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पूर्वोत्तर में दो वर्ष के बाद फिर शुरू हुआ सीएए के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन, आंदोलकारी बोले- कभी स्वीकार नहीं करेंगे, वापस लेना ही होगा कानून

एनईएसओ सलाहकार समुज्जल भट्टाचार्य ने कहा कि सीएए को स्वीकार नहीं कर सकते और इसे वापस लेना ही होगा.

दो वर्ष के अंतराल के बाद एक बार फिर पूर्वोत्तर के कई राज्यों में बुधवार को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए हो गए। ये विरोध उत्तर पूर्व छात्र संगठन के नेतृत्व में किया जा रहा है। बुधवार को छात्र संगठन ने असम, मिजोरम, मेघालय, नगालैंड और त्रिपुरा के मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सीएए के कारण इन राज्यों में सीमावर्ती देशों से लोगों का अवैध आगमन बढ़ेगा।

भारी सुरक्षा इंतजाम के बीच ‘ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन’ (आसू) के सदस्यों ने राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया।गुवाहाटी में आसू के मुख्यालय के बाहर विरोध-प्रदर्शन किया गया। आसू, नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (एनईएसओ) का हिस्सा है।

एनईएसओ सलाहकार समुज्जल भट्टाचार्य ने कहा, असम के लोग कभी सीएए को स्वीकार नहीं कर सकते और इसे वापस लेना ही होगा। उन्होंने कहा, महामारी के कारण दो साल पहले हमें अपना विरोध-प्रदर्शन निलंबित करना पड़ा था। हालांकि, हमने दोबारा प्रदर्शन शुरू करने का फैसला किया है ताकि सीएए लागू नहीं हो सके। सूत्रों से मिली खबर के मुताबिक इसी तरह से बुधवार को मिजोरम, मेघालय, नगालैंड और त्रिपुरा में भी सीएए के विरोध में छात्र संगठन सड़कों पर उतरे।

कभी स्वीकार नहीं करेंगे सीएए

एनईएसओ सलाहकार समुज्जल भट्टाचार्य ने कहा कि असम के लोग कभी सीएए को स्वीकार नहीं कर सकते और इसे वापस लेना ही होगा. उन्होंने कहा, ‘महामारी के कारण दो साल पहले हमे अपना विरोध-प्रदर्शन निलंबित करना पड़ा था. हालांकि, हमने दोबारा प्रदर्शन शुरू करने का फैसला किया है ताकि सीएए लागू नहीं हो सके.’ भट्टाचार्य ने कहा, ‘हालांकि, इस अन्यायपूर्ण कानून के खिलाफ असमिया लोगों के दिलों में गुस्सा बरकरार है और इसके खिलाफ हमारा विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक इसे निरस्त नहीं किया जाता.

पूर्वोत्तर राज्यों की राजधानियों में प्रदर्शन

इसके अलावा प्रभावशाली NESO ने विवादास्पद कानून को खत्म करने सहित विभिन्न मांगों के समर्थन में पूर्वोत्तर राज्यों की राजधानियों में विरोध प्रदर्शन किया. इसमें बाढ़ से संबंधित मुद्दों से संबंधित, प्रवासियों की आमद, सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम को पूरी तरह से समाप्त करना, स्वदेशी समुदायों को संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करना, सभी पूर्वोत्तर राज्यों में स्वदेशी लोगों की रक्षा के लिए इनर लाइन परमिट लागू करना और असम समझौते, 1985 के खंड 6 के कार्यान्वयन शामिल हैं.

पहली बार 2019 में हुआ सीएए का विरोध

मालूम हो कि सीएए का विरोध पहली बार 2019 में असम, पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में शुरू हुआ था और कोविड -19 महामारी के प्रकोप से पहले 2020 तक कुछ समय तक जारी रहा. असम में सीएए के विरोध में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई, जिसमें कई दिनों तक बड़े पैमाने पर हिंसा और कर्फ्यू लगाया गया.

कांग्रेस, वामदल ने भी किया सीएए का विरोध

एनईएसओ, आसू के अलावा, विभिन्न आदिवासी संगठनों, कांग्रेस और वाम दलों सहित राजनीतिक दलों ने सीएए का कड़ा विरोध किया है. सीएए गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों – हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों को भारतीय नागरिकता प्रदान करना चाहता है, जो 31 दिसंबर, 2014 तक बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न का सामना करने के बाद पलायन कर चुके हैं.

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Pooja Pandey

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