया। इस मामले में लालू यादव के परिवार के अन्य सदस्य भी शामिल हैं, जिनमें उनके बेटे तेजस्वी और तेजप्रताप यादव, और बेटी हेमा यादव का नाम लिया गया है।

सीबीआई की जांच और आरोप
सीबीआई ने इस मामले में अगस्त 2022 में आरोपपत्र दाखिल किया था, जिसमें लालू यादव और उनके परिवार के अन्य सदस्यों को मुख्य आरोपियों के रूप में नामित किया गया था। जांच में यह पाया गया कि लालू यादव के परिवार ने रेलवे के मंत्री पद का दुरुपयोग करते हुए लगभग 12 लोगों को नौकरी देने के लिए भूमि के सौदे किए थे।

कहा गया कि इन व्यक्तियों ने रेल मंत्रालय में नौकरी हासिल करने के बदले अपनी भूमि को लालू परिवार के सदस्यों को बेच दिया। इसमें कई रियल एस्टेट सौदे, ज़मीन की खरीद-फरोख्त, और लाभार्थियों को रेलवे में अनधिकृत नियुक्तियों की पेशकश की गई। सीबीआई ने लालू यादव और उनके परिवार के खिलाफ भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के आरोप लगाए हैं।

लालू यादव और उनका परिवार
लालू प्रसाद यादव और उनका परिवार राजनीति के प्रमुख चेहरे रहे हैं। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर उनका राजनीतिक करियर काफी विवादों से भरा रहा है, और वे कई बार भ्रष्टाचार के आरोपों में घिर चुके हैं। इस मामले में भी लालू यादव और उनके परिवार के अन्य सदस्य आरोपों के घेरे में हैं।

तेजस्वी यादव, जो वर्तमान में बिहार के उपमुख्यमंत्री हैं, ने आरोपों को नकारते हुए कहा है कि यह राजनीतिक बदला लेने की कोशिश है। वहीं, तेजप्रताप यादव, जो राजद के वरिष्ठ नेता हैं, ने भी अपने ऊपर लगे आरोपों का विरोध किया है।

इसके अलावा, हेमा यादव ने भी अदालत में पेश होने के लिए समय मांगा है और उनके वकील ने कहा कि उन्हें इस मामले में कोई गलत काम नहीं किया। परिवार के सदस्य इस मामले में अपनी बेगुनाही का दावा कर रहे हैं, लेकिन अदालत की जांच और सुनवाई अभी जारी है।

कोर्ट की सुनवाई और आगामी घटनाक्रम
दिल्ली कोर्ट ने इस मामले में 11 मार्च को सुनवाई की तारीख तय की है। अदालत ने आरोपी पक्ष को यह निर्देश दिया है कि वे इस तारीख पर अदालत में पेश हों। यह मामला अब राजनीतिक हलकों में भी गर्मा गया है, क्योंकि राजद और विपक्षी दल इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित मानते हैं।

सीबीआई की जांच और अदालत की कार्रवाई पर कई राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। राजद के समर्थकों का कहना है कि यह एक साजिश है, जबकि केंद्र सरकार और अन्य विपक्षी दलों का मानना है कि आरोपियों को न्याय का सामना करना चाहिए और अगर वे निर्दोष हैं तो अदालत से राहत प्राप्त कर सकते हैं।

निष्कर्ष
लैंड-फॉर-जॉब्स घोटाला एक बड़ा और विवादास्पद मामला है, जिसमें लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए हैं। दिल्ली कोर्ट ने इस मामले में 11 मार्च को सुनवाई की तारीख तय की है, जब आरोपी परिवार के सदस्य अदालत में पेश होंगे। इस मामले की सुनवाई और जांच से यह स्पष्ट होगा कि क्या आरोप सही हैं या इसे राजनीतिक उद्देश्य के तहत उठाया गया है। फिलहाल, यह मामला भारतीय राजनीति और न्यायपालिका के लिए एक बड़ी परीक्षा बन चुका है।

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Harshita Ahuja

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