संसद बजट सत्र 2025: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक को संबोधित कर संसद के बजट सत्र की शुरुआत करेंगी।

भारत के महत्वपूर्ण संसद बजट सत्र 2025 की शुरुआत आज से हो रही है, जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू संसद के दोनों सदनों, लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक को संबोधित करेंगी। यह भाषण सरकार की आगामी योजनाओं और नीतियों का खाका पेश करेगा, और संसद सत्र के लिए दिशा तय करेगा।
हर साल की तरह, इस बार भी राष्ट्रपति का संबोधन संसद में सरकार की प्राथमिकताओं को उजागर करेगा। खासतौर पर आर्थिक नीतियों, राजकोषीय रणनीतियों और समाज-राजनीतिक उद्देश्यों पर चर्चा की संभावना है। राष्ट्रपति के भाषण में भारत के आर्थिक विकास की दिशा, महंगाई, बेरोजगारी और गरीबी जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किए जाने की उम्मीद है।
यह बजट सत्र वैश्विक आर्थिक अस्थिरताओं के बीच हो रहा है, जिसमें यूक्रेन युद्ध और तेल की बढ़ती कीमतें प्रमुख चुनौतियां बनी हुई हैं। ऐसे में, यह देखा जाएगा कि सरकार इन मुद्दों से कैसे निपटने की योजना बनाती है।
राष्ट्रपति के भाषण के बाद, सभी की नजरें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर होंगी, जो आज आर्थिक सर्वेक्षण 2025 पेश करेंगी। आर्थिक सर्वेक्षण, वित्त मंत्रालय द्वारा तैयार किया जाता है, और यह भारत की आर्थिक स्थिति पर एक विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है, साथ ही आने वाले साल के लिए आर्थिक पूर्वानुमान भी प्रदान करता है।
इस साल का बजट विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह राज्य चुनावों से पहले प्रस्तुत किया जा रहा है, खासकर उन राज्यों में जहां चुनावों की बड़ी भूमिका है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) चुनावी दृष्टिकोण से बजट में एक संतुलित रुख अपनाने की कोशिश करेगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बजट शहरी और ग्रामीण दोनों वर्गों की उम्मीदों को पूरा करता हो।
इस साल के बजट में मध्यम वर्ग के लिए नए कर राहत उपायों की संभावना जताई जा रही है, साथ ही कॉर्पोरेट क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के लिए भी कुछ योजनाएं पेश की जा सकती हैं। सरकार के लिए बेरोजगारी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है, और यह बजट ग्रामीण क्षेत्रों में नौकरी सृजन के उपायों पर जोर दे सकता है।
कृषि सुधार भी एक और अहम मुद्दा हो सकता है, खासकर पिछले कुछ वर्षों में किसानों द्वारा किए गए विरोधों के मद्देनजर। सरकार की योजना कृषि क्षेत्र में सुधार लाने, किसानों की आय बढ़ाने और कृषि संकट का समाधान पेश करने की हो सकती है।
इसके अलावा, इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सरकार निवेश बढ़ाने की योजना बना सकती है। भारत को वैश्विक विनिर्माण हब बनाने और निर्यात को बढ़ावा देने पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया जा सकता है।
वहीं, विपक्षी दलों जैसे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC), तृणमूल कांग्रेस (TMC) और अन्य दलों की तरफ से सरकार पर महंगाई, ईंधन की कीमतों और निजीकरण की नीति को लेकर कड़ी आलोचना की संभावना है। सत्र के पहले कुछ दिन विपक्ष की तीव्र आलोचनाओं का सामना कर सकते हैं, और सरकार के आर्थिक दृष्टिकोण पर बहस छिड़ सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस साल का बजट भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले पेश किया जा रहा है। पार्टी इस बजट के जरिए अपनी चुनावी रणनीतियों को मजबूत करने की कोशिश कर सकती है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां उसे चुनावी समर्थन की आवश्यकता है।
राष्ट्रपति के संबोधन के साथ आज से शुरू हो रहे इस बजट सत्र की निगाहें आर्थिक सर्वेक्षण और आगामी संघीय बजट पर होंगी। यह सत्र न केवल आर्थिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि देश की राजनीतिक दिशा को भी प्रभावित करेगा। इस सत्र के दौरान, आर्थिक सुधार, नौकरी सृजन, कृषि सुधार और क्षेत्रीय मुद्दों पर महत्वपूर्ण चर्चाएं होने की संभावना है।
संसद बजट सत्र 2025 अगले कुछ हफ्तों तक चलेगा, और इसके अंत में वार्षिक बजट पेश किया जाएगा, जो आने वाले वर्ष के लिए सरकार की वित्तीय रणनीति को निर्धारित करेगा। यह सत्र राजनीति, रणनीतिक गठबंधनों और तीव्र बहसों का दौर होगा। इस दौरान भारत के आर्थिक भविष्य की दिशा तय होगी।