कथित तौर पर सरकार गिराने के लिए विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा उसके विधायकों की खरीद-फरोख्त की आशंका के कारण विधायकों को नवा रायपुर के एक आलीशान रिजॉर्ट ले जाया गया था.

भारतीय जनता पार्टी विधायक दल की बैठक रविवार शाम को पार्टी कार्यालय में आयोजित की गई। इसमें प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश, विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी समेत अन्य विधायक शामिल हुए। बैठक में सोमवार को विधानसभा के विशेष सत्र में शामिल होने का निर्णय लिया गया। पार्टी विधानसभा में हेमंत सोरेन सरकार का जमकर विरोध करेगी। हालांकि सोमवार को सुबह नौ बजे पार्टी के विधायक दोबारा बैठक करेंगे। इसमें सत्र में किस तरह की रणनीति हो, इसपर आगे की चर्चा होगी।
राज्यपाल से नहीं ली गई कोई अनुमति
बैठक के बाद बाबूलाल मरांडी ने कहा कि इस बैठक के लिए न तो राज्यपाल से अनुमति ली गई न ही कोई प्रक्रिया अपनाई गई है। सरकार को अपने ही विधायकों पर भरोसा नहीं रह गया है। किसी ने जब अविश्वास ही व्यक्त नहीं किया तो फिर यह विश्वास मत क्यों लाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को अपने विधायकों पर ही भरोसा नहीं है। जिस तरह से बस में आगे की सीट पर बैठकर मुख्यमंत्री ने कांग्रेस और झामुमो के विधायकों को हवाई जहाज में भरकर रायपुर पहुंचाया वह इस सरकार का हाल बता रहा है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ भाजपा मुखर
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री रहते हेमंत सोरेन ने अपने नाम से खदान का लीज आवंटन कराया है। यह देश में अपने तरह की इकलौती घटना है। भाजपा ने इसकी शिकायत संबंधित एजेंसी से की है और उनकी सदस्यता रद करने की मांग की है। इसके बाद से ही मुख्यमंत्री इस तरह की हरकत कर रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस और झामुमो विधायकों को रांची में घर रहते हुए गेस्ट हाउस में रहने पर भी तंज किया।
ड्रामा कर रहे हेमंत सोरेन : बिरंची
विधानसभा में विरोधी दल के मुख्य सचेतक बिरंची नारायण ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ड्रामा कर रहे हैं। वे लोगों की आंख में धूल झोंकना चाहते हैं। यह ड्रामा नहीं चलेगा। जब विश्वास प्रस्ताव आएगा तो उस दौरान भाजपा इनको बेनकाब करेगी। हम सदन के भीतर-बाहर जनहित में आवाज उठाएंगे।
राज्यपाल की अनुमति परंपरा, बाध्यता नहीं
उधर, भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने विधानसभा में विश्वास मत पर सवाल उठाते हुए कहा है कि राज्यपाल की अनुमति के बिना यह कैसे हो रहा है। झारखंड विधानसभा की नियमावली- 2008 के अनुसार सरकार द्वारा विधानसभा में रखा गया विश्वास मत विपक्ष द्वारा रखे गए अविश्वास प्रस्ताव से अलग होता है। मंत्रिपरिषद में विश्वास प्रस्ताव का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि इसे राज्यपाल के आदेश से सभा में रखा जाता है। सरकार ने जिस विश्वास मत के प्रस्ताव दिया है, उसके लिए राज्यपाल की अनुमति नहीं ली गई है। इसमें जो कार्यसूची जारी की गई है उसके मुताबिक मुख्यमंत्री द्वारा यह प्रस्ताव लाया जाएगा कि यह सभा वर्तमान मंत्रिपरिषद में विश्वास प्रकट करती है। हाल ही में दिल्ली विधानसभा में आम आदमी पार्टी ने भी इसी तरह से सदन में विश्वास प्रस्ताव पेश किया था।
नियम -15 के तहत बुलाई गई है बैठक
विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी पत्र के मुताबिक नवम सत्र या मानसून सत्र जिसे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया गया था उसी को कार्य संचालन के नियम-15 के तृतीय परंतुक में वर्णित प्रविधान के तहत बैठक बुलाने का निर्देश दिया गया है। इसी में मुख्यमंत्री द्वारा विश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाना शामिल है।