“अन्ना हजारे, जो भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान अरविंद केजरीवाल के मार्गदर्शक रहे थे, ने कहा कि आम आदमी पार्टी के प्रमुख को समाज के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए था। कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने शुक्रवार को कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में अरविंद केजरीवाल ‘अच्छा काम’ कर रहे थे, लेकिन फिर उन्होंने शराब की दुकानें खोलनी शुरू कर दीं, जिससे उन्हें विधानसभा चुनावों में ‘जनता का गुस्सा’ झेलना पड़ा।

भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में अरविंद केजरीवाल के मार्गदर्शक रहे अन्ना हजारे ने शुक्रवार को एक बड़ा बयान दिया, जिसमें उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल की नीतियों पर अपनी राय दी। अन्ना हजारे ने कहा कि केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में अच्छा काम कर रहे थे, लेकिन शराब की दुकानों को खोलने के बाद उन्हें जनता के गुस्से का सामना करना पड़ा। अन्ना हजारे ने यह भी कहा कि केजरीवाल को समाज के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए था और उन्हें अपनी नीतियों में संयम रखना चाहिए था।
केजरीवाल का काम अच्छा था, लेकिन शराब नीति ने बिगाड़ा सब कुछ
अन्ना हजारे ने केजरीवाल के कार्यकाल के दौरान उनके द्वारा किए गए कुछ सुधारों की सराहना की, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद केजरीवाल ने शराब की बिक्री की नीति को लागू किया, जिसे दिल्ली के लोगों ने नकारात्मक रूप से लिया। हजारे के अनुसार, यह कदम जनता को अस्वीकार्य था और इसके कारण उन्हें विधानसभा चुनावों में लोगों का गुस्सा झेलना पड़ा।
अन्ना हजारे ने कहा, “केजरीवाल ने दिल्ली में बहुत अच्छे काम किए थे, लेकिन शराब की दुकानों को खोलने का निर्णय लोगों को पसंद नहीं आया। यह निर्णय उनके लिए चुनावी नुकसान का कारण बना।” उन्होंने यह भी कहा कि एक नेता को समाज में उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए और उसे ऐसे कदम नहीं उठाने चाहिए, जो समाज की संवेदनाओं से मेल न खाते हों।
शराब नीति पर अन्ना हजारे की प्रतिक्रिया
अन्ना हजारे ने स्पष्ट रूप से कहा कि शराब की दुकानों का खोलना समाज के लिए हानिकारक हो सकता है। उनका मानना था कि समाज में शराब का प्रचलन बढ़ाने से न केवल समाज में अपराध बढ़ सकते हैं, बल्कि यह परिवारों पर भी बुरा प्रभाव डाल सकता है। अन्ना हजारे ने इसे दिल्ली सरकार की नासमझी का परिणाम बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को समाज के भले के लिए और अधिक जिम्मेदारी से फैसले लेने चाहिए थे।
उन्होंने केजरीवाल को सलाह दी कि उन्हें अपनी नीतियों में अधिक विचारशीलता और संयम रखना चाहिए। अन्ना ने कहा, “किसी भी सरकार के लिए यह जरूरी है कि वह जनता की भावनाओं को समझे और ऐसे फैसले न ले, जो उनके खिलाफ जाएं।”
आंदोलन के दिनों का जिक्र
अन्ना हजारे ने यह भी याद किया कि जब उन्होंने अरविंद केजरीवाल के साथ मिलकर भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था, तो उनका उद्देश्य था कि देश में एक मजबूत लोकपाल कानून बने और भ्रष्टाचार पर कड़ी कार्रवाई हो। उन्होंने कहा कि उस समय केजरीवाल का संघर्ष सच्चे उद्देश्य के लिए था और वे उम्मीद करते थे कि केजरीवाल राजनीति में आकर एक आदर्श नेता बनेंगे। हालांकि, अन्ना हजारे ने इस बात का भी उल्लेख किया कि वह समय के साथ केजरीवाल की नीतियों से असहमत होते गए, खासकर जब केजरीवाल ने शराब नीति जैसे मुद्दे उठाए।
केजरीवाल के कार्यकाल की आलोचना
अन्ना हजारे ने केजरीवाल की कार्यशैली पर भी आलोचनात्मक दृष्टिकोण रखा। उन्होंने कहा कि कई बार केजरीवाल अपने निर्णयों के बारे में बिना पूरी सोच-समझ के कदम उठाते हैं, जो बाद में जनता के लिए परेशानी का कारण बनते हैं। उन्होंने कहा कि एक नेता का कर्तव्य होता है कि वह समाज के भले के लिए काम करे, और जब किसी नीति से समाज को नुकसान हो, तो उसे उसे बदलने का साहस भी दिखाना चाहिए।
निष्कर्ष
अन्ना हजारे का यह बयान दिल्ली के राजनीतिक परिदृश्य में एक नई चर्चा का कारण बन सकता है। उन्होंने अपने अनुभव और समाज की भलाई के लिए अरविंद केजरीवाल को सलाह दी कि वह अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करें और जनहित में फैसले लें। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि केजरीवाल इस आलोचना को कैसे लेते हैं और आने वाले समय में क्या कदम उठाते हैं। अन्ना हजारे का यह बयान केवल केजरीवाल के लिए नहीं, बल्कि समग्र भारतीय राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश हो सकता है कि हर निर्णय के पीछे समाज के हित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।