केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने कहा है कि धार्मिक और परमार्थ संस्थानों द्वारा संचालित सरायों के कमरे के किराये या संपत्तियों पर माल एवं सेवा कर (जीएसीटी) नहीं लगेगा.

संसद के मॉनसून सत्र में विपक्षी दलों की ओर से महंगाई और बेरोजगारी समेत कई मुद्दों पर जारी हंगामे के बीच आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा आज शुक्रवार को दल-बदल कानून में संशोधन के लिए प्राइवेट बिल पेश करेंगे. राघव चड्ढा बिल के जरिए यह मांग करेंगे कि सांसद या विधायक की ओर से दल बदलने की सूरत में वह अगले 6 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगाई जाए.
राघव चड्ढा ने आज इस मामले में ट्वीट कर कहा, “इस देश में दल-बदल विरोधी कानून टूट गया है, और भ्रष्ट नेताओं को सरकार की अस्थिरता से अप्रत्याशित लाभ कमाने को लेकर मौका बना रहा है. मैं संविधान संशोधन और इस टूटे हुए कानून को ठीक करने के लिए आज राज्यसभा में एक प्राइवेट मेंबर्स बिल पेश कर रहा हूं.”
कानून में कई बदलाव की मांग
पिछले कुछ समय में कई राज्यों में दल बदल की घटनाएं हुई हैं, और इस दौरान ‘रिजॉर्ट पॉलिटिक्स’ भी खूब चर्चा में होती है. राघव के बिल के अनुसार, ‘रिजॉर्ट पॉलिटिक्स’ रोकने के लिए स्पीकर के आदेश पर 7 दिन में विधायक या सांसद को सदन में पेश होना होगा. साथ ही यह भी प्रस्तावित है कि व्हिप का नियम सिर्फ नो कॉन्फिडेंस मोशन पर ही लागू हो. एंटी डिफेक्शन को रोकने के लिए दो तिहाई की जगह तीन चौथाई विधायकों का समर्थन अनिवार्य होना चाहिए.
आम आदमी पार्टी के सांसद राघव की ओर से पेश किए जाने वाले बिल के अनुसार, अगर कोई भी सांसद या विधायक चुनाव जीतने के बाद अपना दल बदलता है तो उसे 6 साल तक चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया जाए. ‘रिजॉर्ट पॉलिटिक्स’ को रोकने के लिए स्पीकर के सामने 7 दिन के अंदर विधायक और सांसदों को हाजिर होना अनिवार्य हो. अगर कोई विधायक या सांसद ऐसा नहीं कर पाता तो उन्हें डिसक्वालीफाई कर दिया जाए.
व्हिप मामले में भी मिले आजादी
साथ ही सांसदों को अपने मत का इस्तेमाल करने की आजादी मिले. व्हिप लग जाने के कारण सांसदों से कई अहम बिल पर निष्पक्ष वोटिंग करने का अधिकार छिन जाता है, व्हिप का नियम सिर्फ ‘नो कॉन्फिडेंस मोशन’ पर ही लागू होना चाहिए.