सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन ने यस बैंक-डीएचएफएल मामले में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है. अविनाश भोसले और छह अन्य कंपनियों के खिलाफ यह चार्जशीट दाखिल की गई है.

सीबीआई ने येस बैंक-डीएचएफएल घोटाले के सिलसिले में पुणे के जाने-माने बिल्डर अविनाश भोसले और उनकी कंपनियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि मुंबई में विशेष सीबीआई अदालत में दायर पूरक आरोपपत्र से संबंधित मामले में एजेंसी ने सत्यन गोपालदास टंडन, मेट्रोपोलिस होटल्स एलएलपी, एबीआईएल इन्फ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, एबीआईएल हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड, अरिंदम डेवलपर्स, अविनाश भोसले ग्रुप और फ्लोरा डेवलपमेंट लिमिटेड को भी नामजद किया है।
सीबीआई ने आरोप लगाया है कि भोसले की कंपनियों सहित विभिन्न बिल्डरों के माध्यम से ऋण और परामर्श सेवाओं के रूप में 4,727 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई।
वधावन ब्रदर्शन को दिल्ली लाई सीबीआई की टीम
पिछले सप्ताह केंद्रीय जांच ब्यूरो के अधिकारियों की टीम यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व में 17 बैंकों के एक संघ को कथित तौर पर धोखा देने के मामले में डीएचएफएल के पूर्व प्रमोटर कपिल और धीरज वाधवान को मुंबई से दिल्ली ले गई. सीबीआई अब डीएचएफएल के इन दोनों प्रमोटर को अदालत में पेश कर उनकी रिमांड ले सकती है. इन दोनों पर हाल ही में मुकदमा दर्ज किया गया था. बता दें कि वाधवान बंधुओं सहित एफडी धारक और एनसीडी धारकों ने पीरामल हाउसिंग को महज 1 रुपए में 40 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति उपहार में देने के लिए बैंक के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी.
बैंकों को 34615 करोड़ का चूना लगाया गया
सीबीआई ने 34615 करोड़ रुपए के देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटाले में कपिल वधावन, धीरज वधावन और कई अन्य लोगों को आरोपी बनाया है. इस मामले में 20 जून को एफआईआर दर्ज किया गया था. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत पर सीबीआई ने यह मामला दर्ज किया था. 17 बैंकों के कंसोर्टियम का नेतृत्व यूनियन बैंक ऑफ इंडिया कर रहा था.