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अर्थव्यवस्था को लगेगा एक और झटका,OPEC+ देश नवंबर से तेल उत्पादन में हर रोज करेंगे 20 लाख बैरल की कटौती

ओपेक देशों ने तेल उत्पादन में बड़ी कटौती का ऐलान किया है जिससे क्रूड में बढ़त देखने को मिली है. तेल उत्पादक देश पहले से ही संकेत दे चुके हैं कि वो क्रूड को 90 डॉलर से ऊपर बनाए रखने पर पूरा जोर दे रहे हैं.

कच्चे तेल की कीमतों में हाल में जारी गिरावट के बाद तेल कीमतों में नरमी की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है. दरअसल कीमतों में गिरावट देखते हुए ओपेक प्लस देश तेल उत्पादन में बड़ी कटौती पर राजी हो गए हैं. जिसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में बढ़त देखने को मिली है. फिलहाल ब्रेंट क्रूड बढ़त को साथ 93 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से ऊपर कारोबार कर रहा है. कटौती के इस फैसले के बाद संकेत हैं कि तेल उत्पादक देश कच्चे तेल को 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से ऊपर रखने पर ही अब अपना फोकस रखेंगे. आशंका है कि कंपनियों की लागत और बढ़ेगी और तेलकी कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है.

क्या है ओपेक देशों का फैसला

तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक और सहयोगियों (ओपेक प्लस) ने कीमतों में तेजी लाने के लिए कच्चे तेल के उत्पादन में बड़ी कटौती करने का फैसला किया है. माना जा रहा है कि यह कदम संघर्ष कर रही वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक और झटका साबित होगा. कोविड-19 महामारी की शुरुआत के बाद ओपेक गठजोड़ के वियना मुख्यालय में ऊर्जा मंत्रियों की पहली आमने-सामने की बैठक में नवंबर से उत्पादन में प्रतिदिन 20 लाख बैरल की कटौती करने का फैसला किया गया है.

इससे पहले ओपेक प्लस ने पिछले महीने उत्पादन में हल्की कटौती की थी. हालांकि, महामारी के दौरान उत्पादन में बड़ी कटौती की गई थी लेकिन पिछले कुछ माह से निर्यातक देश उत्पादन में बड़ी कटौती से बच रहे थे. ओपेक प्लस ने बयान में कहा कि यह फैसला वैश्विक आर्थिक और कच्चे तेल के बाजार परिदृश्य में अनिश्चितता को देखते हुए लिया गया है.

क्या होगा पेट्रोल और डीजल पर असर

विशेषज्ञ मान रहे हैं कि उत्पादन में कटौती से तेल के दाम और उससे बनने वाले पेट्रोल की कीमत पर विशेष असर नहीं पड़ेगा क्योंकि ओपेक प्लस के सदस्य पहले ही समूह द्वारा तय किए गए कोटा को पूरा नहीं कर पा रहे हैं.हालांकि इस कदम से पेट्रोल और डीजल के सस्ते होने की संभावना घट गई है. क्योंकि तेल उत्पादक देशों के इस कदम से संकेत गए हैं कि वो ब्रेंट क्रूड के भाव को 90 डॉलर या उससे ऊपर बनाए रखने पर अपने जोर दे रहे हैं.

अगर ब्रेंट 90 डॉलर से ऊपर रहता है तो पेट्रोल और डीजल के दामों में कटौती की बोझ सरकार को अपने ऊपर लेना होगा. यानि सरकार अगर तेल के दाम घटाना चाहती है तो उसे अपने टैक्स में कटौती करनी होगी क्योंकि आंशका है कि तेल उत्पादक देश कीमतों को एक स्तर से ऊपर बनाए रखने का मन बना चुके हैं. हालांकि मांग में रिकवरी आने पर क्रूड के ऊपर बढ़ने की स्थिति में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ जाएगा. आपको बता दें कि पिछले काफी लंबे समय से देश में तेल की खुदरा कीमतें स्थिर बनी हुई हैं

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Pooja Pandey

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