यातायात नियमों के उल्लंघन के आरोप में पकड़े जाने पर ट्रैफिक पुलिस क्या आपका लाइसेंस सस्पेंड या कैंसल कर सकती है. शायद आपको इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होगी. अब कोलकाता हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर बड़ा फैसला दिया है.

कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को दोहराया कि पुलिस के पास ड्राइविंग लाइसेंस को निलंबित करने का कोई अधिकार नहीं है. न्यायमूर्ति मौसमी भट्टाचार्य ने यह आदेश पारित करते हुए पुलिस को याचिकाकर्ता प्रियशा भट्टाचार्य को ड्राइविंग लाइसेंस वापस करने का निर्देश दिया. मार्च 2020 में जस्टिस देबांगसु बसाक ने भी ऐसा ही आदेश पारित किया था. 19 मई, 2022 को, याचिकाकर्ता साउथ सिटी मॉल से न्यू अलीपुर के लिए घर जा रही थी, जब उसके वाहन को ट्रैफिक पुलिस ने रोक लिया. वह 30 किमी/घंटा की गति सीमा के साथ 62.1 किमी/घंटा की गति से गाड़ी चला रही थी. पुलिस ने उसका लाइसेंस जब्त कर लिया है. कुछ दिनों बाद, उसने पुलिस को एक ई-मेल भेजकर अपना ड्राइविंग लाइसेंस वापस करने का अनुरोध किया. उन्हें बताया गया कि उनका ड्राइविंग लाइसेंस 90 दिनों के लिए निलंबित कर दिया गया है.
प्रियाशा ने अधिवक्ता फिरोज एडुल्जी और अमृता पांजा मौलिक के माध्यम से उच्च न्यायालय का रुख किया. मोटर वाहन अधिनियम और पिछले निर्णयों के प्रावधानों का हवाला देते हुए, एडुल्जी ने अदालत में तर्क दिया कि पुलिस एक लाइसेंस जब्त कर सकती है, लेकिन इसे मोटर वाहन विभाग को सौंप देना चाहिए, जो इसका मूल जारीकर्ता है. यह इस विभाग को तय करना है कि लाइसेंस को निलंबित करना है या रद्द करना है.
क्या था ड्राइविंग लाइसेंस का मामला
हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाली प्रियशा भट्टाचार्य 19 मई, 2022 को साउथ सिटी मॉल से न्यू अलीपुर के लिए घर जा रही थी. उसी दौरान उनकी गाड़ी को ट्रैफिक पुलिस ने रोक लिया. भट्टाचार्य के मुताबिक वह 62.1 किमी/घंटा की स्पीड के साथ गाड़ी चला रही थीं. ओवरस्पीडिंग के आरोप में पुलिस ने उनका ड्राइविंग लाइसेंस जब्त कर लिया. कुछ दिनों बाद उन्होंने पुलिस को एक ई-मेल भेजकर अपना ड्राइविंग लाइसेंस वापस करने का अनुरोध किया. इस पर पुलिस ने रिवर्ट ईमेल करके बताया कि उनका ड्राइविंग लाइसेंस 90 दिनों के लिए निलंबित कर दिया गया है.
‘पुलिस ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड नहीं कर सकती’
इसके बाद प्रियाशा ने अपने वकील फिरोज एडुल्जी और अमृता पांजा मौलिक के जरिए कोलकाता हाईकोर्ट में याचिका दायर की. फिरोज एडुल्जी ने मोटर वाहन अधिनियम और विभिन्न अदालतों के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि नियमों के उल्लंघन पर ट्रैफिक पुलिस को ड्राइविंग लाइसेंस जब्त करने का अधिकार है लेकिन इसके बाद उस लाइसेंस को मोटर वाहन विभाग को सौंप देना चाहिए. चूंकि मोटर वाहन विभाग ही ड्राइविंग लाइसेंस जारी करता है, इसलिए उसे ही यह तय करना चाहिए कि लाइसेंस सस्पेंड किया जाए या रद्द कर दिया जाए. इस मुद्दे पर कोलकाता ट्रैफिक पुलिस ने कोर्ट में तर्क रखकर अपनी कार्रवाई को जायज ठहराया.
‘मोटर वाहन विभाग कर सकता है लाइसेंस पर फैसला’
दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद जस्टिस भट्टाचार्य ने आदेश दिया कि चूंकि ट्रैफिक पुलिस को ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने का अधिकार नहीं है, इसलिए वह उसे सस्पेंड या रद्द भी नहीं कर सकती. उसे जब्त किए हुए लाइसेंसों को हर हाल में मोटर वाहन विभाग को सौंपना ही होगा. उसके बाद वह विभाग गुण-दोष के आधार पर लाइसेंस पर फैसला लेगा. कोर्ट ने ट्रैफिक पुलिस को ऑर्डर दिया कि वह 2 सप्ताह में वादी प्रियाशा को ड्राइविंग लाइसेंस वापस करे. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को भी नसीहत दी कि गाड़ी चलाते समय अधिक जिम्मेदारी का परिचय दें और कुछ भी ऐसा न करें, जिससे दूसरों की जान को खतरा हो.