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सुप्रीम कोर्ट ज्ञानवापी परिसर में ‘शिवलिंग’ की पूजा से संबंधित दायर याचिका पर सुनवाई के लिए स्वीकार्य

याचिका में शिवलिंग की कार्बन डेटिंग कराने की मांग भी की गई है. याचिका में कहा गया है कि कार्बन डेटिंग से पता चलेगा कि शिवलिंग कितना प्राचीन है. याचिका में सुप्रीम कोर्ट से ज्ञानवापी परिसर की जीपीएस पड़ताल यानी ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार सिस्टम के जरिए भूमिगत परिस्थिति का पता लगाने का आदेश देने की मांग की गई है.

ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में मिले शिवलिंग की दर्शन-पूजन की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट जल्द सुनवाई के लिए तैयार हो गया है. शीर्ष अदालत इस याचिका पर 21 जुलाई को सुनवाई करेगी, जिसमें शिवलिंग की कार्बन डेटिंग कराने की मांग भी की गई है. याचिका में कहा गया है कि कार्बन डेटिंग से पता चलेगा कि शिवलिंग कितना प्राचीन है. याचिका में सुप्रीम कोर्ट से ज्ञानवापी परिसर की जीपीएस पड़ताल यानी ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार सिस्टम के जरिए भूमिगत परिस्थिति का पता लगाने का आदेश देने की मांग की गई है.

हिंदू पक्ष की ओर से दायर इस याचिका में मांग की गई है कि अभी सावन का पवित्र महीना चल रहा है और ज्ञानवापी मस्जिद स्थित शिवलिंग की पूजा करना उनका मौलिक अधिकार है. याचिकाकर्ता ने कहा है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 में वर्णित ‘अंतरात्मा की स्वतंत्रता और धर्म के स्वतंत्र पेशे, अभ्यास और प्रचार की स्वतंत्रता’ के तहत हिंदुओं को अपने अधिकार का प्रयोग करने की अनुमति दी जा सकती है. इसलिए सर्वोच्च अदालत हिंदुओं को वहां पूजा करने की अनुमति दे. वाराणसी की जिला अदालत में इस मामले पर पहले से ही सुनवाई चल रही है.

याचिका में और क्या कहा गया है?

आपको बता दें कि कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति दल के अध्यक्ष राजेश मणि त्रिपाठी की ओर से ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में सर्वेक्षण के दौरान जिस स्थान पर शिवलिंग मिला था, उस स्थान पर धार्मिक अनुष्ठान करने की अनुमति देने की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है. याचिका में कहा गया है, ‘आवेदक वाराणसी कोर्ट द्वारा पारित आदेश के अनुसरण में किए गए सर्वेक्षण के दौरान पाए गए ‘शिवलिंग’ पर भारत के संविधान के तहत गारंटी के रूप में अपनी धार्मिक प्रथाओं का प्रदर्शन करना चाहता है.’

इस याचिका में आगे कहा गया है कि सर्वेक्षण के दौरान मिले शिवलिंग को संबंधित अदालत द्वारा पारित आदेश के तहत संरक्षित किया गया है. यद्यपि उक्त शिवलिंग को शीर्ष न्यायालय के आदेश द्वारा संरक्षित किया गया है, लेकिन फिर भी भक्तों, भगवान शिव के भक्तों को उक्त स्थान पर पूजा करने और अनुष्ठान करने के लिए कोई प्रतिबंध नहीं है. 20 मई को, शीर्ष न्यायालय ने 17 मई को अपने अंतरिम आदेश को जारी रखने का निर्देश दिया था. जिसमें उसने स्पष्ट किया था कि वाराणसी कोर्ट के उस आदेश की रक्षा करने का आदेश, जहां शिवलिंग पाए जाने का दावा किया गया था, मुसलमानों को नमाज अदा करने और धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए मस्जिद में प्रवेश के अधिकार को प्रतिबंधित नहीं करेगा.

वाराणसी की कोर्ट में इस संबंध में पहले ही सुनवाई चल रही है
सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू महिलाओं द्वारा मस्जिद परिसर में देवताओं की पूजा के अधिकार की मांग वाले मुकदमे को सिविल जज जूनियर डिवीजन से वाराणसी जिला न्यायालय में ट्रांसफर कर दिया था. मामले की सुनवाई जिला कोर्ट में चल रही है. गत 13 जुलाई को ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी मामले में वाराणसी की जिला अदालत में हिंदू पक्ष ने अपनी दलीलें रखीं और दावा किया कि ज्ञानवापी मस्जिद के मामले में उपासना स्थल अधिनियम लागू नहीं होता. शासकीय अधिवक्ता राणा संजीव सिंह ने बताया कि हिंदू पक्ष की ओर से अधिवक्ता हरिशंकर जैन और विष्णु जैन ने दलीलें रखीं. सिंह ने बताया कि हरिशंकर जैन ने अदालत में कहा कि इस मामले में 1991 का उपासना स्थल अधिनियम किसी भी तरीके से लागू नहीं होता

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Pooja Pandey

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