रिपोर्ट के अनुसार, संजय राउत और उनके परिवार के सदस्य अपराध की आय के प्रत्यक्ष लाभार्थी हैं. हालांकि संजय राउत के वकील अशोक मुंदरगी ने कहा कि उनके मुवक्किल पर लगाए गए सभी आरोप निराधार और अस्पष्ट हैं.

प्रवर्तन निदेशालय ने दावा किया है कि उसके पास शिवसेना नेता संजय राउत के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं, जिन्हें एजेंसी ने 1,034 करोड़ रुपये के पात्रा चॉल घोटाले से संबंधित धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत एक मामले में गिरफ्तार किया है. राउत के गिरफ्तारी ज्ञापन के अनुसार शिवसेना नेता पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 19 (1) के तहत मामला दर्ज किया गया है. ज्ञापन में लिखा है, “मुंबई जोनल ऑफिस , मेरे पास मौजूद सामग्री के आधार पर, यह मानने का कारण है कि संजय राजाराम राउत, आर/ओ मैत्री निवास, फ्रेंड्स कॉलोनी, भांडुप ईस्ट, मुंबई, के तहत दंडनीय अपराध का दोषी है.”
ईडी के गिरफ्तारी ज्ञापन के अनुसार, “अब, मुझे धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 की धारा 19 की उप-धारा (1) के तहत प्रदान की गई शक्तियों का प्रयोग करते हुए, मैं संजय राजाराम राउत को दिनांक 01.08.2022 को पूर्वाह्न् 12.05 बजे गिरफ्तार करता हूं और संजय राजाराम राउत को इस तरह की गिरफ्तारी के कारणों से अवगत करा दिया गया है.” रविवार की मध्यरात्रि के बाद गिरफ्तार किए गए राउत को मुंबई की एक विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया, जिसने उन्हें 4 अगस्त तक ईडी की हिरासत में भेज दिया. ईडी ने तर्क दिया कि इस मामले में उसकी हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता है क्योंकि वह पूछताछ के दौरान टाल-मटोल कर रहे थे.
ईडी की ओर से पेश विशेष लोक अभियोजक हितेन वेनेगांवकर ने अदालत से कहा कि राउत और उनका परिवार अपराध से अर्जित धन के प्रत्यक्ष लाभार्थी हैं. राउत की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक मुंदारगी ने कहा कि आरोप अस्पष्ट हैं और ये राजनीतिक प्रतिशोध के चलते लगाए गए हैं. राउत ने अपनी ओर से पूरे मामले को केंद्र की बदले की राजनीति करार दिया है.
ईडी ने कड़ी सुरक्षा के बीच संजय राउत को विशेष अदालत के समक्ष पेश किया था, जहां से कोर्ट ने उन्हें ईडी की हिरासत में भेजने का आदेश दिया. ईडी ने रविवार को राउत के घर छापेमारी करने के बाद मुंबई की पात्रा चॉल के पुनर्विकास में कथित अनियमितताओं से जुड़े एक मामले में उन्हें गिरफ्तार कर लिया था.