दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने DTC द्वारा 1,000 लो-फ्लोर बसों की खरीद में कथित भ्रष्टाचार की जांच के लिए CBI को शिकायत भेजने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है.

दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने DTC द्वारा 1,000 लो-फ्लोर बसों की खरीद में कथित भ्रष्टाचार की जांच के लिए CBI को शिकायत भेजने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. अब इस मामले को लेकर दिल्ली सरकार और एलजी एक बार फिर आमने सामने आ गए हैं. एलजी के इस कदम पर चुटकी लेते हुए दिल्ली सरकार ने कहा कि टेंडर रद्द हो गए थे और बसें कभी खरीदी ही नहीं गई. उन्होंने कहा कि दिल्ली को ज़्यादा पढ़े लिखे LG की ज़रूरत है, मौजूदा उपराज्यपाल को पता ही नहीं वो किस पर हस्ताक्षर कर रहे हैं.
दिल्ली सरकार के बयान के मुताबिक, उपराज्यपाल पर खुद गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप हैं लिहाजा ध्यान भटकाने के लिए वह इस तरह की जांच के आदेश दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस तरह की जांचों से अब तक कोई नतीजा नहीं निकलता है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के खिलाफ निराधार शिकायत के बाद अब वह चौथे मंत्री की शिकायत कर रहे हैं, उपराज्यपाल पहले खुद के ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों का जवाब दें, फिर किसी की शिकायत को मंजूरी दें.
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि उपराज्यपाल पर आरोप है कि उन्होंने खादी ग्राम उद्योग आयोग का अध्यक्ष रहते हुए 1400 करोड़ रुपए का घोटाला किया था. आप का दावा है कि उन्होंने अपनी बेटी को बिना टेंडर के ही ठेका दिया था.
क्या है DTC से जुड़ा मामला
गौर हो कि इस साल जून में सक्सेना को संबोधित एक शिकायत में दावा किया गया था कि दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) ने “पूर्व नियोजित तरीके से” परिवहन मंत्री को बसों की निविदा व खरीद के लिए गठित समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया. शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया था कि इस टेंडर के लिए बोली प्रबंधन सलाहकार के रूप में DIMTS की नियुक्ति गलत कामों को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से की गई थी.