सुप्रीम कोर्ट ने यूट्यूबर अशीष चंचलानी की याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिसमें उन्होंने “इंडिया गॉट लेटेंट” शो से जुड़ी उनकी कथित भूमिका को लेकर गुवाहाटी और मुंबई में दर्ज विभिन्न FIRs को एक साथ जोड़ने की मांग की थी।

यूट्यूब के मशहूर स्टार आणि कॉमेडियन अशीष चंचलानी के खिलाफ गुवाहाटी और मुंबई में अश्लीलता के आरोपों को लेकर दर्ज की गई FIRs पर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कोर्ट ने इस मामले में चंचलानी की याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिसमें उन्होंने दोनों शहरों की FIRs को एक साथ जोड़ने की मांग की थी। यह मामला उनके लोकप्रिय शो “इंडिया गॉट लेटेंट” से जुड़ा हुआ है, जिसे लेकर विवाद उत्पन्न हो गया था।
‘इंडिया गॉट लेटेंट’ शो विवाद
अशीष चंचलानी का शो “इंडिया गॉट लेटेंट” यूट्यूब पर एक लोकप्रिय कार्यक्रम था, जिसमें चंचलानी और उनकी टीम ने कॉमेडी और अभिनय के जरिए भारतीय समाज की कुछ संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा की। हालांकि, इस शो के कुछ हिस्सों को लेकर कई जगहों पर विवाद खड़ा हो गया। कार्यक्रम में अश्लीलता और सांस्कृतिक संवेदनाओं के उल्लंघन के आरोप लगाए गए, जिसके बाद गुवाहाटी और मुंबई में विभिन्न FIRs दर्ज की गईं।
इन FIRs में चंचलानी पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने शो में कुछ ऐसे अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट का प्रसारण किया, जो भारतीय समाज के सांस्कृतिक मानदंडों का उल्लंघन करता है। इसके परिणामस्वरूप, शो के खिलाफ शिकायतें दर्ज की गईं, और चंचलानी के खिलाफ पुलिस ने जांच शुरू कर दी।
अशीष चंचलानी की याचिका और सुप्रीम कोर्ट का कदम
अशीष चंचलानी ने इन FIRs को एक साथ जोड़ने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनकी याचिका में यह मांग की गई थी कि गुवाहाटी और मुंबई में दर्ज FIRs को एक साथ क्लब किया जाए, ताकि जांच और कानूनी प्रक्रिया में आसानी हो सके। चंचलानी ने कोर्ट से यह भी अनुरोध किया था कि एक ही जगह पर सुनवाई हो, ताकि उन्हें दो जगहों पर अलग-अलग मामलों के लिए उपस्थित नहीं होना पड़े।
सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर नोटिस जारी करते हुए दोनों राज्यों से जवाब मांगा है। कोर्ट ने इस मामले को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है और अब देखना यह होगा कि आगामी सुनवाई में क्या निर्णय लिया जाता है।
विवाद के सामाजिक और कानूनी पहलू
यह मामला केवल अश्लीलता के आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय समाज में कला और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर एक बड़ा सवाल उठाता है। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर आने वाली सामग्री पर समाज के विभिन्न वर्गों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं होती हैं। कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के रूप में देखते हैं, जबकि कुछ इसे समाज के नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों के खिलाफ मानते हैं।
अशीष चंचलानी जैसे यूट्यूब कंटेंट क्रिएटर्स के लिए यह चुनौतीपूर्ण समय है, क्योंकि वे अपने दर्शकों को मनोरंजन और हास्य के जरिए कंटेंट प्रस्तुत करते हैं, लेकिन कभी-कभी वह विवादों में भी फंस जाते हैं। इस मामले में, चंचलानी ने यह भी कहा था कि उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं था, और वह हमेशा अपने कंटेंट को हल्के-फुल्के और मनोरंजनपूर्ण तरीके से प्रस्तुत करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट की भूमिका
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए यह स्पष्ट किया है कि कानून का पालन हर व्यक्ति को करना होगा, चाहे वह आम नागरिक हो या यूट्यूब स्टार। हालांकि, कोर्ट ने यह भी माना कि इस प्रकार के मामलों में कलाकारों और क्रिएटर्स की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
यह मामला डिजिटल कंटेंट और सोशल मीडिया पर कानूनी रूप से बढ़ती हुई निगरानी और सेंसरशिप के मुद्दे को उजागर करता है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक इस मामले में कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है, लेकिन याचिका पर नोटिस जारी करना और दोनों FIRs को एक साथ जोड़ने का आदेश देना इस बात का संकेत है कि कोर्ट इस मामले में संवेदनशीलता के साथ विचार करेगा।
निष्कर्ष
“इंडिया गॉट लेटेंट” शो को लेकर उठे विवाद ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय डिजिटल मीडिया पर नजर रखने और उसके कंटेंट की वैधता पर सवाल उठाने की आवश्यकता है। यह भी दर्शाता है कि किस तरह से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट क्रिएटर्स को कानूनी जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है, और उनके काम को लेकर सामाजिक और कानूनी अपेक्षाएं किस तरह से बदल रही हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले में नोटिस जारी करना एक महत्वपूर्ण कदम है, और यह आगे के फैसले पर निर्भर करेगा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को किस हद तक संरक्षण मिलता है।