स्पीकर रहते विधानसभा में की गई नियुक्तियों को लेकर विवाद में आए काबीना मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल अब शहरी विकास विभाग में हुए 74 तबादलों को लेकर चर्चा में आ गए हैं। अग्रिम आदेश तक स्थगित है।

उत्तराखंड में शहरी विकास विभाग में तबादलों को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है. पहले शहरी विकास मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने 74 अधिकारियों का तबादला किया था. जिसपर अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रोक लगा दी है. इन तबादलों के संबंध में 17 सितंबर को नोटिस जारी किया गया था. जिसके बाद 18 सितंबर को ही विभाग के इस फैसले पर रोक लगा दी गई थी.
दरअसल, 17 सितंबर को उत्तराखंड में शहरी विकास विभाग के मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने 74 अधिकारियों और कर्मियों का तबादला किया था. जिसका नोटिस भी जारी कर दिया गया था. अब इस फैसले पर 18 सितंबर को सीएम पुष्कर सिंह धामी ने रोक लगा दी है. बताया जा रहा है कि विधानसभा में भर्ती विवाद मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल से ही शुरू हुआ था. जिसके बाद से ही वो लगातार अभी जांच के दायरे में है.
मिली जानकारी के अनुसार शहरी विकास मंत्री प्रेमचंद गुप्ता जर्मनी के दौरे पर गए हैं. वे 25 सितंबर तक वापस लौटेंगे. वह उत्तराखंड और जर्मनी के बीच सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की जानकारी साझा करेंगे.
फिर खड़े हुए सवाल
विधानसभा में भर्ती का विवाद अभी भी नहीं सुलझा है. तभी मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने 74 अधिकारियों और कर्मियों का तबादला कर दिया, जिसके बाद एक बार फिर विवाद शुरू हो गया है. बताया जा रहा है कि उत्तराखंड में तबदले की प्रक्रिया जुलाई तक खत्म हो जाती है. जुलाई तक ही सभी तबादले किए जाने अनिवार्य होते हैं. लेकिन अब शहरी विकास विभाग में हुए इन तबादलों को लेकर एक बार फिर से सवाल खड़े किए जाने लगे हैं.
अब ये नया विवाद मुख्यमंत्री को जानकारी दिए बिना इतने बड़े स्तर पर तबादले किए जाने के बाद हुआ है. जिसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इन फैसलों पर रोक लगा दी है. इनमें कई अधिकारी और कर्मी ऐसे हैं जिनका जुलाई के दौरान ही तबादला हुआ था. तबादला एक्ट के अंतर्गत उन अधिकारियों का तबादला हुआ था. लेकिन अब दो महीने बाद ही फिर से अधिकारियों का तबादला कर दिया गया है. ये तबादले आनन-फानन में किए गए हैं, तबादलों का नोटिस 17 सितंबर को जारी हुआ और अगले दिन सुबह मंत्री को विदेश दौरे पर जाना था.